पालक की खेती करने वाले किसान बारिश में न करें ये गलती, वरना खेत में खड़ी फसल हो सकती है खराब, जानिए टिप्स

On: September 9, 2026 7:32 AM
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बारिश के मौसम में पालक की खेती करने वाले किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती रहती है. खेत में पानी रुकने से फंगस और जड़ सड़न जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. हालांकि अभी मंडी में पालक का भाव 800 से 900 रुपये सैकड़ा तक पहुंच गया है. ऐसे में फसल बचाने वाले किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद है.

बरसात का मौसम आते ही पालक की खेती करने वाले किसानों की परेशानी बढ़ जाती है. खेत में पानी रुकने से पालक की पत्तियां खराब होने लगती हैं और कीड़े व फंगस लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में किसान की मेहनत और लागत दोनों पर असर पड़ता है. हालांकि इस समय मंडी में पालक के भाव अच्छे मिल रहे हैं. करीब 800 से 900 रुपये सैकड़ा तक भाव चल रहा है. अगर फसल बच गई तो किसान अच्छी कमाई कर सकता है.

Local18 से बातचीत में कुंवर दास बताते हैं कि बल्लभगढ़ के सुनपेड़ गांव में मैंने पालक की हाइब्रिड वैरायटी लगाई हुई है. मेरी उम्र करीब 60 साल हैं और आज भी सुबह से शाम तक खेत में मेहनत करता हूं. पालक की फसल में बरसात के समय ज्यादा सावधानी रखनी पड़ती है. पानी रुकने से फसल खराब हो सकती है. इसलिए खेत की लगातार निगरानी करनी पड़ती है और समय पर घास व खरपतवार भी निकालना जरूरी है.

कुंवर दास बताते हैं कि इस समय मंडी में पालक के भाव किसानों के लिए अच्छे हैं. अभी पालक करीब 800 से 900 रुपये सैकड़ा तक बिक रहा है. बारिश के मौसम में पालक की फसल को बचाना मुश्किल होता है, लेकिन जो किसान फसल को बचा लेता है, उसे भाव अच्छा मिल सकता है. वहीं सर्दियों में पालक की पैदावार ज्यादा होती है. मंडी में आवक बढ़ने के कारण उस समय भाव काफी नीचे चला जाता है.

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कुंवर दास बताते हैं कि सर्दियों में पालक की फसल खेतों में अच्छी होती है, लेकिन उस समय मंडी भाव किसानों को परेशान कर देता है. कई बार पालक का रेट करीब 100 रुपये सैकड़ा तक पहुंच जाता है. ऐसे में किसान के सामने लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है. अभी बारिश के मौसम में फसल खराब होने का डर जरूर रहता है, लेकिन मंडी में भाव अच्छा मिलने की उम्मीद रहती है. किसान की कमाई पूरी तरह फसल और मंडी भाव पर निर्भर रहती है.

कुंवर दास बताते हैं कि पालक में फंगस की समस्या होने पर साफ नाम की फफूंदनाशक दवा का इस्तेमाल किया जाता है. 1 लीटर पानी में 2 ग्राम साफ पाउडर अच्छी तरह घोलकर पालक की पत्तियों पर स्प्रे किया जाता है. पत्तियों के नीचे भी दवा का छिड़काव करना जरूरी बताया गया है. अगर जड़ों में सड़न की समस्या दिखाई दे तो इसी घोल को पौधों की जड़ वाली मिट्टी में डाल सकते हैं. दवा इस्तेमाल से पहले कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है.

कुंवर दास बताते हैं कि पालक बोने से पहले बीज का उपचार करने से शुरुआत में फसल को बीमारी से बचाने में मदद मिल सकती है. 1 किलो बीज में 2.5 ग्राम साफ पाउडर मिलाकर बीज को उपचारित किया जाता है. एक बीघे में करीब 10 से 12 किलो बीज लग जाता है. बारिश के मौसम में खेत में पानी बिल्कुल नहीं रुकना चाहिए. मेड बनाकर पालक की बुवाई करने से पानी की निकासी बेहतर रहती है और फसल को नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है.

कुंवर दास बताते हैं कि पालक के बीच बड़े बड़े घास निकल आए हैं और वह खुद खेत में जाकर इन्हें उखाड़ रहे हैं. अगर समय पर घास नहीं निकाली जाए तो इसका असर पालक की पैदावार पर पड़ सकता है. खेती ही मेरे परिवार का सहारा है. इसलिए सुबह से शाम तक खेत में मेहनत करता हूं. पालक की फसल में लगातार देखभाल करनी पड़ती है. छोटी सी लापरवाही भी किसान को नुकसान पहुंचा सकती है.

कुंवर दास बताते हैं कि मेरी उम्र 60 साल हो चुकी है, लेकिन मैं आज भी खेती में दिनभर लगा रहता हूं. सुबह खेत पहुंचने के बाद फसल की देखभाल करता हूं और जरूरत के हिसाब से घास भी निकालता हूं. खेती आसान काम नहीं है. मौसम खराब हो तो फसल का नुकसान होता है और भाव गिर जाए तो कमाई पर असर पड़ता है. फिर भी खेती ही परिवार का सहारा है. अच्छी फसल और अच्छा भाव मिले तो किसान लाखों रुपये तक कमा सकता है.

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वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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