नौकरी छोड़ मंदिर के फूलों को बना रहीं ‘सोना’, फरीदाबाद की सुचेता घर बैठे कर रहीं ऐसा काम

On: August 1, 2026 4:18 PM
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Faridabad News : फरीदाबाद की सुचेता साहू ने मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों को नई पहचान दी है. पूजा के बाद फेंके जाने वाले गुलाब और गेंदे के फूलों से वह घर पर ऑर्गेनिक बायो एंजाइम, हैंडवॉश, शैंपू, एयर फ्रेशनर, क्रीम और उबटन जैसे प्रोडक्ट तैयार कर रही हैं. लोकल 18 से सुचेता बताती हैं कि मैं पहले स्कूल में लाइब्रेरियन थी, लेकिन साल 2015 में नौकरी छोड़ दी. अब घर से ही यह काम करती हूं. गुलाब की पंखुड़ियों का बायो एंजाइम का इस्तेमाल कपड़ों को सॉफ्ट करने, हल्के रैशेज में, शैंपू बनाने, हैंडवॉश तैयार करने और एयर फ्रेशनर बनाने में किया जाता है.

फरीदाबाद. हरियाणा के फरीदाबाद में एक महिला ने मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों को नई पहचान देने का काम शुरू किया है. आमतौर पर लोग पूजा के बाद फूलों को कूड़े में फेंक देते हैं या फिर नदियों और तालाबों में विसर्जित कर देते हैं. इससे गंदगी बढ़ती है और पर्यावरण पर भी असर पड़ता है. लेकिन फरीदाबाद की सुचेता साहू ने इन्हीं सूखे फूलों को बेकार मानने के बजाय उनसे ऑर्गेनिक प्रोडक्ट बनाना शुरू कर दिया. खास बात यह है कि वह खुद घर पर ये प्रोडक्ट तैयार करती हैं और दूसरे लोगों को भी इसकी ट्रेनिंग दे रही हैं. लोकल 18 से सुचेता साहू बताती हैं कि मैं पहले स्कूल में लाइब्रेरियन थी, लेकिन साल 2015 में नौकरी छोड़ दी. अब घर से ही यह काम करती हूं. पूजा के बाद फेंके जाने वाले फूलों को इकट्ठा करके उनसे कई तरह के प्रोडक्ट तैयार करती हूं. लोग अगर फूलों को फेंकने के बजाय उनका सही इस्तेमाल करें तो पर्यावरण को काफी फायदा हो सकता है.

मंदिर के फूल इस काम के लिए बेस्ट

सुचेता साहू बताती हैं कि अभी गुलाब और गेंदे के फूलों से करीब 6 से 7 तरह के प्रोडक्ट बना रही हूं. गुलाब की पंखुड़ियों से तैयार होने वाला बायो एंजाइम कई कामों में इस्तेमाल होता है. इसका उपयोग कपड़ों को सॉफ्ट करने, हल्के रैशेज में, शैंपू बनाने, हैंडवॉश तैयार करने और एयर फ्रेशनर बनाने में किया जाता है. सभी प्रोडक्ट पूरी तरह ऑर्गेनिक हैं और इनमें किसी तरह की मिलावट नहीं होती. आगे भी नए प्रोडक्ट बनाने को लेकर रिसर्च जारी है. सुचेता साहू के मुताबिक, घर में ही 5 लीटर के डिब्बे में गुलाब के फूल डालकर बायो एंजाइम तैयार करती हूं. मंदिरों से आने वाले फूल अक्सर मिक्स होते हैं, इसलिए उन्हें अलग करने की जरूरत नहीं पड़ती. 5 लीटर के डिब्बे से करीब 3 लीटर बायो एंजाइम तैयार हो जाता है. इसके बाद जो बचा हुआ गूदा निकलता है, उसका इस्तेमाल क्रीम और उबटन जैसे प्रोडक्ट बनाने में भी किया जाता है. कम जगह होने के बावजूद वह घर से ही पूरा काम संभाल रही हैं.

एक लीटर कितने का

सुचेता साहू बताती हैं कि अगर कोई 1 लीटर बायो एंजाइम भी घर पर बना ले तो यह पर्यावरण के लिए अच्छा कदम होगा. इससे पूजा के फूल कूड़े में नहीं जाएंगे और उनका सही इस्तेमाल भी हो जाएगा. मैं लोगों को इस काम की ट्रेनिंग भी देती हूं ताकि ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें. सुचेता कहती हैं कि बाजार में गुलाब का ऑर्गेनिक बायो एंजाइम काफी महंगा मिलता है. इसकी कीमत 200 से 250 रुपये प्रति लीटर तक होती है. मेरे पास तैयार किए गए प्रोडक्ट में दूसरी प्राकृतिक चीजें भी मिलाई जाती हैं, इसलिए लागत उसी हिसाब से आती है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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