वसीयत नहीं बनाई तो संपत्ति किसे मिलेगी? बेटी के हक से लेकर भरण-पोषण तक जानें नियम

On: October 4, 2026 10:10 AM
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फरीदाबाद: अगर परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद है या माता-पिता को उनके बच्चों से भरण-पोषण नहीं मिल रहा है, तो कानून में उनके अधिकारों को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं. बेटी शादीशुदा हो या अविवाहित, पैतृक संपत्ति में उसके अधिकार को केवल शादी के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता. फरीदाबाद सेक्टर 12 कोर्ट की वकील प्रेमलता ने Local18 से बातचीत में संपत्ति के बंटवारे, बेटियों के अधिकार और माता-पिता की देखभाल से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी दी.

बेटे-बेटी का संपत्ति में बराबर अधिकार

वकील प्रेमलता बताती हैं कि पिता की संपत्ति में बेटे और बेटी का बराबर अधिकार होता है. शादीशुदा बेटी भी अपने हिस्से की हकदार होती है. जिस तरह बेटे को उसका हिस्सा मिलता है, उसी तरह बेटी को भी कानूनी अधिकार प्राप्त होता है.

माता-पिता की मर्जी के बिना संपत्ति नहीं बेच सकता बेटा

प्रेमलता बताती हैं कि माता-पिता के जीवित रहते बेटा उनकी संपत्ति अपनी मर्जी से नहीं बेच सकता. अगर कोई संतान ऐसा कदम उठाती है, तो माता-पिता या प्रभावित भाई-बहन कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं. मामले में अदालत की मदद ली जा सकती है.

बच्चों की देखभाल नहीं करने पर माता-पिता ले सकते हैं कानून की मदद

प्रेमलता बताती हैं कि अगर बच्चे अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करते हैं, तो माता-पिता Senior Citizen Act के तहत कोर्ट में जा सकते हैं. इस कानून के माध्यम से वे अपनी जरूरतों और देखभाल को लेकर राहत मांग सकते हैं. बच्चों की जिम्मेदारी होती है कि वे माता-पिता की सुख-सुविधाओं और जरूरी जरूरतों का ध्यान रखें.

पैतृक संपत्ति में बेटी अपना हक छोड़ भी सकती है

प्रेमलता बताती हैं कि पैतृक संपत्ति में बेटी का हिस्सा बेटे के बराबर होता है. दादा-दादी से मिली जमीन और पैतृक संपत्ति में बेटी अपने अधिकार का दावा कर सकती है. हालांकि अगर वह अपनी इच्छा से अपना हिस्सा भाइयों के पक्ष में छोड़ना चाहती है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना हक त्याग सकती है.

वसीयत नहीं होने पर कैसे होगा संपत्ति का बंटवारा

प्रेमलता बताती हैं कि अगर माता-पिता ने कोई वसीयत नहीं बनाई है, तो संपत्ति के बंटवारे के लिए कोर्ट की मदद ली जा सकती है. ऐसे मामले में कानूनी प्रक्रिया के जरिए संबंधित उत्तराधिकारियों के बीच संपत्ति का बंटवारा कराया जाता है.

भरण-पोषण के लिए Senior Citizen Act में प्रावधान

प्रेमलता बताती हैं कि Senior Citizen Act के तहत माता-पिता अपने बच्चों से भरण-पोषण की मांग कर सकते हैं. अगर संतान उनका पालन-पोषण नहीं करती है, तो वे कानून का सहारा लेकर राहत मांग सकते हैं. वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग भी अपनी जरूरतों के लिए इस कानून के तहत अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं.

देखभाल नहीं करने वाले बच्चे के खिलाफ भी ले सकते हैं कार्रवाई

प्रेमलता बताती हैं कि माता-पिता को अपने बच्चों से भरण-पोषण मांगने का पूरा अधिकार है. वहीं कुछ परिस्थितियों में माता-पिता अपनी संपत्ति से ऐसे बच्चे को बेदखल करने की कानूनी प्रक्रिया भी अपना सकते हैं, जो उनकी देखभाल नहीं करता या उनके साथ जिम्मेदारी से व्यवहार नहीं करता.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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