20 से 30 साल की उम्र में क्यों गंजे हो रहे युवा, कौन सी तकनीक से करवाना चाहिए हेयर ट्रांसप्लांट? एक्सपर्ट से जानें

On: July 28, 2026 2:23 AM
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फरीदाबाद. आजकल 20 से 30 साल की उम्र में ही बाल झड़ने की समस्या तेजी से बढ़ रही है. पहले जहां लोग बढ़ती उम्र में गंजेपन की शिकायत करते थे.  अब कॉलेज और नौकरी शुरू करने वाले युवा भी इस परेशानी से जूझ रहे हैं. इसका असर सिर्फ चेहरे की खूबसूरती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आत्मविश्वास पर भी पड़ता है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग हेयर ट्रांसप्लांट की ओर रुख कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर दिखने वाले शानदार रिजल्ट और सस्ते पैकेज लोगों को जल्दी आकर्षित कर लेते हैं. लेकिन हर व्यक्ति के लिए हेयर ट्रांसप्लांट सही नहीं होता. इसे सिर्फ ब्यूटी ट्रीटमेंट समझने की गलती भी नहीं करनी चाहिए.

Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल के डॉ. सचिन गुप्ता बताते हैं आजकल कम उम्र में हेयर ट्रांसप्लांट का क्रेज बढ़ने के पीछे दो बड़ी वजह हैं. पहली यह कि पहले के मुकाबले अब हेयर लॉस की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है. दूसरी वजह सोशल मीडिया है. लोग इंटरनेट और सोशल मीडिया पर हेयर ट्रांसप्लांट के अच्छे नतीजे देखते हैं, जिससे उन्हें पता चलता है कि गंजेपन का इलाज संभव है और वे भी इसे एक विकल्प के रूप में देखने लगते हैं.

डॉ. सचिन गुप्ता बताते हैं हर तरह के हेयर फॉल में हेयर ट्रांसप्लांट नहीं किया जाता. कई लोगों के बाल पोषण की कमी, थायराइड की बीमारी, तनाव या दूसरी मेडिकल वजहों से झड़ते हैं. ऐसे मामलों में पहले उस कारण का इलाज करना जरूरी होता है. हेयर ट्रांसप्लांट मुख्य रूप से मेल पैटर्न हेयर लॉस यानी आनुवंशिक गंजेपन में बेहतर तरीके से काम करता है. इसलिए बिना जांच के सिर्फ बाल झड़ने पर ट्रांसप्लांट कराने का फैसला नहीं लेना चाहिए.

डॉ. सचिन गुप्ता बताते हैं लोग आजकल हेयर ट्रांसप्लांट को बहुत हल्के में लेने लगे हैं, जबकि यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है. भले ही यह बहुत बड़ी सर्जरी नहीं होती,  लेकिन इसे पूरी सावधानी और सही व्यवस्था के साथ किया जाना चाहिए. अगर क्लिनिक में साफ-सफाई ठीक नहीं है, डॉक्टर और स्टाफ प्रशिक्षित नहीं हैं या प्रक्रिया सही तरीके से नहीं की जाती है तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. कई बार नतीजे भी खराब आते हैं और बाल इतने अननेचुरल दिखते हैं कि साफ पता चल जाता है कि ट्रांसप्लांट कराया गया है.

डॉ. सचिन गुप्ता बताते हैं आजकल लोग एफयूई,  एफयूटी और डीएचआई जैसी तकनीकों के नाम तो सुनते हैं, लेकिन इनके बीच का अंतर नहीं जानते. एफयूटी पुरानी तकनीक है, जिसमें सिर की त्वचा की एक पट्टी निकालकर बाल लिए जाते थे और टांके लगाने पड़ते थे. अब यह तरीका बहुत कम इस्तेमाल होता है. आज सबसे ज्यादा एफयूई तकनीक अपनाई जाती है, जिसमें एक-एक बाल की जड़ निकालकर जरूरत वाली जगह पर लगाया जाता है. डीएचआई  उपरोक्त दोनों तकनीकों का बेहतर और आधुनिक रूप माना जाता है. इसमें बालों को शरीर के बाहर बहुत कम समय रखा जाता है और जल्दी लगाया जाता है, जिससे अच्छे रिजल्ट मिलने की संभावना बढ़ जाती है.

डॉ. सचिन गुप्ता बताते हैं आजकल सस्ते पैकेज और बड़ी-बड़ी गारंटी देकर लोगों को आकर्षित किया जाता है, लेकिन सिर्फ कम कीमत देखकर फैसला करना ठीक नहीं है. हेयर ट्रांसप्लांट जिंदगी में आमतौर पर एक ही बार कराया जाता है और उसका असर लंबे समय तक रहता है. इसलिए यह देखना जरूरी है प्रक्रिया करने वाले डॉक्टर प्रशिक्षित हैं या नहीं, क्लिनिक में साफ-सफाई और जरूरी सुविधाएं हैं या नहीं. सिर्फ ज्यादा बाल लगाने का दावा सुनकर प्रभावित नहीं होना चाहिए. सही डॉक्टर मरीज की जरूरत, गंजेपन की स्थिति और डोनर एरिया को देखकर तय करता है कितने बाल लगाने चाहिए.

रिजल्ट आने में करीब 1 से डेढ़ साल तक का समय

डॉ. सचिन गुप्ता बताते हैं ट्रांसप्लांट के तुरंत बाद नए बाल नहीं उगते. सबसे पहले बालों की जड़ों को लगाया जाता है. शुरुआती दिनों में कुछ लगाए गए बाल झड़ भी सकते हैं, जो सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. इसके बाद धीरे-धीरे नई ग्रोथ शुरू होती है. करीब 2 से 3 महीने में बाल आने लगते हैं. 6 से 8 महीने में अच्छा बदलाव दिखाई देता है, जबकि पूरा रिजल्ट आने में करीब 1 से डेढ़ साल तक का समय लग सकता है. डॉ. सचिन गुप्ता बताते हैं ट्रांसप्लांट में सिर के पीछे वाले हिस्से के बाल लगाए जाते हैं, जो आमतौर पर लंबे समय तक टिके रहते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आगे के बाकी बाल कभी नहीं झड़ेंगे. अगर बालों की देखभाल नहीं की गई और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं या इलाज नहीं लिया गया तो समय के साथ दूसरे बाल झड़ सकते हैं. इसलिए सिर्फ ट्रांसप्लांट कराना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके बाद सही इलाज और नियमित देखभाल भी उतनी ही जरूरी है.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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