अंबाला में बनी करोड़ों की ये दवा अब बोत्सवाना में बांटेगी जिंदगी, इस शख्स ने लिखी कामयाबी की नई कहानी

On: September 17, 2026 6:45 PM
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अंबाला: हरियाणा के अंबाला में बनी दवाइयां अब भारत से हजारों किलोमीटर दूर बोत्सवाना के लोगों के इलाज में मदद करेंगी. दरअसल भारत सरकार ने मंगलवार को बोत्सवाना के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को सहयोग देने के उद्देश्य से एचआईवी/एड्स के इलाज के लिए करीब 10 टन एंटीरेट्रोवायरल दवाइयां भेजीं थी. खास बात यह है कि इन दवाइयों का निर्माण अंबाला स्थित Mcneil & Argus Pharmaceuticals Limited ने किया है और इस उपलब्धि ने कंपनी के साथ-साथ अंबाला के फार्मा उद्योग को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है.

इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दवाइयां भारत सरकार की ओर से खरीदकर बोत्सवाना को सहायता के तौर पर भेजी गई हैं और कंपनी के चेयरमैन डॉ. भाई जी.डी. छिब्बर, जिन्हें गुरुदेव दत्त छिब्बर के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने इसे भारत के लिए गर्व का विषय बताया है.

बोत्सवाना को भेजी करोड़ों की दवाइयां
वहीं चेयरमैन डॉ. भाई जी.डी. छिब्बर ने लोकल 18 को बताया कि जिस तरह पहले अमेरिका जैसे देशों से दवाइयों की आपूर्ति होती थी, अब भारत भी दूसरे देशों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. वहीं गुरुदेव दत्त छिब्बर की उम्र 73 वर्ष है और इस उम्र में भी वह अपने फार्मा कारोबार को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने बताया कि बोत्सवाना को भेजी गई दवाइयां करोड़ों रुपये मूल्य की हैं.

मंजूरी मिलने के बाद ही दवाइयों की आपूर्ति
उनके अनुसार, यह केवल व्यापारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक उपचार पहुंचाने और भारत-बोत्सवाना के संबंधों को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने बताया कि इन दवाइयों को बोत्सवाना भेजने से पहले वहां निर्धारित गुणवत्ता मानकों और आवश्यक परीक्षणों की प्रक्रिया पूरी की गई थी और फिर मंजूरी मिलने के बाद ही दवाइयों की आपूर्ति की गई. उन्होंने कहा कि इन दवाइयों का उद्देश्य बोत्सवाना के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को सहयोग देना और एचआईवी/एड्स से प्रभावित लोगों तक आवश्यक उपचार पहुंचाने में मदद करना है.

भारत के विदेश मंत्री ने किया ट्विट
उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि का उल्लेख भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किया. उन्होंने पोस्ट में बताया कि बोत्सवाना के पब्लिक हेल्थ सिस्टम को सहयोग देने के लिए 10 टन एंटीरेट्रोवायरल दवाइयां भेजी गई हैं. उन्होंने इसे ‘ग्लोबल साउथ’ के साझेदार देशों के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता से जोड़ा ओर पोस्ट में दवाइयों की तस्वीर भी साझा की गई हैं.

उन्होंने कहा कि बोत्सवाना दक्षिणी अफ्रीका में स्थित देश है और दुनिया के प्रमुख हीरा उत्पादक देशों में शामिल है,उसकी अर्थव्यवस्था में हीरा उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है. ऐसे देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र तक अंबाला में निर्मित दवाइयों का पहुंचना स्थानीय फार्मा उद्योग के लिए भी खास उपलब्धि मानी जा रही है.

सीमित संसाधनों के बीच खड़ी की कंपनी
वहीं गुरुदेव दत्त छिब्बर की सफलता की कहानी भी कम प्रेरणादायक नहीं है, क्योंकि एक छोटे किसान परिवार से निकलकर उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच अपनी कारोबारी यात्रा शुरू की थी. करीब 30 वर्ष पहले छोटे स्तर से शुरू हुआ, उनका कारोबार आज करोड़ों रुपये की दवाइयों के निर्माण और आपूर्ति तक पहुंच चुका है. शुरुआती दौर में वह अपनी कंपनी की पहचान बनाने के लिए देशभर में घूमते थे. मेहनत, गुणवत्ता और लगातार प्रयासों के बल पर उन्होंने कंपनी को स्थापित किया.

कोविड-19 महामारी के दौरान भी उनकी कंपनी को कोविड वैक्सीन की आपूर्ति के लिए सरकार से मंजूरी मिली थी. आज कंपनी में हजारों लोग काम करते हैं और यहां बड़ी मात्रा में दवाइयों का निर्माण होता है. अंबाला की यह उपलब्धि बताती है कि स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ कारोबार किस तरह अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग का हिस्सा बन सकता है.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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