अंबाला: नगर निगम की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स जमा न करने वाले लोगों को अक्सर नोटिस दिए जाते हैं और कार्रवाई की जाती है, लेकिन इस बार निगम की सख्ती का दायरा सरकारी विभागों तक भी पहुंच गया है. दरअसल अंबाला शहर नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार सरकारी विभागों और आम लोगों को मिलाकर करीब 100 करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है. खास बात यह है कि इस बकाया राशि में पब्लिक हेल्थ, सिंचाई विभाग, वन विभाग, बागवानी विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग और पुलिस विभाग समेत कई सरकारी कार्यालय भी शामिल हैं.
बता दें कि नगर निगम अब केवल आम लोगों को नोटिस देकर नहीं रुक रहा, बल्कि सरकारी विभागों से भी बकाया टैक्स की वसूली के लिए सख्ती कर रहा है. बीते दिनों कई विभागों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि कुछ संपत्तियों पर ताला लगाने की कार्रवाई भी की गई है. निगम का कहना है कि प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं करने वाले बकायादारों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी. ऐसे में सरकारी विभागों को भी समय पर टैक्स जमा कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं.
100 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया
वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला नगर निगम के डीएमसी दीपक सूरा ने बताया कि जिन लोगों और सरकारी विभागों का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है, उन सभी पर कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों और आम लोगों को मिलाकर करीब 100 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है. इसकी वसूली के लिए नगर निगम के 20 वार्डों में अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है. ये टीमें बकायादारों को नोटिस देने के साथ-साथ टैक्स जमा कराने के लिए भी काम कर रही हैं.
बकायादारों को करीब 600 सीलिंग नोटिस
उन्होंने कहा कि नगर निगम की ओर से अब तक बकायादारों को करीब 600 सीलिंग नोटिस दिए जा चुके हैं. वहीं रोजाना लगभग 30 नए नोटिस जारी किए जा रहे हैं. निगम के अनुसार, नोटिस मिलने के सात दिन के भीतर यदि प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं किया जाता, तो संबंधित संपत्ति को सील करने की कार्रवाई की जा सकती है. अधिकारियों का कहना है कि 31 अगस्त तक ब्याज में 75 प्रतिशत छूट का प्रावधान होने के बावजूद मार्च से अगस्त तक करीब 7 करोड़ रुपये का ही टैक्स जमा हो सका है.
संपत्तियों को किया जाएगा सील
डीएमसी दीपक सूरा ने कहा कि मार्च तक के वित्तीय वर्ष के हिसाब से कई लोगों और विभागों का टैक्स बकाया है. कुछ विभागों ने इस दौरान टैक्स जमा भी कराया है, लेकिन जिनका भुगतान अभी बाकी है, उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी. निगम की ओर से जरूरत पड़ने पर संपत्तियों को सील भी किया जाएगा. अब देखना यह होगा कि नगर निगम की सख्ती के बाद सरकारी विभाग और आम बकायादार कितनी तेजी से अपना प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराते हैं.
रिकॉर्ड दुरुस्त करना निगम के लिए बड़ी चुनौती
मिली जानकारी के अनुसार, प्रॉपर्टी टैक्स वसूली के बीच नगर निगम के रिकॉर्ड में भी कई तरह की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं. कहीं किसी संपत्ति का टैक्स अधिक दिखाई दे रहा है, तो कहीं कम. निगम के अनुसार, इसकी एक बड़ी वजह प्रॉपर्टी आईडी का सत्यापित न होना है. करीब 1.25 लाख प्रॉपर्टी आईडी में से लगभग 83 हजार आईडी नाम, मोबाइल नंबर और वर्गगज से जुड़ी गलतियों के कारण पेंडिंग पड़ी हैं. ऐसे में रिकॉर्ड दुरुस्त करना भी निगम के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. ऐसे में नगर निगम ने रिकवरी टीमों को वार्डवार डिफॉल्टरों की अपडेटेड सूची उपलब्ध कराई है.
सीलिंग टीम के साथ कंप्यूटर ऑपरेटर, प्रिंटर और ई-पेमेंट मशीनें भी मौजूद रहेंगी. इससे मौके पर ही प्रॉपर्टी टैक्स का असेसमेंट दुरुस्त करने और बकाया राशि जमा कराने की सुविधा दी जा सकेगी. निगम का कहना है कि इस व्यवस्था से लोगों को रिकॉर्ड संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
पुलिस विभाग पर 7 लाख रुपये का टैक्स बकाया
वहीं मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम के रिकॉर्ड में पब्लिक हेल्थ विभाग पर 1.87 करोड़ रुपये, सिंचाई विभाग पर 79.78 लाख रुपये और बिजली निगम पर 68.71 लाख रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है. वहीं वन विभाग पर 41.31 लाख, बागवानी विभाग पर 35 लाख और स्वास्थ्य विभाग पर 12.99 लाख रुपये बकाया बताए गए हैं. इसके अलावा हैफेड पर 12.39 लाख, पशुपालन विभाग पर 10.47 लाख और पुलिस विभाग पर 7 लाख रुपये का टैक्स बकाया है.












