फरीदाबाद: फरीदाबाद के गांव सोतई में इन दिनों खेतों की मिट्टी पर किसानों का दर्द साफ दिखाई दे रहा है. जिस जमीन से वर्षों से परिवारों की रोजी रोटी चलती आ रही है, वही जमीन अब ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे की राह में आ रही है. किसान विकास कार्य के विरोध में नहीं हैं, लेकिन उनका कहना है कि जमीन लेने से पहले उन्हें उनकी जमीन का उचित और वर्तमान बाजार दर के हिसाब से मुआवजा दिया जाए. इसी मांग को लेकर महिला, पुरुष और बुजुर्ग पिछले करीब 10 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. किसानों ने रक्षाबंधन का त्योहार भी धरना स्थल पर ही मनाया और अब भी उनका आंदोलन लगातार जारी है.
जमीन ले रहे हैं तो हमारा पैसा भी दो
Local18 से बातचीत में सोतई गांव की निवासी कमलेश बताती है हम लोग मजबूर हैं, क्योंकि हमारी जमीन ली जा रही है और हमें उसके पैसे नहीं दिए जा रहे हैं. हम खाएंगे क्या, हमारे परिवार का गुजारा कैसे चलेगा. खेती में हमारा यही रोजगार है और इसी जमीन से हमारा परिवार चलता है. हमारी सरकार से कोई लड़ाई नहीं है. सरकार अपना काम करना चाहती है तो खूब काम शुरू करे, हमें कोई परेशानी नहीं है. लेकिन पहले हमारी जमीन के पैसे तो दिए जाएं. बिना पैसे के जमीन चली गई तो हमारे सामने परिवार चलाने का कोई रास्ता नहीं बचेगा.
70 साल की उम्र में अपने हक के लिए धरने पर अम्मा
हीरा बताती है मैं फरीदाबाद के सोतई गांव की निवासी हूं. हमारे यहां धान, गेहूं, बाजरा और ज्वार की खेती होती है. इन्हीं फसलों से हमारे परिवार का घर चलता है. मेरी उम्र 70 साल हो गई है और इतने वर्षों से हम लोग इसी जमीन पर खेती करते हुए आ रहे हैं. सरकार अपना काम करना चाहती है तो बेशक करे, हमें विकास से कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन हम यहां किसी काम को रोकने के लिए नहीं बैठे हैं. हम अपने पैसे और अपने हक के लिए धरने पर बैठे हैं.
मुआवजा नहीं मिला तो पुस्तैनी जमीन नहीं छोड़ेंगे
मीना कुमारी बताती है मेरा सोतई गांव मेरा ससुराल है और जिस रास्ते से जेवर एयरपोर्ट के लिए एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है, उसमें हमारी जमीन भी ली जा रही है. पूरे गांव में कुछ किसानों के पैसे आ गए हैं, जबकि कुछ किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है. जब तक हमारी जमीन का मुआवजा हमें नहीं मिलेगा, तब तक हम अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे. हम किसान हैं और यह हमारी पुस्तैनी जमीन है. इसी जमीन पर हमारे परिवार की कई पीढ़ियां निर्भर रही हैं.
200 साल से खेती कर रहे परिवार के सामने जमीन का सवाल
अनीता बताती है हमारे पूर्वज करीब 200 साल से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं. इतने वर्षों से हम खेतों में जुताई करते आए हैं और फसल लगाते आए हैं. इसी जमीन से हमारे परिवारों का जीवन चलता रहा है. अब इतने सालों से जिस जमीन से हमारा रिश्ता है, उसे हम आसानी से कैसे दे दें. अगर सरकार विकास के लिए जमीन लेना चाहती है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन हमारी जमीन का उचित मुआवजा मिलना चाहिए.
करीब 10 एकड़ जमीन आने का दावा
प्रेम चंद्र बताते हैं हमारी जमीन भी इस परियोजना में आ रही है. हमारी सामलात जमीन समेत करीब 10 एकड़ जमीन इस निर्माण की जद में आ रही है. सरकार हमारी जमीनों के पैसे दे दे, हम धरना बंद कर देंगे. हमारी मांग कोई बहुत बड़ी नहीं है. जब हमारे पैसे ही नहीं दिए जाएंगे तो हम जमीन पर कब्जा कैसे दे देंगे. जब तक जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक हम कब्जा नहीं देंगे.
रक्षाबंधन भी किसानों ने धरना स्थल पर मनाया
सोतई गांव में किसानों का यह धरना अब उनके लिए सिर्फ एक आंदोलन नहीं बल्कि परिवार की रोजी रोटी और भविष्य की लड़ाई बन गया है. पिछले करीब 10 दिनों से किसान धरना स्थल पर बैठे हैं. महिलाओं और पुरुषों के साथ बुजुर्ग भी अपनी मांग को लेकर डटे हुए हैं. किसानों ने रक्षाबंधन का त्योहार भी धरना स्थल पर ही मनाया. किसानों का कहना है कि वह प्रशासन की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं और जब तक उनकी जमीन का उचित एवं वर्तमान बाजार दर के अनुसार मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
सेक्टर-65 से शुरू होकर सोतई से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
स्मार्ट सिटी फरीदाबाद को नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए एनएचएआई की ओर से ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है. यह एक्सप्रेसवे सेक्टर-65 से शुरू होकर गांव सोतई के रास्ते से गुजरेगा. इसी परियोजना के निर्माण के बीच किसानों की जमीन भी आ रही है. किसान साफ कह रहे हैं कि उन्हें विकास कार्य से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन जमीन का उचित मुआवजा मिलने के बाद ही वह अपनी जमीन का कब्जा देने को तैयार होंगे.











