अंबाला. अगर आपका बच्चा भी खेलों में रुचि रखता है और आप उसके भविष्य को लेकर चिंतित हैं, तो रोलर स्केटिंग उसके लिए करियर का एक अच्छा विकल्प बन सकती है. विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए खेल न सिर्फ आत्मविश्वास बढ़ाने का माध्यम बन रहे हैं, बल्कि उन्हें जिला, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका भी दे रहे हैं. अंबाला छावनी के सुभाष पार्क स्थित स्केटिंग रिंक पर स्पेशल बच्चे नियमित रूप से ट्रेनिंग लेकर अपने सपनों को नई उड़ान देने में जुटे हैं. सुभाष पार्क में वात्सल्य स्पेशल चाइल्ड स्कूल से जुड़े स्केटिंग कोच चंद्रराज शर्मा विशेष जरूरतों वाले बच्चों को नियमित रूप से अभ्यास करवाते हैं. यहां बच्चों को स्केटिंग की बारीकियां सिखाने के साथ उनकी क्षमता, संतुलन और आत्मविश्वास को निखारने पर भी ध्यान दिया जाता है.
सबसे पहले करें ये काम
लोकल 18 से कोच चंद्रराज शर्मा बताते हैं कि विशेष बच्चों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए उचित मौका और प्रोत्साहन मिलना चाहिए. इन बच्चों को अलग नजर से देखने के बजाय उनके हुनर को पहचानने और आगे बढ़ने में मदद करने की जरूरत है. अगर आप अपने बच्चे को रोलर स्केटिंग में आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो सबसे पहले उसकी रुचि और क्षमता को समझें. इसके बाद किसी अनुभवी कोच की देखरेख में ट्रेनिंग शुरू करवाएं. विशेष जरूरतों वाले बच्चों के मामले में बच्चे की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण और सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है.
कोच चंद्रराज शर्मा के मुताबिक नियमित अभ्यास, सही तकनीक, अनुशासन और माता-पिता का सहयोग बच्चे को आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं. शुरुआत में स्थानीय स्तर पर अभ्यास और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के जरिए अनुभव हासिल किया जा सकता है. इसके बाद कोच के मार्गदर्शन में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के अवसर तलाशे जा सकते हैं. पैरा स्केटिंग में आगे बढ़ने के इच्छुक परिवार संबंधित खेल संस्थाओं से पात्रता, वर्गीकरण और प्रतियोगिताओं की जानकारी भी ले सकते हैं.
पदक लाने पर 45 लाख
कोच चंद्रराज शर्मा के अनुसार, उनके प्रशिक्षण से जुड़े एक विशेष बच्चे ने वर्ष 2023 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता था. इसके बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री की ओर से उस खिलाड़ी को 45 लाख रुपये दिए गए. तांशु ने वर्ष 2025 में आइस स्केटिंग की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो पदक जीते और केंद्र सरकार की ओर से उन्हें 14 लाख रुपये दिए गए. ये उपलब्धियां दिखाती हैं कि विशेष जरूरतों वाले बच्चों को अगर सही प्रशिक्षण, निरंतर अभ्यास और आगे बढ़ने का मौके मिले, तो वे खेलों में उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं.
आगे बढ़ने का नया रास्ता
स्पेशल चाइल्ड गुरुवंश की मां ज्योति बताती हैं कि उनका बेटा जन्म से ही विशेष जरूरतों वाला है. एक समय ऐसा था, जब लोग उनके बच्चे की क्षमताओं पर सवाल उठाते थे और कहते थे कि वह जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएगा. ऐसी बातों से परिवार को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने बेटे का हौसला बनाए रखा. ज्योति के अनुसार, स्केटिंग ने उनके बेटे को आगे बढ़ने का नया रास्ता दिया है. कोच ने बच्चों को ऐसा मंच दिया है, जहां वे अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं और दूसरे बच्चों के साथ सीख सकते हैं. बच्चे रोजाना कई घंटे अभ्यास करते हैं और माता-पिता भी उन्हें आगे बढ़ाने के लिए मेहनत कर रहे हैं. स्पेशल चाइल्ड माधव शर्मा की मां खुद साइंस टीचर हैं. उनका कहना है कि विशेष जरूरतों वाले बच्चों को समझने और उन्हें सही दिशा देने के लिए धैर्य, समय और मेहनत की जरूरत होती है.









