फरीदाबाद के 51 गांवों की जमीन उगलेगी सोना, कहीं आपका प्लॉट भी तो इसमें शामिल नहीं? यहां देख लें पूरी लिस्ट

On: September 8, 2026 5:20 PM
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फरीदाबाद: शहर के विस्तार की तैयारी तेज हो गई है. सरकार ने जिले के 51 गांवों की करीब 11 हजार एकड़ जमीन पर नए सेक्टर विकसित करने की योजना बनाई है. इसके लिए किसानों से जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. सरकार ने जमीन देने के इच्छुक किसानों से ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से आवेदन मांगे हैं. आवेदन करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 रखी गई है. बताया जा रहा है कि करीब 11 हजार एकड़ जमीन मिलने के बाद फरीदाबाद में करीब 40 नए सेक्टर विकसित करने का रास्ता साफ हो सकता है. इन सेक्टरों में आने वाले समय में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं.

इस योजना में डबुआ, गाजीपुर, भांकरी, पाली, भूपानी, नचौली, कांवरा, फरीदपुर, सदपुरा, नीमका, फतुपुरा, तिगांव, बदरोला, मंधावली, बुखारपुर, नवादा तिगांव, दयालपुर, पहलादपुर माजरा बदरौला, जुन्हेडा, कौराली, मौजपुर, अटाली, पहलादपुर, फफूंदा, गढ़खेड़ा, पन्हेड़ा खुर्द, नराहवली, बहवलपुर, लडोली, सुनपेड, सागरपुर, डीग, शाहपुर खुर्द, सीकरी, कैल गांव, जाजरू, नंगला जोगियान, भनकपुर, खंदावली, नेकपुर, फतेहपुर तगा, मादलपुर, सरूरपुर, खेड़ी गुजरान, नंगला गुजरान, कुरेशीपुर, बाजड़ी, नारियाला, फतेहपुर बिल्लौच, प्रहलादपुर माजरा डीग और पियाला गांव शामिल हैं.

किसानों को जमीन देने के लिए किया जाएगा जागरूक
प्राधिकरण के नियमानुसार, एक एकड़ जमीन देने वाले किसान को सेक्टर में एक हजार वर्ग गज का प्लाट और 90 वर्ग गज का कमर्शियल प्लॉट दिया जाएगा. संपदा अधिकारी विकास ढांडा का कहना है कि मास्टर प्लान के तहत शहर का दायरा बढ़ाया जाना है. इसके लिए पहले जमीन की जरूरत है और सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका है. किसानों को जमीन देने के लिए जागरूक भी किया जाएगा.

बबलू हुड्डा बताते हैं कि सरकार ने जिन 51 गांवों की करीब 11 हजार एकड़ जमीन पर सेक्टर विकसित करने की बात कही है, उसमें सोतई गांव का नाम नहीं है. बबलू हुड्डा बताते हैं कि सवाल यह है कि सोतई गांव की जमीन को इस योजना में शामिल क्यों नहीं किया गया. इसके पीछे साल 2022 से चला आ रहा जमीन का विवाद सबसे बड़ा कारण है. बबलू हुड्डा बताते हैं कि साल 2022 में जेवर एयरपोर्ट से जुड़ा प्रोजेक्ट सामने आया था और उस समय सोतई गांव की कुछ जमीन को विवादित बना दिया गया. उस समय DRO रहे विजेंद्र राणा ने अपने स्तर पर इस जमीन को लेकर नगर निगम को पत्र लिखा था. उनके पास इस जमीन को विवादित बताने से जुड़ा कोई ठोस दस्तावेज नहीं है.

NHAI की एप्लीकेशन भी कोर्ट ने रद्द
बबलू हुड्डा बताते हैं कि इसी मामले को लेकर MCF कोर्ट चला गया था. साल 2025 में NHAI की एप्लीकेशन भी कोर्ट ने रद्द कर दी थी. आज भी मामला कोर्ट में है और इसी वजह से ग्रामीणों को धरने पर बैठना पड़ रहा है. अगर जमीन विवादित है तो सरकार या MCF यह बताए कि आखिर किस आधार पर इसे अपनी जमीन माना जा रहा है. बबलू हुड्डा बताते हैं कि कुछ दिन पहले सोतई गांव में ग्रामीणों की महिलाओं पर लाठीचार्ज किया गया. ग्रामीणों ने इसका वीडियो भी बनाया था, लेकिन ग्रामीणों से फोन छीनकर वीडियो डिलीट करवा दिया. MCF के पास आज तक ऐसी एक भी पक्की लाइन नहीं है, जिससे वह यह साबित कर सकें कि यह जमीन उसकी है.

सोतई गांव को क्यों किया गया बाहर?
बबलू हुड्डा बताते हैं कि 11 हजार एकड़ जमीन पर सेक्टर विकसित करने की योजना में सोतई गांव को शामिल नहीं किया गया है, जबकि यह पूरा इलाका गंगा और यमुना के बीच का बेहद उपजाऊ क्षेत्र है. अगर सरकार को सेक्टर ही विकसित करने हैं तो बंजर जमीन पर भी शहर बसाया जा सकता है. खेती की जमीन पर सेक्टर बसाने से किसानों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा होगा.

बबलू हुड्डा बताते हैं कि सोतई गांव को इस योजना से बाहर रखने के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां चल रहा धरना और जमीन का विवाद हो सकता है. अगर सरकार अब इस जमीन को लेती है तो उसे आज के हिसाब से जमीन का रेट देना पड़ेगा. सरकार अगर 2022 के रेट पर जमीन लेना चाहती है तो किसान इसके लिए तैयार नहीं हैं. जब बाजार में किसी सामान की कीमत बढ़ जाती है तो उसे पुराने रेट पर नहीं खरीदा जा सकता, फिर किसान अपनी जमीन पुराने रेट पर क्यों दें.

सरकार को रोजी-रोटी का रखना होगा ध्यान
बबलू हुड्डा बताते हैं कि कोरोना के समय जब देश में कारखाने और दूसरे काम बंद हो गए थे, तब किसानों ने ही खेतों में फसल उगाकर देश का पेट भरा था. भारत की अर्थव्यवस्था में खेती की भूमिका हमेशा से बहुत बड़ी रही है. करीब डेढ़ से दो सौ साल पहले भी भारत की अर्थव्यवस्था में खेती और पशुपालन की बड़ी भूमिका थी और इसी वजह से भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था. आज सरकार शहरों का विस्तार करने के लिए हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन लेने की तैयारी कर रही है. सरकार को विकास करना है तो किसानों की जमीन और उनकी रोजी-रोटी दोनों को ध्यान में रखना होगा. फरीदाबाद में नए सेक्टर जरूर बनें, लेकिन इसके साथ किसानों के हित और जमीन के सही दाम का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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