हरियाणा में 2 सरपंच सस्पेंड, श्मशान घाट और गौचरान भूमि पर कागजों में उगा दी फसल

On: May 8, 2026 6:12 PM
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हरियाणा के Karnal जिले में पंचायत स्तर पर बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां सरकारी और गैर काश्त योग्य जमीन को फर्जी तरीके से खेती योग्य दिखाकर “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर फसल दर्ज करने का मामला उजागर हुआ है। जांच में खुलासा हुआ कि श्मशान घाट, स्कूल और गौचरान जैसी जमीनों को भी कागजों में खेती योग्य दिखाया गया और फर्जी पंजीकरण के जरिए आर्थिक लाभ उठाया गया। मामले में कार्रवाई करते हुए जिला उपायुक्त ने ग्राम पंचायत अमुपुर और सांभली के सरपंचों को निलंबित कर दिया है।

 

जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि दोनों पंचायतों की चल-अचल संपत्ति अब बहुमत प्राप्त पंच को सौंपी जाएगी। साथ ही Sub Divisional Officer Nilokheri को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें 30 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

 

पूरा मामला गांव सांभली निवासी पंच Balraj Sharma की शिकायत के बाद सामने आया। उन्होंने 9 जुलाई 2025 को जिला उपायुक्त को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत सांभली और अमुपुर के सरपंचों ने गैर काश्त, गैर मुमकिन और बंजर जमीन को भी “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर गेहूं और धान की फसल के रूप में दर्ज करवा दिया। शिकायत में यह भी कहा गया कि सरकारी जमीन पर कागजों में फसल उगाकर उसे मंडी में बेचने तक का खेल किया गया।

 

जांच में सामने आया कि इस पूरे मामले में एक आढ़ती और उसके परिवार के सदस्यों को किसान दिखाकर पोर्टल पर पंजीकरण किया गया, जबकि असल में जमीन पर खेती करने वाले लोग कोई और थे। आरोप है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी योजनाओं और फसल बिक्री का अनुचित लाभ उठाया गया।

 

मामले की शिकायत मिलने के बाद संयुक्त जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर 1 दिसंबर 2025 को दोनों सरपंचों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके बाद 11 मार्च को निजी सुनवाई के लिए बुलाया गया और 27 मार्च को सुनवाई पूरी की गई।

 

जांच रिपोर्ट में गांव अमुपुर की करीब 94 एकड़ जमीन का उल्लेख किया गया। इसमें से लगभग 6 एकड़ से अधिक जमीन गैर काश्त और गैर मुमकिन श्रेणी में थी, जहां खेती संभव नहीं थी। इसके बावजूद पूरी जमीन को एक व्यक्ति के नाम पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया। इसी तरह गांव सांभली में भी गैर काश्त योग्य जमीन को खेती योग्य दिखाकर पोर्टल पर फसल रिकॉर्ड दर्ज किया गया।

 

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आढ़ती ईश्वर चंद, उसके पुत्र नवीस कुमार और पुत्रवधु पूनम के नाम पर जमीन पोर्टल की गई थी। जांच अधिकारियों ने पाया कि कई स्थानों पर वास्तविक पट्टेदार अलग थे, लेकिन रिकॉर्ड में दूसरे लोगों को किसान दिखाया गया।

 

इस मामले की जांच के लिए आवेदन को Agriculture and Farmers Welfare Department Karnal और बीडीपीओ निसिंग कार्यालय को भेजा गया था। बाद में कृषि विभाग और पंचायत विभाग की रिपोर्ट में गड़बड़ियों की पुष्टि हुई।

 

शिकायतकर्ता Balraj Sharma ने आरोप लगाया कि इस पूरे फर्जीवाड़े से सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया और पंचायत पद का दुरुपयोग किया गया। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की।

 

जिला उपायुक्त ने साफ किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद जिले की अन्य पंचायतों में भी ऐसे मामलों की जांच की संभावना बढ़ गई है और प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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