पांडवों ने कौरवों से जिन 5 गांवों की रखी थी मांग, उनमें फरीदाबाद की ये जगह भी शामिल, महाभारत की रोचक कहानी

On: September 12, 2026 5:06 PM
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पांडवों ने जिन 5 गांवों की रखी थी मांग, उनमें फरीदाबाद की ये जगह भी शामिल

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तिलपत गांव की मिट्टी में आज भी महाभारत से जुड़ी कई मान्यताएं सुनने को मिलती हैं. कहा जाता है कि पांडवों ने कौरवों से जिन पांच गांवों की मांग की थी, उनमें तिलपत का नाम भी था. यहां बाबा सूरदास मंदिर, 30 किमी की परिक्रमा और करीब 100 साल पुरानी होली की परंपरा आज भी लोगों की आस्था से जुड़ी है. आखिर तिलपत का महाभारत से क्या है कनेक्शन, जानिए पूरी कहानी.

फरीदाबाद का तिलपत गांव सिर्फ एक आम गांव नहीं है, यहां की मिट्टी में महाभारत काल से जुड़ी कई मान्यताएं आज भी लोगों की जुबान पर सुनने को मिलती हैं. गांव में बने पुराने बाबा सूरदास मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर में पूजा करने के साथ गांव से जुड़ी पुरानी कहानियां भी सुनते हैं. यही वजह है कि तिलपत आज भी धार्मिक आस्था और पुराने इतिहास के लिए खास माना जाता है.

Local18 से बातचीत में सूरदास मंदिर के महंत बताते हैं कि मैं खुद को बाबा का दास मानता हूं और लंबे समय से मंदिर की सेवा में लगे हुआ हूं. मंदिर की सेवा करते हुए करीब 18 साल हो चुके हैं. इस जगह को लेकर कई पुरानी मान्यताएं गांव में चली आ रही हैं. बुजुर्गों से सुनते आए हैं कि पांडव इस जगह पर आए थे और यहां हवन भी किया था. इसी वजह से मंदिर और गांव के इतिहास को लेकर लोगों की आस्था बनी हुई है.

गांव के लोगों के बीच एक मान्यता काफी पुरानी है कि महाभारत के समय पांडवों ने कौरवों से पांच गांव मांगे थे. इन गांवों में तिलपत का नाम भी बताया जाता है. कहा जाता है कि पांडव युद्ध नहीं चाहते थे और समझौते के लिए कम से कम जमीन मांग रहे थे, लेकिन कौरवों ने उनकी बात नहीं मानी. इसी कहानी की वजह से तिलपत का नाम महाभारत से जोड़कर देखा जाता है. गांव के लोग आज भी इस बात को अपनी पुरानी विरासत का हिस्सा मानते हैं.

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पुरानी मान्यताओं के मुताबिक, जब पांडवों को खांडव प्रस्थ का क्षेत्र मिला तो उन्होंने वहां अपनी राजधानी बसाई थी. बाद में इसी राजधानी को इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना गया. दिल्ली में मौजूद पुराना किला भी इसी प्राचीन इंद्रप्रस्थ से जोड़कर देखा जाता है. लोगों का कहना है कि उस समय तिलपत भी इसी क्षेत्र का हिस्सा था. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि आसपास के कई गांवों का संबंध उस दौर की कहानी से जोड़ा जाता है. इसी कारण तिलपत को बहुत पुराना गांव माना जाता है.

स्थानीय मान्यताओं में तिलपत के साथ सोनीपत, पानीपत, बागपत और मारीपत का भी जिक्र मिलता है. कहा जाता है कि ये पांचों गांव पांडवों की उस मांग से जुड़े हुए थे. हालांकि इन बातों का आधार मुख्य रूप से स्थानीय परंपराएं और लोगों से सुनी गई कहानियां हैं. गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ कोई पुरानी कहानी नहीं, बल्कि उनकी पहचान से जुड़ी बात है. तिलपत को इनमें सबसे पुराना गांव बताया जाता है. यही वजह है कि यहां रहने वाले लोग अपने गांव के इतिहास को लेकर काफी गर्व महसूस करते हैं.

तिलपत में करीब 100 साल पुरानी परंपरा के साथ होली मनाए जाने की बात कही जाती है. यहां होली का रंग बाकी जगहों से थोड़ा अलग नजर आता है. ब्रज की तरह यहां ढोल और भजनों के साथ लोग रंग खेलते हैं. बाबा सूरदास मंदिर से जुड़ी धार्मिक गतिविधियों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं. गांव में निकलने वाली परिक्रमा भी इस आयोजन का खास हिस्सा बताई जाती है. इस दौरान आसपास के गांवों से श्रद्धालु पहुंचते हैं और पूरा माहौल भक्ति और रंगों से भर जाता है.

बाबा सूरदास मंदिर से निकलने वाली परिक्रमा करीब 30 किलोमीटर की बताई जाती है. यह परिक्रमा आसपास के करीब 17 से 18 गांवों से होकर गुजरती है. ढोल की आवाज, भजन और जयकारों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं. रास्ते में लोगों का उत्साह देखते ही बनता है. परिक्रमा के दौरान पूरा माहौल धार्मिक नजर आता है. अग्नि प्रज्ज्वलन और रंगों के आयोजन के साथ गांव में अलग ही उत्साह दिखाई देता है. यही परंपरा तिलपत को आसपास के इलाकों में भी खास पहचान देती है.

तिलपत में जन्माष्टमी का त्योहार भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. मंदिर में भगवान कृष्ण से जुड़ी पूजा और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं. गांव में एक पुराने तालाब को लेकर भी लोगों के बीच मान्यता सुनने को मिलती है. महंत बताते हैं कि इस तालाब में स्नान करने से चर्म रोग दूर होने की मान्यता है. हालांकि इस दावे की Local18 स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है. तिलपत की खासियत यही है कि यहां इतिहास, धार्मिक आस्था और पुरानी परंपराएं आज भी गांव के जीवन का हिस्सा बनी हुई हैं.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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