‘सब कुछ छोड़ सकता हूं, हॉकी नहीं’… मां से कही ये बात, अब बेटा एशियन गेम्स में जीतकर आया गोल्ड

On: October 5, 2026 2:23 AM
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सोनीपत: एशियन गेम्स में भारतीय हॉकी टीम के स्वर्ण पदक जीतते ही सोनीपत के अभिषेक नैन के घर में खुशियों की लहर दौड़ गई. जीत से पहले मां सूरत देवी से फोन पर हुई बातचीत में अभिषेक ने भरोसे के साथ कहा था कि वह सोना जीतने के लिए पूरी ताकत लगा देंगे. मां ने भी उसे आशीर्वाद देते हुए मैदान में उतरने के लिए हौसला दिया था. बेटे के वादा पूरा करते ही परिवार ने जमकर जश्न मनाया और घर पर पटाखे जलाए.

अभिषेक की मां सूरत देवी ने कहा कि एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली पूरी भारतीय टीम बधाई की पात्र है. बेटियों के बाद बेटों ने भी देश के लिए सोना जीतकर गौरव बढ़ाया है. उन्होंने बताया कि अभिषेक ने तीसरी कक्षा से ही हॉकी खेलना शुरू कर दिया था. खेल के साथ पढ़ाई में भी वह दसवीं और बारहवीं तक बेहतर प्रदर्शन करता रहा. बचपन से ही उसका सपना भारतीय हॉकी टीम की जर्सी पहनना था, जिसे उसने पूरा कर दिखाया.

पेड़ से गिर गए थे अभिषेक
उन्होंने बताया कि अभिषेक का खेल के प्रति जुनून बचपन से ही रहा. करीब 11 वर्ष की उम्र में जामुन के पेड़ से गिरने पर उसे गंभीर चोट लगी और दस से अधिक टांके आए. परिवार ने हॉकी खेलने से रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने अभ्यास नहीं छोड़ा. प्रशिक्षक शमशेर ने भी परिवार को समझाया और अभिषेक को दोबारा मैदान पर लौटने के लिए प्रेरित किया.

मां ने कहा, ‘बेटा कहता था सब कुछ छोड़ सकता हूं, हॉकी नहीं. पांचवीं कक्षा में वह शहर के सीआरजेड विद्यालय के छात्रावास में रहकर अभ्यास करने लगे थे. एक राज्य स्तरीय मुकाबले में उन्होंने इतनी मेहनत से खेला कि एक ही मैच में उनकी तीन हॉकी स्टिक टूट गई थी. उस समय मैदान में मौजूद दर्शकों ने भी कहा था कि यह खिलाड़ी आगे जरूर जाएगा.’

ओलंपिक में खेलने का था सपना
मां ने कहा कि साल 2016 में जूनियर शिविर में चयन नहीं होने से अभिषेक को झटका लगा और विश्व कप खेलने का सपना भी उस समय अधूरा रह गया. इसके बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा. प्रतिदिन सुबह ट्रेन से दिल्ली जाते और अभ्यास के बाद रात को वापस लौटते थे. उनका सपना साफ था कि एक दिन ओलंपिक में देश के लिए खेलना है. बेटे ने जीत से पहले उनसे बात की थी और पूरा आत्मविश्वास जताया था. उन्होंने भी भगवान से उसके लिए दुआ की थी और अब उसकी जीत के रूप में उसका फल मिला है.

परिजन जगदीश चंद्र ने बताया कि अभिषेक सुबह पांच बजे ही अभ्यास के लिए निकल जाते थे. सर्दी हो, गर्मी या बारिश, उनके अभ्यास का सिलसिला कभी नहीं रुका. परिवार के समारोहों में भी वह कम ही शामिल होते थे. उनका पूरा ध्यान हॉकी पर रहता था.

बेटे को पसंद है हाथ का चूरमा
वहीं अभिषेक के पिता सत्यनारायण ने बताया कि बेटे ने कठिन परिस्थितियों में भी अभ्यास जारी रखा. प्रशिक्षक शमशेर ने हमेशा उसे आगे बढऩे की प्रेरणा दी. उन्होंने कहा कि अभिषेक ने मेहनत के दम पर अपना लक्ष्य हासिल किया है. मां सूरत देवी ने बताया कि अभिषेक को उनके हाथ का बना चूरमा बेहद पसंद है. चोटों के कारण परिवार कई बार उसे हॉकी छोडऩे के लिए कहता था, लेकिन वह अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटा.

अभिषेक की शादी को लेकर क्या बोले पिता?
पिता सत्यनारायण ने बताया कि परिवार में अभिषेक के बड़े भाई आशीष, उनकी पुत्रवधू और पोता हैं. अभिषेक की शादी को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फिलहाल बेटा शादी के लिए तैयार नहीं है. उसका लक्ष्य 2028 ओलंपिक पर है और वह इसके बाद ही शादी करने की बात कहता है. एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद परिवार अब अभिषेक के लौटने का इंतजार कर रहा है. परिजनों ने उसके स्वागत की तैयारियां शुरू कर दी हैं. घर में जश्न का माहौल है और परिवार को उम्मीद है कि अभिषेक आने वाले मुकाबलों में भी देश का नाम रोशन करता रहेगा.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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