करवा चौथ पर भद्रा का साया या पूजा में कोई बाधा नहीं, जानें शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का समय

On: October 26, 2026 2:43 PM
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अंबालाः करवा चौथ पर व्रत रखने की तैयारी कर रही महिलाओं के मन में इस बार भद्रा को लेकर सवाल उठ रहे हैं. दरअसल किसी को व्रत की तारीख को लेकर असमंजस है, तो कोई पूजा के शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय के समय की जानकारी जुटा रहा है. ऐसे में महिलाओं के लिए यह जानना जरूरी है कि भद्रा का समय कब है और करवा चौथ की पूजा किस समय करनी चाहिए. बता दे कि ज्योतिष आचार्य की माने तो भद्रा को लेकर महिलाओं को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि भद्रा 28 अक्टूबर की रात को है, जबकि 29 अक्टूबर को महिलाएं करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं.महिलाओं को किसी भी तरह के भ्रम में न पड़ने और व्रत से जुड़ी जानकारी पंचांग के अनुसार देखें.

जाने मुहुर्त का सही समय

वही इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए पंडित आरके शर्मा ने बताया कि करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला पर्व है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं.परंपरा के अनुसार, व्रत वाले दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सरगी ग्रहण करती हैं. इसके बाद दिनभर उपवास रखा जाता है और शाम को करवा चौथ की पूजा तथा कथा की जाती है. रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं. उन्होंने कहा कि करवा चौथ पर पूजा के शुभ समय को लेकर भी महिलाओं में उत्सुकता बनी हुई है, ओर 29 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 48 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक पूजा करने और करवा चौथ की कथा सुनने का समय बताया गया है.

हालांकि, पूजा का सही मुहूर्त स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार सत्यापित करना जरूरी है. उन्होंने बताया कि करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा के निकलने का इंतजार सबसे खास माना जाता है, इसलिए रात 8 बजकर 15 मिनट के बाद चांद निकलने की संभावना जताई जा रही हैं.चंद्रमा के दर्शन होने पर महिलाएं छलनी से चंद्रमा को देखती हैं, अर्घ्य देती हैं और अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत तथा सुखी जीवन की कामना करती हैं, इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है.चंद्रोदय का समय अलग-अलग शहरों में बदल सकता है, इसलिए महिलाओं को अपने क्षेत्र के अनुसार समय की पुष्टि कर लेनी चाहिए.

पंजाब में इस परंपरा से शुरू होती है करवा चौथ

पंजाब में करवा चौथ की शुरुआत सरगी की परंपरा के साथ होती है, सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाइयां और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं. महिलाएं सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत शुरू करती हैं। शाम के समय सोलह श्रृंगार करके महिलाएं पूजा-अर्चना करती हैं. कई स्थानों पर फेरी की रस्म भी निभाई जाती है, जिसमें महिलाएं एक घेरे में बैठकर पूजा की थाली एक-दूसरे को देती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं. वहीं, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई क्षेत्रों में गौर माता की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है.करवा चौथ पर छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं इस रस्म के माध्यम से अपने पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं, व्रत खोलते समय पति द्वारा पत्नी को पानी पिलाने और मिठाई खिलाने की रस्म को भी प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है.इस परंपरा का भाव यही है कि पति-पत्नी जीवनभर एक-दूसरे का ख्याल रखें और उनके रिश्ते में प्रेम तथा मिठास बनी रहे.करवा चौथ केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है. ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को तारीख, भद्रा और पूजा के मुहूर्त को लेकर सही जानकारी हासिल करनी चाहिए, ताकि वे बिना किसी असमंजस के अपनी धार्मिक परंपराएं निभा सकें.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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