अंबाला: ‘डॉक्टर साहब, आप वापस कब आओगे?’, नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच तीन दिन तक लोगों का इलाज करने के बाद जब अंबाला के डॉक्टर लौटने लगे, तो वहां के पीड़ितों ने यही सवाल किया था. दरअसल यह सवाल सिर्फ एक डॉक्टर से नहीं, बल्कि उस उम्मीद से था, जो आपदा के बीच फिलाडेल्फिया अस्पताल अंबाला की मेडिकल टीम ने लोगों के दिलों में जगाई थी. अंबाला लौटे डॉक्टरों ने नेपाल के हालात और अपनी सेवा के अनुभव साझा किए तो कई पल ऐसे थे, जिन्हें याद कर उनकी आंखें भी नम हो गईं.
बता दें कि नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बाद फिलाडेल्फिया अस्पताल के पांच डॉक्टरों की टीम 5 सितंबर को नेपाल पहुंची थी. इस दौरान टीम में अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. सुनील कुमार सादिक के साथ चार अन्य डॉक्टर शामिल थे. इस दौरान अपने साथ बड़ी मात्रा में दवाइयां लेकर डॉक्टर सड़क मार्ग से नेपाल के लिए रवाना हुए, जहां कई रास्ते बाढ़ और भूस्खलन के कारण टूट चुके थे.
डॉक्टर खुद गाड़ी चलाकर पहुंचे नेपाल
वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए डॉ. सुनील सादिक ने बताया कि नेपाल में बाढ़ के वीडियो लगातार सामने आ रहे थे. लोगों की हालत देखकर उनके मन में वहां जाकर सेवा करने का विचार आया. ऐसे में उच्च अधिकारियों से बातचीत के बाद नेपाल जाने की व्यवस्था हुई. उन्होंने बताया कि टीम के साथ कोई अलग ड्राइवर नहीं था. डॉक्टरों ने खुद गाड़ी चलाकर कठिन और टूटी सड़कों को पार किया, क्योंकि उनके मन में एक ही बात थी कि किसी तरह प्रभावित लोगों तक पहुंचकर उनका इलाज किया जाए.
वहीं डॉ. सादिक बताते हैं कि टीम ने त्रिशूली बाजार, रसुवा और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगाए थे. वहां बुखार, उल्टी, चोट और दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों की जांच की गई थी. कई लोग चट्टानों की चपेट में आने से घायल थे, जबकि कुछ आपदा के बाद फैल रही बीमारियों से परेशान थे. गंभीर रूप से घायल कई लोगों को रेस्क्यू टीम हेलीकॉप्टर से निचले इलाकों में ले जा चुकी थी, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में रह गए लोगों को भी तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी.
लोगों को दी गई नि:शुल्क दवाइयां
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की टीम ने तीन दिनों तक लगातार मेडिकल कैंप लगाए थे. डॉ. सादिक ने बताया कि इस दौरान करीब ढाई से तीन हजार लोगों तक चिकित्सा सेवा पहुंचाई गई थी और अस्पताल की ओर से ले जाई गई दवाइयां लोगों को निःशुल्क दी गईं. डॉक्टरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात मरीजों की जांच की और जरूरत के अनुसार उपचार व चिकित्सकीय परामर्श दिया. उन्होंने कहा कि वापसी के दिन भारत-नेपाल सीमा पर भी कैंप लगाकर स्थानीय लोगों का इलाज किया गया था.
वहीं डॉ. सादिक ने कहा कि नेपाल में लोगों की पीड़ा देखकर मन बहुत व्यथित हुआ था. उन्होंने कहा, हमने अपनी क्षमता के अनुसार सेवा करने की कोशिश की, लेकिन जो दर्द हमने वहां देखा, उसके सामने लगा कि हम बहुत थोड़ा कर पाए. फिर भी हमारा उद्देश्य था कि नेपाल के लोगों को यह एहसास हो कि वे अकेले नहीं हैं. उन्होंने बताया कि लौटते समय लोगों का बार-बार यही कहना था, ‘डॉक्टर साहब, आप फिर कब आओगे’.
तबाही के पीछे का असल मंजर
उन्होंने कहा कि टीम केवल दवाइयां लेकर नेपाल नहीं गई थी, बल्कि अंबाला के लोगों की प्रार्थनाएं, संवेदनाएं भी अपने साथ लेकर गई थी. उन्होंने बताया कि हर कैंप में यह महसूस हुआ कि समाचारों में दिखाई देने वाली तबाही के पीछे असल में परिवार, बच्चे और ऐसे लोग हैं, जो अपनी जिंदगी को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि आज अंबाला लौटने पर अस्पताल परिसर में सभी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों ने एकत्र होकर नेपाल के पीड़ित परिवारों के लिए विशेष प्रार्थना की है. यदि भविष्य में नेपाल को फिर उनकी जरूरत हुई और बुलाया गया, तो फिलाडेल्फिया अस्पताल की टीम दोबारा सेवा के लिए तैयार रहेगी.












