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Marigold Best Variety : फरीदाबाद के साहुपुरा गांव में किसान लक्ष्मण सिंह ने गेंदे की अजमेर तिरंगा जाफरी वैरायटी लगाकर नया प्रयोग किया है. पहले कोलकाता वैरायटी में नुकसान झेल चुके किसान लक्ष्मण सिंह को इस बार अच्छी पैदावार और बेहतर मंडी भाव की उम्मीद है. करीब एक एकड़ में लगी फसल डेढ़ महीने की हो चुकी है. लोकल 18 से किसान लक्ष्मण सिंह कहते हैं कि इस बार मैंने करीब एक एकड़ जमीन में अजमेर की तिरंगा जाफरी वैरायटी के गेंदे का फूल लगाया है. इससे पहले कोलकाता की वैरायटी लगाता था, लेकिन उसमें लगे घाटे ने कमर तोड़ दी.
फरीदाबाद. गेंदा फूल की खेती करने वाले किसानों की ये वैरायटी किस्मत बदल सकती है. फरीदाबाद के साहुपुरा गांव के खेतों में गेंदे की एक ऐसी वैरायटी देखने को मिल रही है, जिसे किसान अच्छी पैदावार और बेहतर रेट की उम्मीद में लगा रहे हैं. आमतौर पर यहां गेंदे की कोलकाता वैरायटी की खेती ज्यादा देखने को मिलती है, लेकिन इस बार एक किसान ने अजमेर की तिरंगा जाफरी वैरायटी लगाकर नया प्रयोग किया है. किसान को उम्मीद है कि अगर मंडी में इस फूल का रेट अच्छा रहा तो खेती से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. करीब डेढ़ महीने पहले लगाई गई यह फसल अभी खेत में तैयार हो रही है. किसान का कहना है कि इस बार उसने पूरी उम्मीद के साथ फसल लगाई है और अगर मेहनत के हिसाब से रेट मिल गया तो पिछली फसल में हुआ नुकसान भी कुछ हद तक पूरा हो सकता है.
पिछली बार हो गया घाटा
लोकल 18 से किसान लक्ष्मण सिंह बताते हैं कि मैं बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव का रहने वाला हूं, लेकिन मेरे खेते साहुपुरा गांव में है. इस बार मैंने करीब एक एकड़ जमीन में अजमेर की तिरंगा जाफरी वैरायटी के गेंदे का फूल लगाया है. इससे पहले मैं कोलकाता की वैरायटी लगाता था, लेकिन उसमें मुझे घाटा हो गया था. इस बार किसी ने मुझे अजमेर की इस वैरायटी के बारे में बताया और बीज भी लाकर दिया. इसके बाद मैंने सोचा कि एक बार इस वैरायटी को लगाकर देखते हैं. करीब डेढ़ महीने पहले इसकी खेती शुरू की थी.
मेहनत कम नहीं
लक्ष्मण सिंह बताते हैं कि इस इलाके में बाकी किसान भी गेंदे की खेती करते हैं, लेकिन ज्यादातर कोलकाता की वैरायटी लगाते हैं. अजमेर की तिरंगा जाफरी को अच्छी वैरायटी माना जाता है. इसकी पैदावार भी अच्छी बताई जाती है. इसी उम्मीद के साथ मैंने इस बार करीब 250 ग्राम बीज मंगवाया था. गेंदे की खेती में भी मेहनत कम नहीं है. खेत तैयार करने के लिए करीब चार बार जुताई करनी पड़ती है. दो बार हैरो और दो बार कल्टीवेटर चलाना पड़ता है. इसके बाद मेड़ तैयार करनी होती है और फिर फसल के हिसाब से पानी देना पड़ता है. अगर बारिश नहीं होती है तो करीब 10 दिन के अंदर सिंचाई करनी ही पड़ती है.
लक्ष्मण सिंह बताते हैं कि कोलकाता की वैरायटी में नुकसान देख चुका हूं, इसलिए इस बार नई वैरायटी को लेकर उम्मीद ज्यादा है. गेंदे का फूल मंडी में कई बार करीब 200 रुपये किलो तक भी चला जाता है, लेकिन इसका कोई पक्का रेट नहीं होता. रेट रोज बदल सकता है और मांग के हिसाब से भाव ऊपर नीचे होते रहते हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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