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Ground Report Faridabad : फरीदाबाद के किसान इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं. धान की बुवाई के बीच न समय पर बारिश हो रही है, न तय समय तक बिजली मिल रही है. रात में सिंचाई करना मजबूरी बन गया है. किसानों का कहना है कि लगातार बिजली कटौती, बढ़ती लागत और मजदूरों की कमी से धान की फसल पर संकट गहराता जा रहा है. लोकल 18 से दयालपुर गांव के किसान अनार सिंह बताते हैं कि सुबह भी तय समय से पहले बिजली काट दी जाती है. संजीव बैंसला बताते हैं कि मैं 14 साल की उम्र से खेती कर रहा हूं. इस बार सबसे बड़ी परेशानी बारिश और बिजली दोनों की है. डीग गांव के किसान महादेव ऋषि देव बताते हैं कि धान की फसल में ज्यादा पानी चाहिए. जब बिजली ही पूरी नहीं मिलेगी तो सिंचाई कैसे होगी.
फरीदाबाद. पहले आसमान की तरफ नजर जाती थी, अब बिजली की लाइन की तरफ. फरीदाबाद के किसान इन दिनों इसी चिंता में दिन-रात गुजार रहे हैं. धान की बुवाई का समय चल रहा है और इस फसल को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है, लेकिन न समय पर बारिश हो रही है और न ही तय समय तक बिजली मिल रही है. खेतों में पानी नहीं पहुंच रहा है तो किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है. रात के अंधेरे में खेतों तक जाना मजबूरी बन गया है. कोई आवारा कुत्तों से डर रहा है तो किसी को सांप का डर सता रहा है. ऊपर से घंटों का बिजली कट किसानों की परेशानी को और बढ़ा रहा है. किसानों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो धान की फसल पर सीधा असर पड़ सकता है.
एक एकड़ में 30 हजार से ज्यादा खर्च
लोकल 18 से दयालपुर गांव के किसान अनार सिंह बताते हैं कि मैं 10 एकड़ में खेती कर रहा हूं. धान की बिजाई चल रही है, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी बिजली की है. सरकार कागजों में रात 2:30 बजे से सुबह 10 बजे तक 8 घंटे बिजली देने की बात करती है, लेकिन हकीकत में बिजली करीब 3 बजे आती है और बीच-बीच में दो से तीन घंटे का ब्रेकडाउन हो जाता है. सुबह भी तय समय से पहले बिजली काट दी जाती है. धान की खेती में पानी बहुत जरूरी है, ऐसे में पूरी सिंचाई नहीं हो पाती. रात 2:30 बजे खेत पर जाना पड़ता है, जहां रास्ते में आवारा कुत्ते और सांप का खतरा बना रहता है. लेबर भी समय पर नहीं मिल रही. बिहार से मजदूर बुलाए हैं, जो एक एकड़ का ठेका करीब 5 हजार रुपये में ठेका लेते हैं. एक एकड़ धान लगाने में 25 से 30 हजार रुपये तक खर्च आ जाता है.
संजीव बैंसला बताते हैं कि मैं 14 साल की उम्र से खेती कर रहा हूं. इस बार सबसे बड़ी परेशानी बारिश और बिजली दोनों की है. जितनी बारिश इस समय होनी चाहिए थी उतनी नहीं हो रही. बिजली भी लगातार नहीं मिल रही. पुरानी तारों की वजह से बार-बार फॉल्ट हो जाता है और दो-तीन घंटे तक बिजली बंद रहती है. खेत का पानी खत्म हो जाता है, फिर दोबारा सिंचाई करनी पड़ती है. अगर लगातार 8 घंटे बिजली मिले तो किसानों को काफी राहत मिल सकती है. अच्छी बारिश हो जाए तो दो घंटे में भी पानी की जरूरत पूरी हो सकती है.
मजदूर मिलना और मुश्किल
संमजदूर मिलना और मुश्किल जीव बैंसला बताते हैं कि फरीदाबाद में ज्यादातर किसान धान इसलिए लगाते हैं क्योंकि यहां कई खेत पट्टे पर लिए जाते हैं. एक एकड़ का पट्टा करीब 50 हजार रुपये तक है. सब्जियों की खेती यहां ज्यादा सफल नहीं होती क्योंकि आसपास फैक्ट्री एरिया है. पहले गांव में ही मजदूर मिल जाते थे, लेकिन अब ज्यादातर लोग फैक्ट्रियों में काम करने लगे हैं. बिहार से मजदूर बुलाने पड़ रहे हैं. जो मजदूर पिछले 25 साल से आते रहे हैं, अब उनके बच्चे भी खेती में काम करने नहीं आ रहे. आने वाले समय में खेतों के लिए मजदूर मिलना और मुश्किल हो सकता है. धान में करीब 30 हजार रुपये की लागत आती है और अगर पैदावार अच्छी हो जाए तो 20 से 25 हजार रुपये तक की बचत होती है, लेकिन बढ़ती महंगाई में यह भी कम पड़ रही है.
लाखों रुपये का खर्च खतरे में
डीग गांव के किसान महादेव ऋषि देव बताते हैं कि कभी 5 घंटे बिजली आती है कभी 4 घंटे, लेकिन पूरे 8 घंटे बिजली शायद ही मिलती हो. धान की फसल में ज्यादा पानी चाहिए. जब बिजली ही पूरी नहीं मिलेगी तो सिंचाई कैसे होगी. किसानों का कहना है कि अगर समय पर बिजली और बारिश नहीं मिली तो धान की फसल पर असर पड़ना तय है और मेहनत के साथ-साथ लाखों रुपये का खर्च भी खतरे में पड़ सकता है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें










