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Ambala ki local news : 1200 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकले इन किसानों की आस्था इतनी मजबूत है कि उम्र भी उनके कदम नहीं रोक पा रही है. रोजाना 40 से 50 किलोमीटर नाप देते हैं. दो किसान ने नंगे पांव चलने का प्रण लिया है. किसान लक्ष्मण दास लोकल 18 से बताते हैं कि वे यूपी के ललितपुर से 12 दिन पहले माता वैष्णो देवी के लिए निकले हैं. दिनभर चलने के बाद रात को रास्ते में आने वाले मंदिर, धार्मिक स्थल या दूसरे सुरक्षित स्थान पर रुक जाते हैं. सुबह होते ही फिर यात्रा शुरू कर देते हैं. इनके मन में सिर्फ एक भावना है कि माता रानी के चरणों में पहुंचकर देश के लिए प्रार्थना. वह चाहते हैं कि देश के लोगों को परेशानियों से मुक्ति मिले और हर परिवार खुशहाल रहे.
अंबाला. मां के दरबार में पहुंचकर हर भक्त अपनी कोई न कोई मनोकामना मांगता है. कोई परिवार की खुशहाली चाहता है, कोई बीमारी से मुक्ति तो कोई अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से निकले पांच किसानों की मन्नत इन सबसे अलग है. इन किसानों ने अपने लिए कुछ मांगने के बजाय पूरे देश की खुशहाली ओर लोगों के स्वस्थ जीवन, आपसी भाईचारे और भारत की तरक्की की कामना लेकर माता वैष्णो देवी के दरबार का रुख किया है. लगभग 1200 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकले इन किसानों की आस्था इतनी मजबूत है कि उम्र भी उनके कदम नहीं रोक पा रही है. पांचों किसान रोजाना 40 से 50 किलोमीटर पैदल सफर तय कर रहे हैं. इनमें दो किसान ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी आस्था और संकल्प के चलते नंगे पांव चलने का प्रण लिया है. पैरों के नीचे रास्ते की गर्मी, पथरीली जमीन और लंबा सफर है, लेकिन दिल में माता रानी का नाम और जुबान पर जयकारा है.
लगातार बढ़ रही बीमारियां
किसान लक्ष्मण दास ने लोकल 18 को बताया है कि वह उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से करीब 12 दिन पहले माता वैष्णो देवी के दरबार के लिए निकले हैं. यह यात्रा लगभग 1200 किलोमीटर की है और वह प्रतिदिन 40 से 50 किलोमीटर तक पैदल चल रहे हैं. दिनभर चलने के बाद रात को रास्ते में आने वाले मंदिर, धार्मिक स्थल या दूसरे सुरक्षित स्थान पर रुक जाते हैं. सुबह होते ही फिर माता का झंडा उठाकर यात्रा शुरू कर देते हैं. लक्ष्मण दास बताते हैं कि वह खेती करके अपना जीवन यापन करते हैं. घर से निकलते समय उनके मन में अपने लिए कोई बड़ी इच्छा नहीं थी. उनके मन में सिर्फ एक भावना थी कि माता रानी के चरणों में पहुंचकर देश और समाज के लिए प्रार्थना करनी है. देश में लगातार बीमारियां बढ़ रही हैं और सड़क दुर्घटनाओं जैसी घटनाएं भी लोगों के परिवारों को उजाड़ देती हैं. इसलिए वह चाहते हैं कि देश के लोगों को इन परेशानियों से मुक्ति मिले और हर परिवार खुशहाल रहे.
कोई खाना खिला रहा, कोई पैसे दे रहा
किसान छोटू राम ने बताते हैं कि हम पांच लोग अपने घर से माता का झंडा और जरूरी सामान लेकर निकले हैं. जब तक वह यात्रा पर हैं, उनके परिवार के दूसरे सदस्य खेतों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. रास्ते में मिलने वाले लोग भी इन किसानों की आस्था देखकर उनकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं. कोई उन्हें भोजन करवा देता है, कोई पानी पिलाता है तो कोई रात में रुकने की व्यवस्था कर देता है. कई लोग आर्थिक सहायता भी करते हैं. किसानों का कहना है कि वह सीमित साधनों के साथ यात्रा कर रहे हैं और जहां जैसी सुविधा मिलती है, उसी में माता का नाम लेकर आगे बढ़ जाते हैं.
बच्चे आगे बढ़ें
इन किसानों की सबसे बड़ी इच्छा है कि भारत में आपसी भाईचारा बना रहे और वर्ष 2047 तक देश विकसित भारत बने. वह चाहते हैं कि देश के बच्चे आगे बढ़ें, युवा मेहनत करें और भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन हो. यात्रा के दौरान ये किसान युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश भी दे रहे हैं. उनका कहना है कि युवा देश की ताकत हैं. अगर युवा नशे से बचकर शिक्षा, मेहनत और संस्कारों की राह चुनेंगे तो देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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