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Faridabad ki local news : फरीदाबाद में धान की फसल के लिए बारिश आफत बन गई है. डीग गांव में किसान कुंवरपाल के खेत में बारिश से करीब आधी फसल खराब हो गई. गेहूं के बाद अब धान में भी मौसम की मार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. किसानों का कहना है कि धान इस समय पकने के आखिरी दौर में है. लोकल 18 से किसान रामबाबू बताते हैं कि यह नुकसान बारिश की वजह से हुआ है. फसल का काफी हिस्सा सड़ चुका है. इससे पहले गेहूं की फसल में भी मौसम की मार झेलनी पड़ी थी. गेहूं की फसल पकने के समय ओले गिरने से लाखों का नुकसान हुआ था.
फरीदाबाद. हरियाणा फरीदाबाद में किसानों के लिए बारिश आफत बन गई है. यहां जिस तरीके से लगातार बारिश हो रही है, उसकी वजह से खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान हो रहा है. किसानों का कहना है कि धान इस समय पकने के आखिरी दौर में है. किसान पहले ही गेहूं की फसल में बड़ा नुकसान झेल चुके हैं. उस समय गेहूं की फसल पकने के समय बारिश के साथ ओले गिरने लगे थे, जिसकी वजह से खेतों में खड़ी फसल तबाह हो गई थी. जैसे गेहूं के साथ हुआ था, खेत में धान की फसल लेट गई है. डीग गांव के किसान कुंवरपाल के खेत में बारिश से धान की फसल को काफी नुकसान हुआ है. लोकल 18 से वे बताते हैं कि एक एकड़ में लगी धान की फसल खराब हो गई है. करीब 50 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है. गेहूं की फसल में पहले लाखों का नुकसान हुआ था और अब धान की फसल में नुकसान होने से परेशानी बढ़ गई है. कुंवरपाल ने यह खेत पट्टे पर ले रखे हैं.
एक एकड़ में कितना खर्च
किसान रामबाबू बताते हैं कि यह नुकसान बारिश की वजह से हुआ है. 15 दिन पहले भी तेज बारिश हुई थी. उस बारिश के बाद खेत में पानी जमा हो गया और धान की फसल को नुकसान पहुंचने लगा. अब लगातार बारिश होने से फसल और खराब हो गई है. फसल का काफी हिस्सा सड़ चुका है. बारिश की वजह से धान की फसल को संभालना मुश्किल हो रहा है. करीब 50 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है और एक एकड़ की फसल पूरी तरह खराब हो गई है. इस फसल को तैयार करने में काफी पैसा और मेहनत लगाई थी. एक एकड़ में धान में करीब 33 हजार रुपये तक का खर्च आ जाता है.
लगाई थी 1509 वैरायटी
रामबाबू कहते हैं कि इस बार खेत में धान की 1509 वैरायटी लगाई गई थी. इससे पहले गेहूं की फसल में भी मौसम की मार झेलनी पड़ी थी. गेहूं की फसल पकने के समय बारिश और ओले गिरने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ था. एक तरफ खेती में लगातार खर्च बढ़ रहा है और दूसरी तरफ मौसम की मार से तैयार फसल खराब हो जा रही है. इससे खेती करना मुश्किल होता जा रहा है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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