फरीदाबाद: फरीदाबाद में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए बारिश का मौसम राहत के साथ-साथ चिंता भी लेकर आता है. खेत में पानी की जरूरत होती है, लेकिन खाद डालने में थोड़ी सी लापरवाही धान की फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. डीग गांव के किसान मांगेराम की बातों से खेती की यही पूरी कहानी सामने आती है. पिछले साल पानी नहीं मिलने से उनकी धान की फसल सूख गई और करीब 8 लाख रुपये तक का नुकसान हो गया. इस साल बारिश ठीक हो रही है तो किसान को उम्मीद है कि धान की फसल अच्छी होगी. लेकिन किसान का कहना है कि खेती में हर चीज लिमिट में करनी चाहिए.
Local18 से बातचीत में किसान मांगेराम बताते हैं कि मैं करीबन 30 साल से धान की खेती कर रहा हूं. मैं इसी डीग गांव का रहने वाला हूं. मेरी खेती फरीदाबाद में दो जगह है. एक जगह जो मेरी खेती है फरीदाबाद के दिल्ली-आगरा नहर सिंचाई के बगल में. नहर किनारे जो मेरी खेती है, वह 12 एकड़ में है. पिछले साल मेरे खेतों में धान बिल्कुल सुख गए थे. इस साल बारिश तो हो रही है, अभी तक तो ठीक है धान के लिए.
ज्यादा खाद से हो जाता है नुकसान
मांगेराम बताते हैं कि बरसात के मौसम में यूरिया डालने से धान खराब हो जाता है. धान में यूरिया सिर्फ एक से डेढ़ कट्टा ही गिरता है. इससे ज्यादा नहीं डालना चाहिए. लिमिट में ही कोई चीज डालनी चाहिए. ज्यादा अति करेंगे तो वह नुकसान ही है. यूरिया एक कट्टे में 40 किलो आता है. मैंने धान में वैरायटी 1121 और 1509 लगाया हुआ है. एक एकड़ में करीबन 20 हजार रुपये खर्च आता है.
मांगेराम बताते हैं कि किसान को धान में यूरिया डालते समय सबसे पहले मौसम का ध्यान रखना चाहिए. बरसात के समय बिना जरूरत ज्यादा यूरिया डालने से बचना चाहिए. खेत में खाद की मात्रा जरूरत के हिसाब से ही रखनी चाहिए. किसान को यह भी देखना चाहिए कि खेत में पानी कितना है और मौसम कैसा रहने वाला है. ज्यादा खाद डालने से फसल हमेशा ज्यादा अच्छी होगी ऐसा नहीं है. कई बार ज्यादा खाद ही फसल के लिए नुकसान बन जाती है.
जरुरत के हिसाब से डालें खाद
मांगेराम बताते हैं कि धान की खेती में किसान को खेत की स्थिति पर लगातार नजर रखनी चाहिए. अगर बारिश हो रही है तो खेत में पानी ज्यादा जमा न हो इसका भी ध्यान रखना चाहिए. अगर खेत में पानी कम है तो सिंचाई की व्यवस्था देखनी चाहिए. खाद डालने से पहले खेत की हालत और फसल की जरूरत को देखना जरूरी है. किसान को अपने हिसाब से ज्यादा खाद डालने के बजाय जरुरत के हिसाब से ही खाद डालनी चाहिए.
किसान की मेहनत हो रही बर्बाद
मांगेराम बताते हैं कि पिछले साल जो हमारा नहर किनारे खेत है, उसमें नुकसान हो गया था. उसका कारण क्या पिछले साल यमुना में आई बाढ़ आई. बाढ़ की वजह से नहर में पानी नहीं छोड़ा गया. ज्यादा पानी छोड़ा ही नहीं, जिसकी वजह से हमारी फसल सूख गई. बहुत ज्यादा नुकसान हो गया था. करीबन मेरा पिछले साल जो नुकसान है, धान में 8 लाख रुपये तक का हो गया था. मांगेराम बताते हैं कि साढ़े 5 लाख तो पट्टे वाले को दिए थे, जिसका हमें कोई मुआवजा नहीं मिला है. नहर किनारे जो खेत है सिर्फ नहर से ही सिंचाई होती है और कोई साधन नहीं है वहां सिंचाई का. ऐसे में अगर नहर में पानी नहीं आता है तो किसान के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है. किसान पूरी फसल लगाता है और बाद में पानी नहीं मिलने पर पूरी मेहनत खराब हो जाती है.
बारिश हुई तो फसल होगी अच्छी
मांगेराम बताते हैं कि खेती में खर्च भी लगातार बढ़ रहा है. एक एकड़ में करीबन 20 हजार रुपये खर्च आता है. इसके अलावा खेतों में मजदूर लगते हैं. एक दिन का 600 रुपये एक मजदूर लेकर चला जाता है. मांगेराम बताते हैं कि इस साल बारिश तो हो रही है और अभी तक धान के लिए ठीक है. अगर इसी तरह बारिश होती रही और नहर में भी पानी मिलता रहा तो इस बार फसल अच्छी होने की उम्मीद है. लेकिन किसान को बारिश के साथ-साथ खाद और पानी दोनों का ध्यान रखना होगा. खेत में ज्यादा पानी हो तो उसकी निकासी का इंतजाम देखना चाहिए और खाद डालते समय भी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.
कृषि विशेषज्ञ की जरूर लें सलाह
मांगेराम बताते हैं कि धान की फसल में किसान को समय पर खेत की निगरानी करनी चाहिए. पत्तियों का रंग बदल रहा है या फसल की बढ़त सही नहीं है, तो ध्यान देना चाहिए. कीड़े या बीमारी दिखाई दे तो समय रहते जानकारी लेनी चाहिए. बिना जानकारी के कोई दवा या खाद ज्यादा मात्रा में डालना सही नहीं है. किसान को कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ से जानकारी लेकर ही दवा और खाद का इस्तेमाल करना चाहिए.
मांगेराम बताते हैं कि खेती की ऐसी स्थिति रही तो आने वाले टाइम में बच्चे जो है खेती नहीं करेंगे, बिल्कुल नहीं करेंगे. किसान के लिए सबसे बड़ी बात यही है कि खेती में मेहनत बहुत है, लेकिन मौसम और पानी की वजह से नुकसान भी बहुत हो जाता है. पिछले साल 8 लाख रुपये का नुकसान झेलने वाले मांगेराम को इस साल बारिश से उम्मीद है. लेकिन उनकी बात साफ है कि खेती में चाहे खाद हो या पानी हो, सब कुछ लिमिट में और जरूरत के हिसाब से ही करना चाहिए. यही छोटी-छोटी सावधानी किसान की फसल को नुकसान से बचाने में मदद कर सकती है.












