‘यही असली सुकून’, हेमकुंड से हजूर साहिब तक…4000 किलोमीटर की यात्रा पर साइकिल लेकर निकले पलविंदर

On: July 19, 2026 9:09 PM
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Ambala News : पंजाब के पलविंदर सिंह ने इस यात्रा के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी है. इसके बाद पिता की खरीदी साइकिल को अपना साथी बनाकर श्री हेमकुंड साहिब से लेकर श्री हजूर साहिब तक की लंबी यात्रा पर निकल पड़े हैं. लोकल 18 से पलविंदर कहते हैं कि आज की युवा पीढ़ी मोबाइल और वाहनों की सुविधा में इतनी उलझ गई है कि शरीर को चलाना ही भूलती जा रही है. पलविंदर की आंखों में सबसे ज्यादा दर्द युवाओं में बढ़ते नशे को लेकर दिखाई दिया. पलविंदर चाहते हैं कि आज युवा नशे से दूर होकर फिटनेस की तरफ लौटें. हर दिन वे 7 से 8 घंटे साइकिल चलाते हैं और करीब 100 किलोमीटर का सफर तय करते हैं. पलविंदर कहते हैं कि जब मैं गांवों से गुजरता हूं तो बच्चे हाथ हिलाते हैं, बुजुर्ग आशीर्वाद देते हैं. इस दौरान कोई पानी पिला देता है, कोई पूछता है बेटा कहां तक जा रहे हो, यही असली सुकून है.

अंबाला. आज जब युवा महंगी बाइक और कार को अपनी पहचान मानने लगे हैं, तब पंजाब के होशियारपुर का एक 27 वर्षीय युवक सिर्फ 5500 रुपये की साइकिल लेकर हजारों किलोमीटर की यात्रा पर निकल पड़ा है. यह कहानी सिर्फ एक धार्मिक यात्रा की नहीं, बल्कि उस जज्बे की है, जो उसे आज के युवाओं को नशे और अनफिट की तरफ बढ़ते देखकर भीतर से परेशान करती है. पंजाब के होशियारपुर निवासी पलविंदर सिंह ने एक बड़ी मोबाइल कंपनी की नौकरी इस यात्रा के लिए छोड़ डाली है. इसके बाद पिता की खरीदी साइकिल को अपना साथी बनाकर श्री हेमकुंड साहिब (उत्तराखंड) से लेकर श्री हजूर साहिब (महाराष्ट्र) तक की लगभग 4000 किलोमीटर लंबी यात्रा पर निकल पड़े हैं.

बीमारियां कम होती थीं

लोकल 18 से पलविंदर बताते हैं कि आज की युवा पीढ़ी मोबाइल और वाहनों की सुविधा में इतनी उलझ गई है कि शरीर को चलाना ही भूलती जा रही है. पहले लोग रोज साइकिल चलाते थे, खेतों में काम करते थे, इसलिए बीमारियां कम होती थीं, लेकिन अब छोटी दूरी के लिए भी बाइक निकाल ली जाती है, जिससे पेट्रोल तो खर्च होता ही है लेकिन शरीर में फिटनेस की भी कमी आती है. पलविंदर की आंखों में सबसे ज्यादा दर्द युवाओं में बढ़ते नशे को लेकर दिखाई दिया. पलविंदर चाहते हैं कि आज युवा नशे से दूर होकर फिटनेस की तरफ लौटें. अगर शरीर स्वस्थ होगा तो सोच भी सकारात्मक होगी. वे बताते हैं कि उनकी यह यात्रा आसान नहीं है. हर दिन वे 7 से 8 घंटे साइकिल चलाते हैं और करीब 100 किलोमीटर का सफर तय करते हैं. रात होने पर रास्ते में पड़ने वाले गुरुद्वारा साहिब में रुक जाते हैं. वहीं लंगर खाते हैं. थोड़ी देर आराम करते हैं और फिर अगली सुबह अपनी यात्रा शुरू कर देते हैं.

गुरु की रसोई

पलविंदर कहते हैं कि कार में बैठकर यात्रा करने से कभी वह अनुभव नहीं मिलता है जो साइकिल पर मिलता है. जब मैं गांवों से गुजरता हूं तो बच्चे हाथ हिलाते हैं, बुजुर्ग आशीर्वाद देते हैं. इस दौरान कोई पानी पिला देता है, कोई पूछता है बेटा कहां तक जा रहे हो, यही असली सुकून है. पलविंदर ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह सफर सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि फिटनेस के प्रति लोगों को जागरूक करना भी है. उनकी यात्रा गांव की ‘गुरु की रसोई’ को समर्पित है, जहां से रोजाना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक भोजन पहुंचाया जाता है.

सबसे बड़ी सफलता

पलविंदर कहते हैं कि अगर मेरी साइकिल लोगों को फिटनेस और सेवा दोनों का संदेश दे सके, तो यही सबसे बड़ी सफलता होगी. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत पर भी चिंता जताने का समय है, क्योंकि साइकिल न केवल पर्यावरण को बचाती है, बल्कि इंसान को अपने शरीर और प्रकृति से दोबारा जोड़ती है. करीब डेढ़ से दो महीने तक चलने वाली यह यात्रा बहुत कुछ नया सिखाएगा और वह चाहते हैं जब वापस अपने गांव लौटे तो कई युवा इस साइकिल के साथ जुड़ जाए.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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