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Gurgram Water Logging: हरियाणा के गुरुग्राम में जलभराव रोकने के लिए जीडीए ने दो इंजीनियरिंग उपाय लागू किए हैं और अब दावा किया जा रहा है कि शहर के अहम इलाकों में जलभराव नहीं होगा. करीब 105 करोड़ रुपये का 4.3 किमी लंबा ड्रेन बनाया गया है और इससे पानी को शहर से बाहर निकाला जाएगा.
गुरुग्राम विकास प्राधिकरण ने दो अहम इंजीनियरिंग उपाय लागू किए हैं, ताकि शहर में जलभराव होने से रोका जाए.
गुरुग्राम. चाहे मॉनसून सीजन की बारिश हो या फिर आम दिनों की जोरदार बरसात. गुरुग्राम की बारिश से भला कौन नहीं वाकिफ है. आलम यह होता है कि पूरा गुरुग्राम पानी से डूब जाता है. फिर देश और दुनिया में इस मिलेनियम सिटी की चर्चा होती है कि आखिर शहर का ड्रेनेज सिस्टम इतना खराब क्यों हैं. लेकिन अब गुरुग्राम विकास प्राधिकरण ने दो अहम इंजीनियरिंग उपाय लागू किए हैं, ताकि शहर में जलभराव होने से रोका जाए.
दरअसल, हर बार जोर की बारिश होने और मानसून में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नई योजना पर काम किया है. इसके तहत अब अब सतही नालों और स्टॉर्म वॉटर ड्रेनों के बीच क्रॉस-कनेक्शन तथा गली में नालियों का निर्माण किया गया है. इससे हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक तक जो सड़क है, उससे बारिश के पानी की तेजी से निकासी की जाएगी. क्योंकि बारिश की वजह से इस मार्ग पर भारी जाम देखने को मिला है. अहम बात है कि यह गुरुग्राम का सबसे व्यस्त मार्ग भी है. इसके अलावा, इस कॉरिडोर से गुरुग्राम में रोजाना हजारों लोग, व्यावसायिक वाहन गुजरते हैं. जो कि औद्योगिक परिवहन की जीवनरेखा माना जाता है.
गमाडा के प्रवक्ता ने बताया कि बारिश के पानी की तेजी से निकासी के लिए सेक्टर 10A/37-2 में मास्टर सेक्टर डिवाइडिंग रोड पर तीन क्रॉस-ड्रेन कनेक्शन बनाए गए हैं और इसमें 600 मिमी की चौड़ी पाइपलाइनें बिछाई गई हैं और उन्हें कर सतही नालों को सीधे मास्टर स्टॉर्म वॉटर ड्रेन से जोड़ा गया है.
इसके साथ ही इस कॉरिडोर में कई अहम जगहों पर नालियां बनाई गई हैं जिन्हे की नालों से कनेक्ट किया गया है. इस के बाद बारिश का पानी सीधे मास्टर ड्रेनेज नेटवर्क में पहुंचेगा.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गमाडा के प्रवक्ता ने बताया कि ये कदम शहर की ड्रेनेज समस्या को दूर करेंगे. वह बताते हैं कि कई क्षेत्रों में सीवरेज और स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज नेटवर्क के बीच अवैध कनेक्शन हैं और इस वजह से पानी निकासी सही तरीके से नहीं हो पाती है. ऐसे में अब पानी की निकासी को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा.
क्या है नया लेग-4 ड्रेन?
गुरुग्राम में जलभराव ना हो, इसके लिए 4.3 किलोमीटर लंबा लेग-4 ड्रेन बनाया गया है, जिस पर 105 करोड़ रुपये किए गए हैं. आरसीसी यानी कंक्रीट की इस ड्रेन से 1,400 क्यूसेक तक पानी ले जाया जा सकता है और यह बदशाहपुर ड्रेन पर दबाव को कम कर देगा. यह नया ड्रेन वाटिका चौक से सेक्टर-37डी तक जाएगा और फिर बदशाहपुर ड्रेन में मिलेगा. वाटिका चौक पर विशेष रेगुलेटरी गेट बनाया गया है और जब बारिश बहुत ज्यादा होगी, तब अतिरिक्त पानी को इस नए ड्रेन की ओर मोड़ दिया जाएगा. इससे साउदर्न पेरिफेरल रोड और आसपास के इलाकों में जलभराव कम होगा.
जहां जहां होती है वॉटर लॉगिंग, वहां क्या-क्या है
गौर रहे कि दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे (NH-48) पर हीरो होंडा चौक शहर का एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है और यहां से ब़ड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं. इसके आसपास आईटी पार्क और सेक्टर-33 में हीरो मोटोकॉर्प की इकाई समेत कई औद्योगिक कंपनियां मौजूद हैं. सेक्टर-34 में नगर निगम गुरुग्राम का मुख्यालय भी है. इसके अलावा, उमंग भारद्वाज चौक द्वारका एक्सप्रेसवे, दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे और पूर्वी गुरुग्राम को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण जंक्शन है. सेक्टर-81 से 95 के बीच विकसित आवासीय कॉलोनियों के लोग भी इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं. रेवाड़ी और पाटौदी की ओर से आने वाले वाहनों का बड़ा हिस्सा भी इसी मार्ग से गुजरता है. ऐसे में यातायात के इस भारी दबाव के कारण इस छोटे से कॉरिडोर पर जलभराव के बाद काफी ट्रैफिक जाम लगता है और सड़क पर जलभराव के बाद पश्चिमी गुरुग्राम की यातायात व्यवस्था ठप्प हो जाती है.
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Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें











