Last Updated:
Faridabad ki local news : फरीदाबाद के सोतई गांव से बहबलपुर जाने वाली सड़क करीब 2 साल से अधूरी पड़ी है. सड़क पर डली गिट्टी अब उखड़ने लगी है, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है. यह रास्ता 20 से अधिक गांवों को जोड़ता है. ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क, नाली और जोहड़ की समस्याओं पर नगर निगम ध्यान नहीं दे रहा. लोकल 18 से आकाश तेवतिया बताते हैं कि जब से यह गांव नगर निगम में आया है, तब से हालात बहुत खराब हैं. 20 गांवों के लोगों का इस रास्ते से आना-जाना होता है. सड़क की हालत इतनी खराब हो गई है कि अब लोग इस रास्ते से निकलने को तैयार नहीं हैं.
फरीदाबाद. हरियाणा के फरीदाबाद में गांवों की सड़कों की हालत खराब है. फरीदाबाद के सोतई गांव से बहबलपुर गांव वाला रास्ता भी काफी समय से खराब है. यह रास्ता 20 से अधिक गांवों को जोड़ते हुए पलवल तक जाता है. इस रास्ते की हालत कई सालों से खराब है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आने-जाने में काफी परेशानी होती है. कई साल बीत जाने के बाद भी सड़क की मरम्मत नहीं हुई है. ग्रामीणों को अब भी इंतजार है कि आखिर इस सड़क की मरम्मत कब होगी. लोकल 18 से सोतई गांव के निवासी आकाश तेवतिया बताते हैं कि जब से यह गांव नगर निगम में आया है, तब से गांव के हालात बहुत खराब हैं. चलने के लिए रास्ते नहीं हैं. गांव के जोहड़ में पानी भरा हुआ है और वह ओवरफ्लो चल रहा है. नगर निगम के अधिकारी कहते हैं कि यहां विकास कार्य किए जाएंगे, लेकिन जमीन पर कोई विकास कार्य नजर नहीं आ रहा है. जब यहां पंचायत थी और सरपंच थे, तब अच्छे विकास कार्य होते थे.
आकाश तेवतिया बताते हैं कि जिस रोड पर हम खड़े हैं, वह सोतई गांव से बहबलपुर गांव जाने वाला रास्ता है. करीब 2 साल से इस रास्ते पर गिट्टी डली हुई है. अब गिट्टी भी उखड़कर बाहर आने लगी है, लेकिन अभी तक सड़क का काम पूरा नहीं हुआ है. यह रास्ता कई गांवों के लिए मुख्य रास्ता है. इस रास्ते से फतेहपुर बिल्लौच होते हुए पलवल भी जा सकते हैं. करीब 20 गांवों के लोगों का इस रास्ते से आना-जाना होता है. सड़क की हालत इतनी खराब हो गई है कि अब लोग इस रास्ते से निकलने को तैयार नहीं हैं. बाइक फिसलकर गिर जाती है और लोगों को चोट लग जाती है.
कोई नहीं लेता सुध
संदीप कुमार बताते हैं कि गांव से निकलकर शहर या एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए सड़क का होना जरूरी है. जब गांव का ही विकास नहीं हो पा रहा है तो शहर स्मार्ट सिटी कैसे बनेगा. फरीदाबाद स्मार्ट सिटी में आता है, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हुआ है. 2 साल से इस रास्ते पर केवल गिट्टी पड़ी हुई है. यह रास्ता अभी तक नहीं बना है. संदीप कुमार बताते हैं कि गांव में नालियों की सफाई नहीं होती है. यहां सफाई कर्मचारी भी नहीं हैं. पार्षद भी गांव की सुध नहीं लेता है. गांव के जोहड़ में भी कोई काम नहीं हुआ है. लोगों की सबसे बड़ी समस्या नाली और तालाब की है.
जबरदस्ती ने बढ़ाई दिक्कत
साफ-सफाई नहीं होने की वजह से दुर्गंध बनी रहती है. किसान नेता बबलू हुड्डा बताते हैं कि साल 2022 में जब हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर थे, तब 24 गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया था. सरकार ने जबरदस्ती इन गांवों को नगर निगम में लिया है. यहां जो पार्षद हैं, उनका विकास की तरफ कोई ध्यान नहीं है. 2047 विकसित भारत की बात होती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की बात करते हैं. यह गांव पृथला विधानसभा क्षेत्र में आता है. यहां से रघुवीर सिंह तेवतिया विधायक हैं और वह कांग्रेस पार्टी से हैं. पहले मनोहर लाल खट्टर के समय पक्ष और विपक्ष के विधायकों को बराबर बजट दिया जाता था. फिर सैनी सरकार को क्या दिक्कत है.
‘एक रुपया नहीं मिलेगा’
बबलू हुड्डा बताते हैं कि कल विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया से बात हुई थी. विधायक ने विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया है. विकास कार्यों के लिए एक साल में एक करोड़ रुपये दिए जाते हैं. लेकिन विधायक को कह दिया गया कि एक रुपये भी नहीं मिलेगा. विधायक को 3 साल हो गए हैं, लेकिन 3 साल में ग्रांट नहीं दी जा रही है. बबलू हुड्डा बताते हैं कि विधायक को करीब 70 हजार वोट मिले हैं. यह पैसा जनता का है और सत्ता भी जनता की है. फरीदाबाद साल 2014 में ही स्मार्ट सिटी में शामिल हो चुका है, लेकिन गांवों की जमीनी स्थिति देखने पर तस्वीर कुछ और ही नजर आती है.
बबलू हुड्डा कहते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह भी गांवों के विकास की बात करते थे. विकास का रास्ता गांवों से होकर निकलता है. इस देश के लिए अगर कोई खिलाड़ी मेडल लेकर आता है तो वह गांव का बच्चा होता है. देश की सीमाओं पर जो जवान तैनात हैं, उनमें भी गांव के बच्चे बड़ी संख्या में हैं. ऐसे में गांवों की सड़कों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना जरूरी है.
About the Author

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
और पढ़ें










