हरियाणा में पंजीकृत निर्माण कामगारों के लिए राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना फिर चर्चा में है। श्रमिकों को बेहतर और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार श्रम विभाग के माध्यम से “औजार सहायता योजना” चला रही है। इस योजना के तहत निर्माण कार्य से जुड़े मजदूरों को नए और उन्नत औजार खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे अधिक सुरक्षित, तेज और प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
प्रदेश में भवन निर्माण, राजमिस्त्री, बढ़ई, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, पेंटर और अन्य निर्माण कार्यों से जुड़े हजारों कामगार इस योजना से लाभान्वित हो सकते हैं। योजना का मूल उद्देश्य यह है कि श्रमिकों के पास गुणवत्तापूर्ण टूल किट उपलब्ध हो, जिससे कार्य की गुणवत्ता सुधरे और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो। बेहतर औजार न केवल श्रमिक की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं, बल्कि उसकी आय में भी सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
यह योजना हरियाणा श्रम विभाग के माध्यम से संचालित की जा रही है। विभाग के अनुसार पात्र पंजीकृत निर्माण कामगार को औजार (टूल किट) खरीदने पर अधिकतम 8000 रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी को दी जाती है, जिससे वह अपने कार्य की प्रकृति के अनुसार जरूरी उपकरण खरीद सके।
श्रम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले अधिकांश श्रमिक सीमित संसाधनों के कारण उच्च गुणवत्ता वाले औजार नहीं खरीद पाते। इससे उनके काम की गति और गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे में यह योजना उनके लिए आर्थिक संबल का कार्य करती है। सरकार का मानना है कि यदि मजदूरों को बेहतर उपकरण मिलेंगे तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी बेहतर होगी और श्रमिकों की उत्पादकता बढ़ेगी।
योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ स्पष्ट शर्तें निर्धारित की गई हैं। लाभार्थी को क्लेम फॉर्म-16 में आवेदन करना अनिवार्य है। निर्धारित फॉर्म के बिना कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही औजारों की खरीद से संबंधित बिल, कीमत, खरीद की तिथि और जिस स्थान से औजार खरीदे गए हैं, उसकी पूरी जानकारी देना आवश्यक है। औजारों की सूची संलग्न करना भी जरूरी होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सहायता राशि वास्तविक और सत्यापित खरीद पर ही दी जा रही है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सुविधा तीन वर्ष में केवल एक बार ही उपलब्ध होगी। यानी एक बार सहायता प्राप्त करने के बाद अगले तीन साल तक उसी लाभार्थी को पुनः इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र कामगारों तक योजना का लाभ पहुंचाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए बेहद अहम हैं। निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिक अक्सर असुरक्षित परिस्थितियों में काम करते हैं। यदि उनके पास मजबूत और मानक उपकरण होंगे तो कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं का जोखिम कम किया जा सकता है। साथ ही, बेहतर औजारों के जरिए वे कम समय में अधिक काम कर पाएंगे, जिससे उनकी दैनिक या ठेके की आय में भी वृद्धि संभव है।
सिरसा सहित प्रदेश के अन्य जिलों में पंजीकृत निर्माण कामगारों से अपील की गई है कि वे समय पर आवेदन कर इस योजना का लाभ उठाएं। आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि न हो, इसके लिए श्रम विभाग के कार्यालयों से मार्गदर्शन भी लिया जा सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल वही श्रमिक पात्र होंगे जो विधिवत पंजीकृत हैं और निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं।
हरियाणा सरकार की यह पहल श्रमिक कल्याण की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से निर्माण कामगारों का जीवन स्तर सुधारने का लक्ष्य इस योजना के केंद्र में है। आने वाले समय में यदि अधिक संख्या में श्रमिक इस योजना से जुड़ते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव प्रदेश के निर्माण क्षेत्र की गुणवत्ता और कार्य दक्षता पर भी देखने को मिल सकता है।













