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Diabetes symptoms : 25-35 साल के युवाओं में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि कई मरीजों में लंबे समय तक कोई लक्षण नहीं दिखते. लोकल 18 ने इस बारे में फरीदाबाद के डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉ. निशांत रायजादा से बात की. डॉ. निशांत बताते हैं कि एक समय था जब डायबिटीज को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब सामान्य डायबिटीज भी 30 साल की उम्र में देखने को मिल रही है. करीब 50 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें कोई लक्षण महसूस ही नहीं होता. जांच कराने पर पता चलता है उनका शुगर लेवल बढ़ा हुआ है. शुगर की जांच खाली पेट और खाना खाने के बाद दोनों समय की जाती है. एक जांच एचबीए1सी भी होती है, जिससे पिछले तीन महीने की औसत शुगर का पता चलता है.
फरीदाबाद. एक समय था जब डायबिटीज को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. आज 25 से 35 साल के युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह हमारी बदलती जीवनशैली है. घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, बाहर का जंक फूड खाना, बढ़ता वजन, तनाव, कम नींद और शरीर की कम गतिविधि लोगों को कम उम्र में ही डायबिटीज की ओर धकेल रही है. सबसे चिंता की बात यह है कई लोगों को लंबे समय तक इसका कोई साफ लक्षण भी महसूस नहीं होता. जब तक जांच नहीं कराई जाती, तब तक बीमारी का पता ही नहीं चलता. ऐसे में समय-समय पर शुगर की जांच कराना, संतुलित खानपान अपनाना और रोजाना थोड़ी देर योग या व्यायाम करना इस बीमारी से बचने का सबसे आसान और असरदार तरीका माना जाता है.
ये कहना बिल्कुल गलत
लोकल 18 से बातचीत में फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल के डायबिटीज स्पेशलिस्ट (एंडोक्राइनोलॉजी) डॉ. निशांत रायजादा बताते हैं कि यह कहने के लिए कि अब डायबिटीज सिर्फ ज्यादा उम्र के लोगों की बीमारी नहीं रही. पहले माना जाता था कि कम उम्र में होने वाली डायबिटीज अलग तरह की होती है, लेकिन अब सामान्य डायबिटीज भी 30 साल की उम्र में देखने को मिल रही है. इसलिए यह सोचना कि कम उम्र में डायबिटीज नहीं हो सकती, बिल्कुल गलत है. डॉ. निशांत रायजादा बताते हैं कि करीब 50 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें कोई लक्षण महसूस ही नहीं होता. जांच कराने पर पता चलता है उनका शुगर लेवल बढ़ा हुआ है. उनसे पूछा जाए तो वह कहते हैं कि उन्हें कोई परेशानी नहीं है. इसलिए सिर्फ लक्षणों का इंतजार करने की बजाय समय-समय पर जांच कराना जरूरी है.
शुरुआत में कौन-कौन से संकेत
डॉ. निशांत रायजादा बताते हैं कि जिन लोगों में शुगर के लक्षण दिखाई देते हैं, उनमें ज्यादा भूख लगना, बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, बिना वजह वजन कम होना और शरीर में दर्द रहना जैसे संकेत देखने को मिल सकते हैं. ऐसे लक्षण नजर आएं तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत जांच करानी चाहिए. शुगर की जांच खाली पेट और खाना खाने के बाद दोनों समय की जाती है. एक जांच एचबीए1सी भी होती है, जिससे पिछले तीन महीने की औसत शुगर का पता चलता है. कई बार खाली पेट शुगर सामान्य रहती है, लेकिन खाना खाने के बाद बढ़ जाती है. इसलिए जब खाली पेट, खाना खाने के बाद की शुगर और एचबीए1सी तीनों सामान्य हों तभी माना जाता है कि डायबिटीज पूरी तरह नियंत्रण में है.
10 से 12 साल के बच्चों में भी
डॉ. निशांत रायजादा बताते हैं कि सिर्फ चीनी या मीठा बंद कर देने से शुगर सामान्य नहीं होती. इसके लिए संतुलित खानपान जरूरी है. डाइटिशियन की सलाह लेकर ऐसा भोजन लेना चाहिए, जिसमें रोटी, दाल, सब्जी, दूध, दही और सलाद सभी चीजें संतुलित मात्रा में शामिल हों. शरीर को सही पोषण मिलेगा तभी शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है. रोजाना योग करना बहुत फायदेमंद है. जो लोग नियमित योग और व्यायाम करते हैं, उनमें डायबिटीज होने का खतरा कम रहता है. जिन लोगों को पहले से डायबिटीज है, उनका शुगर भी इससे बेहतर तरीके से नियंत्रित हो सकता है. आज 10 से 12 साल के बच्चों में भी डायबिटीज के मामले देखने को मिल रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण खराब खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी है. इसलिए हर व्यक्ति को योग और व्यायाम अपनी दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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