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बारिश से कई किसानों की मिर्च की फसल खराब हुई, लेकिन सुनपेड़ गांव के किसान दयाल दास की मिर्च पूरे सीजन अच्छी रही. 63 साल के दयाल दास बताते हैं कि मिर्च की खेती में बीज और कंपनी का बड़ा फर्क पड़ता है. सही बीज, समय पर दवा का छिड़काव और खेत में हवा का इंतजाम फसल बचाने में मदद करता है.
फरीदाबाद: बारिश का मौसम है और फरीदाबाद में आज भी बारिश हो रही है. ऐसे में जिन किसानों ने खेतों में मिर्च लगा रखी है, उनमें से कई किसानों को बारिश की वजह से घाटा भी झेलना पड़ा है. लेकिन फरीदाबाद में कुछ ऐसे किसान भी हैं, जिन्हें मिर्च की खेती से अच्छा फायदा और मुनाफा हुआ है. इन किसानों के खेतों में पूरे सीजन मिर्च की अच्छी पैदावार हुई. हालांकि अब मिर्च का आखिरी सीजन चल रहा है और किसान खेतों से मिर्च की आखिरी तुड़ाई कर रहे हैं. किसान बताते हैं कि मिर्च की खेती में मुनाफा होना या घाटा लगना इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप किस तरह की खेती कर रहे हैं और किस तरह का बीज लगा रहे हैं.
Local18 से बातचीत में दयाल दास बताते हैं कि मैं बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव में रहता हूं. खेती मेरी बल्लभगढ़ के सुनपेड़ गांव में है. सवा एकड़ में मेरी खेती है. मैंने मिर्च और तोरी लगाया हुआ है. मिर्च की पैदावार मेरे पूरे सीजन में अच्छी हुई है. अब मिर्च का लास्ट सीजन चल रहा है. यह वैरायटी अब खत्म हो जाएगी. हमारी मिर्च तो बढ़िया हुई है. बीज का अंतर होता है और सबसे ज्यादा कंपनी का फर्क होता है. किसी कंपनी की बढ़िया होती है. मैंने जो लगा रखी है, यह बढ़िया कंपनी है, इसमें घाटा बहुत कम होता है. मिर्च का जो बीज है, वह इस बार अच्छा रहा. हमारा बीज अच्छा हुआ और फसल भी हरी रही. मैंने लेट बुवाई की थी. पहले इसका पौधा तैयार करते हैं और पौधा तैयार होने के बाद खेत में लगाते हैं. इस वैरायटी का पौधा मैंने 26 जनवरी के बाद लगाई थी.
पहले नहीं लगती थी इतनी खाद
दयाल दास बताते हैं कि मिर्च में यदि कई किसानों को नुकसान हुआ है तो उसका कारण बीज भी हो सकता है. बीज की वजह से नुकसान हुआ है. आजकल मिर्च में इतनी दवाइयां लगने लगी हैं, पूछो मत. पहले इतनी दवाई नहीं लगती थी. जब हम छोटे-छोटे थे, उस समय इतनी दवाई नहीं लगती थी. अब हर फसल में दवाई लगानी पड़ती है. मैं सुवाल कंपनी की दवाई लगाता हूं. किसान डुप्लीकेट दवाई डाल देते हैं, जिसकी वजह से फसल खराब हो जाती है. यह भी नुकसान का एक कारण है. बरसात में स्प्रे मैंने आज भी किया है और परसों भी किया था. स्प्रे टाइम से ना मारो तो फिर इसमें छोटे-छोटे कीड़े लग जाते हैं, जो कई बार दिखाई भी नहीं देते हैं.
एक एकड़ में 30 हजार की लागत
दयाल दास बताते हैं कि मिर्च के बीज का 550 रुपये का एक पैकेट आता है. उसका पौधा बोया था. एक एकड़ में जुताई से लेकर बीज वगैरह का खर्च लगाकर 25 से 30 हजार रुपये लागत आती है, बल्कि 25 से 30 हजार रुपये का तो मैं केवल दवाई में खर्च कर चुका हूं, यह अलग लागत है. मंडी में मिर्च करीब 30 रुपये किलो बिक रही है. किसान बताते हैं कि बरसात के मौसम में एक चीज का और ध्यान रखना पड़ता है. जैसे बारिश हो रही है और मिर्च पत्तों की वजह से ढकी हुई है और कई दिनों तक ढकी रहती है, तो उससे भी मिर्च खराब हो जाती है. इसलिए खेत में हवा लगना जरूरी है. मैं बचपन से खेती कर रहा हूं और अब मेरी उम्र 63 साल हो गई है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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