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Ambala Temple Story: अंबाला में स्थित श्री शिव मंदिर पीपल वाला की स्थापना करीब 150-200 साल पहले ओम प्रकाश चोपड़ा के पूर्वजों ने करवाई थी. उस समय उनके परिवार में शादी के कई वर्ष बीत जाने के बावजूद संतान नहीं हुई थी, फिर क्या हुआ? आइए इस मंदिर से जुड़ी सारी मान्यता जानते हैं.
अंबाला: संतान की चाह में लोग डॉक्टरों से लेकर धार्मिक स्थलों तक हर जगह उम्मीद लेकर पहुंचते हैं. लेकिन अंबाला शहर में एक ऐसा करीब 150 से 200 साल पुराना शिव मंदिर है, जहां आज भी कई दंपत्ति संतान सुख की कामना लेकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. दरअसल इस मंदिर से जुड़ी कहानी भी बेहद दिलचस्प है, क्योंकि स्थानीय मान्यता के अनुसार, करीब डेढ़ सदी पहले एक दंपत्ति शादी के कई साल बाद भी संतान नहीं होने से परेशान था. तभी एक साधु संत वहां पहुंचे और उन्होंने परिवार को भगवान शिव का मंदिर बनवाने की सलाह दी. इसके बाद पीपल के पेड़ के नीचे शिवलिंग स्थापित कर मंदिर का निर्माण कराया गया.
बता दें कि स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर बनने के बाद उस परिवार में दो पुत्रों का जन्म हुआ. इसके बाद मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती चली गई और धीरे-धीरे दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आने लगे. हालांकि संतान प्राप्ति की यह बात स्थानीय धार्मिक मान्यता है, लेकिन आज भी कई लोग इसे विश्वास के साथ मानते हैं.
ओम प्रकाश चोपड़ा के पूर्वजों ने करवाई थी स्थापना
वही मंदिर के सेवादार सुरेंद्र मल्होत्रा ने लोकल 18 को बताया कि श्री शिव मंदिर पीपल वाला की स्थापना करीब 150-200 साल पहले ओम प्रकाश चोपड़ा के पूर्वजों ने करवाई थी. उस समय उनके परिवार में शादी के कई वर्ष बीत जाने के बावजूद संतान नहीं हुई थी. इसी दौरान दूर से आए एक साधु-संत ने उन्हें भगवान भोलेनाथ का मंदिर बनाने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि इसके बाद पीपल के पेड़ के पास शिवलिंग स्थापित किया गया. उस दौर में छोटी ईंट, मिट्टी और चूने की सहायता से मंदिर का निर्माण कराया गया.
वहीं सुरेंद्र मल्होत्रा के अनुसार, मंदिर बनने के बाद परिवार में दो बेटों का जन्म हुआ. इसके बाद लोगों ने इस स्थान को आस्था से जोड़ना शुरू कर दिया. आज समय बदल चुका है और मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया गया है. अब पुरानी दीवारों पर टाइल्स लगाई गई है, लेकिन मंदिर की पुरानी पहचान अब भी कायम है. यहां मौजूद विशाल पीपल का पेड़ भी इस मंदिर की सबसे खास पहचान में शामिल है.
श्री शिव मंदिर वकीलां वाला क्यों पड़ा नाम?
वही सेवादार बताते हैं कि कुछ समय पहले एक श्रद्धालु की मनोकामना पूरी हुई, तो उसने मंदिर के शिवालय के आसपास करीब पांच किलो चांदी लगवाई. आज भी श्रद्धालु यहां भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामना मांगते हैं. उन्होंने कहा कि यह मंदिर श्री शिव मंदिर वकीलां वाला के नाम से भी प्रसिद्ध है. मंदिर की स्थापना करने वाला परिवार पुराने समय में वकील परिवार था, इसलिए इसका यह नाम भी प्रचलित हुआ.
उन्होंने बताया कि सावन के महीने में इस मंदिर की रौनक और बढ़ जाती है, क्योंकि श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अंबाला पहुंचते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं. उन्होंने कहा कि मंदिर में इस बार 11 अगस्त को 251 लीटर गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा. मंदिर का रखरखाव वर्तमान समय में श्री शिव मंदिर पीपल वाला सेवा मंडल (रजि.) की ओर से किया जा रहा है. सावन और शिवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
मंदिर से जुड़ी नाग देवता की मान्यता
सुरेंद्र मल्होत्रा के अनुसार, इस मंदिर से नाग देवता से जुड़ी मान्यता भी सामने आती है. करीब 11 साल पहले शिवरात्रि के दौरान काले रंग का सांप मंदिर में शिवलिंग के पास आकर बैठ गया था. इसके बाद से मंदिर में नाग देवताओं से जुड़ी तस्वीरें भी लगाई गई हैं. अंबाला शहर के बीचों-बीच मौजूद यह पुराना मंदिर आज भी अपनी प्राचीन बनावट, विशाल पीपल के पेड़ और इससे जुड़ी लोक आस्थाओं के कारण अलग पहचान रखता है. करीब डेढ़ से दो शताब्दी पुरानी इस धार्मिक धरोहर में आज भी सावन के दौरान हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते हैं और श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ से अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…
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