1 हजार में मिल रही सिल्क साड़ी, बनाने में लगते हैं 4 दिन, भागलपुर से फरीदाबाद बेचने लाए फैयाज

On: October 25, 2026 4:30 PM
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Faridabad ki local news : बिहार के भागलपुर की सिल्क साड़ियों का फरीदाबाद में जलवा देखने को मिल रहा है. 1000 रुपये से 4000 रुपये तक की साड़ियां ग्राहकों को खूब पसंद आ रही हैं. मोहम्मद फैयाज 36 साल से इस काम से जुड़े हैं. हैंडलूम पर तैयार इन साड़ियों पर दिवाली के मौके पर 20% से 30% तक की छूट भी मिल रही है. लोकल 18 से मोहम्मद फैयाज बताते हैं कि भागलपुर सिल्क के लिए मशहूर है. यहां रॉ सिल्क, मुंगा सिल्क, तसर सिल्क और गीचा सिल्क जैसी कई तरह की साड़ियां तैयार की जाती हैं. कुछ साड़ियों पर फ्रेम की मदद से डिजाइन तैयार किए जाते हैं, जबकि कुछ साड़ियों पर मधुबनी पेंटिंग हाथ से बनाई जाती है. मोहम्मद फैयाज बताते हैं कि वे तीन साल से फरीदाबाद आकर साड़ियां बेच रहे हैं.

फरीदाबाद. साड़ी खरीदने के लिए अगर आपको हजारों रुपये खर्च करने पड़ें, तो शायद आप बजट के बारे में जरूर सोचेंगे. लेकिन अगर आपको एक हजार रुपये से लेकर चार हजार रुपये तक में सिल्क की साड़ी मिल जाए, तो खरीदारी का मन जरूर करेगा. बिहार के भागलपुर की सिल्क साड़ियां इन दिनों फरीदाबाद में लोगों को पसंद आ रही हैं. इन साड़ियों को तैयार करने में कारीगरों को कई दिनों की मेहनत लगती है. मोहम्मद फैयाज भागलपुर से हर साल फरीदाबाद में अपनी साड़ियां बेचने आते हैं. इस बार वह ग्राहकों को 20 से 30 प्रतिशत तक की छूट भी दे रहे हैं. लोकल 18 से मोहम्मद फैयाज बताते हैं कि बिहार के भागलपुर का रहने वाला हूं. भागलपुर सिल्क के लिए काफी मशहूर है. यहां रॉ सिल्क, मुंगा सिल्क, तसर सिल्क और गीचा सिल्क जैसी कई तरह की साड़ियां तैयार की जाती हैं. इन्हें हाथ से तैयार किया जाता है. सिल्क का धागा रेशम के कीड़ों से मिलने वाले कोकून से निकाला जाता है. इसके बाद धागे से कपड़ा तैयार किया जाता है और फिर साड़ी बुनी जाती है.

एक साड़ी कितने दिन में तैयार

मोहम्मद फैयाज बताते हैं कि एक सिल्क की साड़ी तैयार करने में तीन से चार दिन तक लग जाते हैं. यह काम हैंडलूम पर किया जाता है. मेरे परिवार में यह काम दादा के समय से चला आ रहा है. मैं खुद 36 से 37 साल से इस काम को कर रहा हूं. इस काम में मेरे साथ मेरी पत्नी भी हाथ बंटाती हैं. फिलहाल घर पर तीन से चार कारीगर काम करते हैं. इस तरह साड़ियों को तैयार करने के काम से कई लोगों को रोजगार भी मिलता है. मोहम्मद फैयाज के मुताबिक उनके पास कुछ साड़ियों पर फ्रेम की मदद से डिजाइन तैयार किए जाते हैं, जबकि कुछ साड़ियों पर मधुबनी पेंटिंग हाथ से बनाई जाती है. हाथ से पेंटिंग की गई साड़ियों की कीमत थोड़ी ज्यादा होती है. सिल्क के सूट की कीमत 1500 से 3000 रुपये तक है.

सरकारी कार्यक्रमों में न्योता

मोहम्मद फैयाज बताते हैं कि वे तीन साल से फरीदाबाद आकर साड़ियां बेच रहे हैं. फरीदाबाद में उनके पास कई ग्राहक हैं. इस बार ग्राहकों को दिवाली के मौके पर 20 से 30 प्रतिशत तक की छूट दे रहा हूं. लोग साड़ी खरीदते समय उसकी क्वालिटी पर ध्यान देते हैं. जब उन्हें प्योर सिल्क की साड़ी मिलती है, तो वे दोबारा भी खरीदारी करने आते हैं. मोहम्मद फैयाज बताते हैं कि भागलपुर की सिल्क साड़ियों और हाथ से बने कपड़ों की पहचान के कारण मुझे सरकारी कार्यक्रमों में भी बुलाया जाता है. वहां वे अपने उत्पादों को लोगों के सामने रखते हैं. इस काम में मेहनत काफी लगती है, लेकिन जब ग्राहक साड़ियों को पसंद करते हैं और पुराने ग्राहक दोबारा खरीदारी करने आते हैं, तो अच्छा लगता है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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