प्रमुख बाजारों में औसत प्रॉपर्टी रियलाइजेशन FY27 की पहली तिमाही में बढ़कर ₹9,629 प्रति वर्ग फुट हो गया, जो साल-दर-साल 6% अधिक है. हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 2% की गिरावट दर्ज की गई. रियलाइजेशन में बढ़ोतरी ने अपेक्षाकृत कमजोर बिक्री वॉल्यूम के असर को कम किया. इसके चलते कुल बिक्री मूल्य में सालाना आधार पर 9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
बिक्री का वॉल्यूम सीमित दायरे में रहा
FY27 की पहली तिमाही में पूरे भारत में घरों की बिक्री 247 मिलियन वर्ग फुट रही, जो साल-दर-साल 3% बढ़ी, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 3% की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, नए प्रोजेक्ट्स के लॉन्च में तेज गिरावट आई और यह 242 मिलियन वर्ग फुट रह गया, जो साल-दर-साल 14% और तिमाही-दर-तिमाही 16% कम है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में रियल एस्टेट इंडस्ट्री की ग्रोथ मुख्य रूप से प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी से आई है. ऐसे में बिक्री वॉल्यूम में लगातार सुधार बाजार में वास्तविक मांग की मजबूती का बेहतर संकेत होगा.
एनसीआर में बिक्री वॉल्यूम में सबसे बड़ी गिरावट
रिपोर्ट बताती है कि एनसीआर (NCR) बिक्री वॉल्यूम के मामले में कमजोर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में से एक रहा. क्षेत्र में आवासीय बिक्री सालाना आधार पर 27% और तिमाही आधार पर 8% घटकर 23.5 मिलियन वर्ग फुट रह गई, जबकि नई लॉन्चिंग 21.2 मिलियन वर्ग फुट रही. इसके मुकाबले, एमएमआर (MMR) में 41.5 मिलियन वर्ग फुट की बिक्री दर्ज की गई, जिसे 33.8 मिलियन वर्ग फुट की नई लॉन्चिंग का समर्थन मिला. बेंगलुरु में 30.7 मिलियन वर्ग फुट और हैदराबाद में 34.3 मिलियन वर्ग फुट की बिक्री दर्ज की गई. हैदराबाद में नई लॉन्चिंग 55.5 मिलियन वर्ग फुट रही.
बिना बिकी इन्वेंट्री में मामूली बढ़ोतरी
बेंगलुरु, हैदराबाद और NCR में अनसोल्ड इन्वेंट्री में तिमाही आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसकी एक वजह नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग भी रही. पूरे भारत में जून 2026 तक अनसोल्ड रेजिडेंशियल स्टॉक 0.8 बिलियन वर्ग फुट रहा, जो पिछले 12 महीनों की बिक्री के आधार पर करीब 1.9 साल की इन्वेंट्री के बराबर है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रेजिडेंशियल रियल एस्टेट का बिक्री वॉल्यूम लगातार तीन साल से सीमित दायरे में बना हुआ है. हालांकि, बड़े डेवलपर्स नए शहरों और क्षेत्रों में विस्तार यानी जियोग्राफिकल डाइवर्सिफिकेशन के जरिए अपनी मार्केट हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं.
क्या कह रहे डेवलपर्स
इस रिपोर्ट पर जेएमएस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर पुष्पेंद्र सिंह ने कहा, “गुरुग्राम और नोएडा जैसे बाजारों में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी किसी सामान्य या अस्थायी तेजी के बजाय एक बड़े और स्थायी बदलाव को दिखाती है. इस डेटा की सबसे अहम बात यह है कि इसी अवधि में रेंटल यील्ड में 80 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई है. यानी खरीदारों को प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी का फायदा लेने के लिए किराये से मिलने वाले रिटर्न से समझौता नहीं करना पड़ा. इन माइक्रो-मार्केट्स में काम करने वाले डेवलपर्स के लिए यह इस बात का मजबूत संकेत है कि गुरुग्राम की ग्रोथ सिर्फ कीमतों में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे मजबूत और स्थायी मांग भी है.’
बीपीटीपी लिमिटेड के प्रेसिडेंट और सीईओ, मानिक मलिक का कहना है कि आज घर खरीदने वाले मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी और अच्छे सोशल इकोसिस्टम वाले इलाकों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे लंबे समय में प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ती है. साथ ही, रेंटल यील्ड में सुधार एंड-यूजर्स की मांग और निवेशकों के भरोसे के बीच एक अच्छा संतुलन दिखाता है. गुरुग्राम, नोएडा और फरीदाबाद जैसे बाजार इस ट्रेंड का फायदा उठा रहे हैं, जिसे लगातार हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, क्वालिटी डेवलपमेंट और खरीदारों की बदलती उम्मीदों से समर्थन मिल रहा है.
पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरिवाल कहते हैं कि देशभर के अलग-अलग शहरों के आंकड़े रियल एस्टेट बाजार में लगातार बढ़ोतरी का संकेत दे रहे हैं, वहीं हमारा फोकस खास तौर पर गुरुग्राम के रियल एस्टेट बाजार पर है, जो तेजी से आगे बढ़ रहा है. खरीदार अब भरोसेमंद ब्रांड्स के बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं. वहीं, गुरुग्राम का कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर भी मजबूत बना हुआ है, जिसे ग्रेड-A ऑफिस स्पेस और प्रीमियम रिटेल हब की मजबूत मांग से समर्थन मिल रहा है.
ग्रोथ की रफ्तार बनी रहने की उम्मीद
रिपोर्ट के मुताबिक, रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन बिक्री में उतनी तेजी नहीं दिख रही है. बड़े और स्थापित बाजारों में कीमतों का स्तर बेहतर बना हुआ है, जबकि बिक्री और नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में कमी आई है. ऐसे में डेवलपर्स नई सप्लाई को लेकर सावधानी बरत सकते हैं और उन्हीं बाजारों व प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं, जहां घर खरीदने वालों की मांग मजबूत और स्पष्ट है.











