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Who is Chaman : सहारे की उम्र में ये बुजुर्ग महिला दर-दर भटक रही है. फरीदाबाद के वृद्धाश्रम में रह रही चमन की आंखों से छलका दर्द किसी को भी रुला देगा. महिला का आरोप है कि बेटे ने मारपीट कर घर से निकाला, पायल-अंगूठी छीन ली. बेटी पर बैंक खाते से पैसे निकालने और मोबाइल छीनने का आरोप है. लोकल 18 से चमन कहती हैं कि पिछले सात दिनों से फरीदाबाद के सेक्टर-10 के इस वृद्धाश्रम में रह रही हूं. दिल्ली के मंदिरों में भी रही हूं. मेरे दो बेटे और दो बेटियां हैं. विधवा होने के बाद से भटकने को मजबूर हूं.
फरीदाबाद. हरियाणा के फरीदाबाद में अपनों से ठुकराई इस बुजुर्ग महिला की कहानी सुनकर किसी का भी दिल भर आएगा. जिस उम्र में बच्चों का सहारा मिलना चाहिए, उस उम्र में महिला को घर से बेघर होना पड़ा. कभी बारिश में सड़क पर रात गुजारनी पड़ी तो कभी मंदिरों में शरण लेनी पड़ी. महिला अपनी जिंदगी का दर्द बताते बताते फूट फूटकर रोने लगती है. उसका कहना है कि बेटे ने मारपीट कर घर से निकाल दिया. पायल और अंगूठी तक छीन ली. बेटी पर बैंक खाते से पैसे निकालने और मोबाइल छीनने का आरोप है. अब महिला वृद्धाश्रम में जिंदगी गुजार रही है. अपनों ने ऐसा दर्द दिया कि जिंदगी काटना मुश्किल हो गया. लोकल 18 से चमन बताती हैं कि मैं दिल्ली के महरौली की रहने वाली हूं. मेरी उम्र 50 साल है. पिछले सात दिनों से मैं फरीदाबाद के सेक्टर-10 के इस वृद्धाश्रम में रह रही हूं. दिल्ली के मंदिरों में भी रही हूं. पिछले 20 साल से नोएडा में रह रही थी. विधवा हूं. मेरे दो बेटे और दो बेटियां हैं. मेरा बड़ा बेटा जेल में है. छोटा बेटा दिल्ली के महरौली में रहता है.
पत्नी को भी पीटता है बेटा
चमन बताती हैं कि मेरा छोटा बेटा मेरा सारा सामान छीन लेता है. मेरी पायल और अंगूठी भी बेटे ने छीन ली. बेटे ने अंगूठी छीनकर उसे बेचकर किराए पर कमरा ले लिया और मुझे घर से भगा दिया. घर से निकाले जाने के बाद करीब 10 दिन तक मैं बाहर बारिश में रही. सिर पर छत नहीं थी और रहने के लिए कोई जगह नहीं थी. दिल्ली में मंदिरों में भी रहकर मैंने दिन काटे. छोटा बेटा जिस तरीके से अपनी पत्नी को मारता है, उसी तरीके से मेरे साथ भी बुरी तरह मारपीट करता है. बेटी भी मेरा पैसा छीन लेती है. अभी बेटी ने मेरे बैंक अकाउंट से करीब 5 से 6 हजार रुपये निकाल लिए हैं. बेटी ने मेरा मोबाइल फोन भी छीन लिया. एक तरफ बेटे से मारपीट का दर्द मिला तो दूसरी तरफ बेटियों से भी सहारा नहीं मिला.
बेटी ने लातों से मारा
चमन के मुताबिक, मेरा बड़ा बेटा बहुत अच्छा है, लेकिन वह जेल में है. बड़ी बेटी भी मुझे अपने पास नहीं रखती है. जब मेरे पति की मौत हुई थी, तब बड़ी बेटी ने मुझे लातों से मारा था. जिन बच्चों के लिए पूरी जिंदगी गुजारी. आज उन्हीं बच्चों के बीच मेरे लिए रहने की जगह नहीं बची. फरीदाबाद सेक्टर 10 वृद्धाश्रम की संचालक अनीता मलिक बताती हैं कि आजकल के बच्चों ने जैसे एक रूल बना लिया है कि मम्मी पापा को पीटना है और घर से निकाल देना है. बच्चों से मैं यही कहना चाहूंगी कि तुम भी एक दिन बुजुर्ग होना है. तुम्हारे बच्चे भी तुम्हारे साथ ऐसा ही करेंगे. इसलिए अपने मां बाप के साथ ऐसा नहीं करें.
दर्द समझना मुश्किल
अनीता मलिक बताती हैं कि कुछ साल पहले एक फिल्म आई थी बागवान. पहले हम ऐसी चीजें फिल्मों में देखते थे. लेकिन आजकल यह सब रियल में हो रहा है. बुजुर्ग माता पिता को अपने बच्चों से सिर्फ प्यार. सम्मान और सहारे की जरूरत होती है. जिस उम्र में बच्चों को माता पिता का सहारा बनना चाहिए. उस उम्र में अगर माता पिता को घर से निकाल दिया जाए तो उनका दर्द समझना मुश्किल है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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