फरीदाबाद: फरीदाबाद समेत पूरे दिल्ली-NCR में प्रदूषण ने लोगों का दम निकालना शुरू कर दिया है. हालात ऐसे हैं कि धूप निकलने के बावजूद आसमान में धुंध छाई हुई है और लोगों को साफ हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है. हैरानी की बात यह है कि दिवाली से पहले ही हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है. आज 7 नवंबर को फरीदाबाद का औसत AQI करीब 434 से 437 दर्ज किया गया है, जो गंभीर श्रेणी में आता है. PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक कणों की मात्रा सामान्य से कई गुना अधिक है.
सेक्टर-30, सेक्टर-11 और NIT जैसे इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा हुआ है. इसका असर अब आम लोगों की दिनचर्या पर भी दिखाई देने लगा है. स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों से लेकर रोजाना ऑफिस जाने वाले लोगों और सांस के मरीजों तक को परेशानी हो रही है. लोगों को डर है कि दिवाली पर पटाखे जलने के बाद स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है. हालांकि दिल्ली एनसीआर में पटाखे बैन हैं.
गले में खराश और सांस लेने में परेशानी
ओमदत्त शर्मा बताते हैं कि मैं रोजाना काम के सिलसिले में घर से बाहर निकलता हूं, लेकिन इन दिनों प्रदूषण की वजह से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है. आज प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा खराब स्थिति में पहुंच चुका है, जबकि दिवाली अभी आई भी नहीं है. अभी से गले में खराश और सांस लेने में परेशानी महसूस होने लगी है. मैं देख रहा हूं कि धूप निकलने के बावजूद आसमान में धुंध छाई हुई है.
उन्होंने कहा कि यह सामान्य धुंध नहीं, बल्कि प्रदूषण है. बिना मास्क के बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है. आने वाले दिनों में दिवाली के बाद हालात और बिगड़ सकते हैं. इसका सबसे ज्यादा असर बीमार लोगों, बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ेगा. बेजुबान जानवरों को भी इस प्रदूषण की मार झेलनी पड़ेगी.
दिवाली से पहले ही हवा खराब
वर्षा बताती हैं कि मैं फरीदाबाद के सेक्टर-75 में रहती हूं और रोजाना घर से बाहर निकलती हूं. इन दिनों प्रदूषण की वजह से गले में खराश और जलन की समस्या हो रही है. सांस लेने में भी काफी परेशानी महसूस होती है. हर साल दिवाली के आसपास इसी तरह के हालात बन जाते हैं, लेकिन इस बार दिवाली से पहले ही हवा इतनी खराब हो चुकी है.
मैं देख रही हूं कि दिन में धूप निकलने के बावजूद चारों तरफ धुंध छाई रहती है. शाम होते ही विजिबिलिटी भी काफी कम हो जाती है. ऐसे में बाजार जाना और जरूरी सामान खरीदना भी मुश्किल हो रहा है. कई बार सब्जी लेने तक बाहर नहीं जा पाते हैं. घर से निकलना जरूरी हो तो सुरक्षा के लिए मास्क लगाना पड़ता है. प्रदूषण की वजह से काफी घुटन और जलन महसूस होती है.
मास्क लगाकर निकलना मजबूरी
अनिरुद्ध बताते हैं कि मैं फरीदाबाद में रहता हूं और प्रॉपर्टी की सेल, परचेज और किराये का काम करता हूं. इस काम के सिलसिले में मुझे रोजाना अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ता है. रास्ते में इतना ज्यादा प्रदूषण है कि मास्क लगाकर निकलना मजबूरी बन गया है. मैं देख रहा हूं कि सर्दियां शुरू होने के साथ ही प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है. दिवाली पर लोग पटाखे भी जला रहे हैं, जिससे परेशानी और बढ़ सकती है.
पटाखे जलाने पर कोई रोक-टोक दिखाई नहीं देती. बड़े-बड़े पटाखों के साथ लोग कई तरह से बारूद जलाते हैं. कुछ लोग पेट्रोल डालकर भी आग लगाते हैं, जिससे धुआं और प्रदूषण फैलता है. मैं मानता हूं कि त्योहार मनाना सबका अधिकार है, लेकिन पटाखे जलाने की एक सीमा होनी चाहिए. अगर अभी से प्रदूषण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में आम लोगों को और ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.










