BHEL लॉकर से कहां गायब हुई 31 किलो चांदी, 2022 के बाद गजब का खेल, इन अफसरों पर CBI को शक..

On: September 20, 2026 3:45 AM
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BHEL Silver Missing Case : BHEL से जुड़े इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिकॉर्ड में मौजूद 35.6 किलो चांदी आखिर कहां गई. CBI की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वर्ष 2022 में चांदी का पूरा स्टॉक मौजूद बताया गया था. करीब दो साल बाद फरवरी 2024 में जब भौतिक सत्यापन किया गया तो सिर्फ 6.23 किलो चांदी मिली. आखिर ये चांदी गई तो गई कहां, आइये जानते हैं इस रिपोर्ट में…

BHEL लॉकर से कहां गायब हुई 31KG चांदी, 2022 के बाद गजब का खेल, इन पर CBI को शकZoom

BHEL से चांदी गायब मामले में CBI ने 8 जुलाई 2026 को FIR दर्ज की.

गुरुग्राम : भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड BHEL के गुरुग्राम स्थित सोलर सेल प्लांट से करीब 31 किलो चांदी गायब होने का मामला सामने आया है. इसने सरकारी कंपनी की आंतरिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. केंद्रीय जांच ब्यूरो यानि CBI ने इस मामले में 2 BHEL अधिकारियों को नामजद करते हुए FIR दर्ज की है. जांच में तीन अन्य अधिकारियों की भूमिका भी देखी जा रही है. मामला BHEL के अमोर्फस सिलिकॉन सोलर सेल प्लांट से जुड़ा है. यहां सोलर सेल तैयार करने की प्रक्रिया में चांदी का इस्तेमाल होता है. CBI के मुताबिक, प्लांट में रखी चांदी के स्टॉक में बड़ी कमी सामने आने के बाद यह मामला जांच के दायरे में आया. आखिर पूरा मामला क्‍या है, आइये जानते हैं…

लॉकर में 35 किलो से ज्यादा चांदी थी
इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट कहती है कि CBI की जांच के अनुसार BHEL के रिकॉर्ड में साल 2016 से 2020 तक करीब 35.6 किलो चांदी का स्टॉक दर्ज था. यह चांदी सिल्वर टारगेट और रिसाइकिल होने वाले सिल्वर के रूप में प्लांट में रखी गई थी. लेकिन 6 फरवरी 2024 को हुई फ‍िजिकल जांच में लॉकर के अंदर केवल 6.23 किलो चांदी मिली. इसमें करीब 3.98 किलो सिल्वर टारगेट और 2.25 किलो स्क्रैप शामिल था. यानी रिकॉर्ड में दर्ज करीब 35.6 किलो चांदी के मुकाबले 31.65 किलो चांदी का हिसाब नहीं मिला. CBI के अनुसार गायब चांदी की मौजूदा कीमत करीब 71 लाख रुपये है.

कई साल तक रिकॉर्ड में दर्ज रही चांदी
जांच में यह भी सामने आया कि चांदी की सालाना जांच साल 2018 तक तो रेगुलर रूप से होती रही थी. CBI का कहना है कि 2019 में प्लांट के प्रमुख के तौर पर डॉ. भारत कुमार पंत के कार्यभार संभालने के बाद रेगुलर फिजिकल वेरिफ‍िकेशन बंद हो गई. इसके बाद चांदी का स्टॉक रिकॉर्ड में दर्ज तो रहा, लेकिन असल में नियमित जांच नहीं हुई. CBI का आरोप है कि इसी दौरान चांदी धीरे धीरे गायब होती रही और लंबे समय तक इसका पता नहीं चला.

जरूरी रिकॉर्ड भी मिले गायब
CBI की शुरुआती जांच कहती है कि केवल चांदी के स्टॉक में कमी ही सामने नहीं आई, बल्कि कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों को लेकर भी सवाल हैं. जांच एजेंसी के अनुसार कुछ सालों से संबंधित इन्वेंट्री वेरिफिकेशन रिपोर्ट और स्टॉक रजिस्टर उपलब्ध नहीं मिले. चांदी की खपत, एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और उसकी सुरक्षा को दर्ज करने की कोई उचित व्यवस्था भी नहीं मिली. CBI ने अपनी जांच में कहा है कि चांदी की निगरानी और वेरिफ‍िकेशन से जुड़ी इंटरनल व्यवस्था कमजोर हुई, जिससे बिना अनुमति चांदी हटाए जाने की संभावना बनी.

मामले में एक अहम बात साल 2022 की फ‍िजिकल जांच से जुड़ी है. CBI की जांच के मुताबिक 31 मार्च 2022 को हुई जांच में करीब 35.6 किलो चांदी मौजूद बताई गई थी. इसके बाद यह चांदी प्लांट के मटेरियल मैनेजमेंट सेक्शन की निगरानी में रखी गई थी. जांच एजेंसी के अनुसार इस सत्यापन प्रक्रिया में तत्कालीन अधिकारियों ने हिस्सा लिया था. लेकिन फरवरी 2024 की जांच में जब लॉकर खोला गया तो सिर्फ 6.23 किलो चांदी मिली. करीब 31.65 किलो चांदी का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिला.

5 अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में
CBI ने मामले में प्लांट के तत्कालीन मैनेजर कम मटेरियल मैनेजमेंट सेक्शन के प्रभारी आशीष कुमार और प्लांट के एडिशनल जनरल मैनेजर तथा प्रमुख डॉ भारत कुमार पंत को FIR में नामजद किया है. इसके अलावा तीन अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. इनमें उस समय प्लांट में वित्त और मानव संसाधन के मैनेजर रहे अजय यादव, मैनेजर विनयन भारद्वाज और इंजीनियर अजय कुमार शामिल हैं. जांच एजेंसी का कहना है कि इन अधिकारियों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों में कई जगह विरोधाभास मिला है. खासतौर पर चांदी की भौतिक जांच, लॉकर की चाबी किसके पास थी और संबंधित रिकॉर्ड की उपलब्धता को लेकर अलग अलग बातें सामने आईं. CBI की FIR में आपराधिक साजिश, सबूत गायब करने, सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत प्रावधान लगाए गए हैं. हालांकि यह मामला अभी जांच के स्तर पर है. FIR में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा.

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Sandeep KumarSenior Assistant Editor

Sandeep Kumar is a senior journalist and digital newsroom leader with more than 20 years of experience in print and digital journalism. He currently serves as Senior Assistant Editor at News18 Hindi, where he l…

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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