केंद्र सरकार ने पंजाब और हरियाणा ट्राइसिटी क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एनएच-205ए के अंबाला-चंडीगढ़ सेक्शन को जीरकपुर बाईपास से जोड़ने वाले 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड स्पर के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए ₹1,463.95 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना की जानकारी देते हुए इसे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है।
यह परियोजना चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला को जोड़ने वाले ट्राइसिटी रिंग रोड का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना और यात्रियों को तेज व सुरक्षित सफर उपलब्ध कराना है। लंबे समय से ट्राइसिटी क्षेत्र ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, जिससे आम नागरिकों के साथ-साथ औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह नया ग्रीनफील्ड स्पर कॉरिडोर प्रमुख शहरी चौराहों से ट्रैफिक को डायवर्ट करेगा, जिससे शहर के अंदर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। इस परियोजना से चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के बीच यातायात व्यवस्था अधिक सुचारू हो जाएगी। इसके अलावा एनएच-44, एनएच-205ए और एनएच-152 जैसे प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी वाहनों का दबाव भी कम होगा।
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ हिमाचल प्रदेश की ओर जाने वाले यात्रियों को मिलेगा। विशेष रूप से शिमला और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को तेज और आसान कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी, जिससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा में सुधार, प्रदूषण में कमी और ईंधन की बचत जैसे सकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे।
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना पंजाब और ट्राइसिटी क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और क्षेत्र को विश्व-स्तरीय सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की आधुनिक परियोजनाएं क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगी और निवेश के नए अवसर पैदा करेंगी।
चंडीगढ़ ट्राइसिटी रिंग रोड परियोजना कुल मिलाकर लगभग 244 किलोमीटर लंबी है, जिसकी अनुमानित लागत ₹12,000 करोड़ से अधिक है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत विकसित की जा रही है, जिसका उद्देश्य राज्यों के बीच आवागमन को आसान बनाना और प्रमुख यातायात बाधाओं को दूर करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ग्रीनफील्ड स्पर के निर्माण से न केवल ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, बल्कि औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। यह परियोजना पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देगी। केंद्र सरकार की यह पहल आधुनिक और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले वर्षों में लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।












