कढ़ी-छोले चावल का लगाते थे ठेला, फिर खड़ी कर दी मर्सिडीज़-BMW की कतार… करोड़ों के खेल का अब खुला राज

On: October 4, 2026 10:20 PM
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हरियाणा में एक ऑनलाइन निवेश रैकेट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसकी कहानी और चौंकाने वाली होती जा रही है. पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में लोगों को कम समय में पैसा कई गुना करने, क्रिप्टोकरेंसी में मोटा मुनाफा कमाने और यहां तक कि दुबई में फ्लैट और प्लॉट दिलाने के सपने दिखाए गए. शुरुआती जांच में ठगी की रकम करीब 8 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा आंकी गई है.

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा राजेश कुमार उर्फ ‘नाना’ की हो रही है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कभी कढ़ी-छोले चावल की रेहड़ी चलाने वाला राजेश आज एक आलीशान फार्महाउस और महंगी कारों का मालिक बन गया है. पुलिस ने मामले की जांच के दौरान उसकी मर्सिडीज कार जब्त की है. इसके अलावा नेटवर्क से जुड़े लोगों की ऑडी क्यू5, ऑडी क्यू3 और बीएमडब्लू जैसी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं. पुलिस अब इन वाहनों को अपराध से अर्जित संपत्ति मानते हुए कोर्ट से उनकी नीलामी की अनुमति लेने की तैयारी में है.

पुलिस के अनुसार, राजेश और उसके साथियों ने हरियाणा के अलग-अलग जिलों में लोगों को निवेश योजनाओं से जोड़ा. इनके खिलाफ यमुनानगर, कैथल, करनाल, अंबाला और कुरुक्षेत्र से शिकायतें सामने आई हैं. खास बात यह है कि इस रैकेट का शिकार सिर्फ कम पढ़े-लिखे लोग ही नहीं हुए, बल्कि अच्छी शिक्षा और पेशेवर लोग भी इसमें पैसा लगाते चले गए.

8500 रुपये से शुरुआत, फिर लगा दी लाखों की रकम

पंचकूला के सरकारी ठेकेदार अशोक कुमार की शिकायत से यह मामला पुलिस की जांच में आया. अशोक के मुताबिक, शुरुआत में उन्हें भी इस निवेश नेटवर्क पर भरोसा नहीं था. लेकिन आयोजकों ने होटल में कार्यक्रम किया, कंपनी के बड़े अधिकारियों के आने की बात कही और निवेश से होने वाले मुनाफे के उदाहरण दिखाए.

अशोक ने पहले करीब 8,500 रुपये लगाए. शुरुआती निवेश पर पैसा वापस मिलने के बाद उनका भरोसा बढ़ गया. इसके बाद उन्होंने साल 2021 में कर्ज लेकर करीब 3.5 लाख रुपये निवेश कर दिए. धीरे-धीरे उनके भाई और रिश्तेदार भी इस नेटवर्क से जुड़ते गए.

अशोक का आरोप है कि इस तरह उनसे करीब 60 लाख रुपये की ठगी हुई. उनका दावा है कि उन्होंने जिन 20-25 लोगों को इस नेटवर्क से जोड़ा था, वे भी बाद में अपना पैसा निकाल नहीं सके. अशोक के मुताबिक, उनके संपर्क में आए लोगों का कुल नुकसान 7-8 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है.

बस मोबाइल ऐप पर बढ़ता रहा पैसा, हाथ रहा खाली

पंचकूला साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क में निवेशकों को मोबाइल ऐप पर लगातार बढ़ता हुआ बैलेंस दिखाया जाता था. स्क्रीन पर रकम तेजी से बढ़ती देखकर निवेशकों को लगता था कि उनका पैसा वास्तव में मुनाफा कमा रहा है.

पुलिस का आरोप है कि इन ऐप्स में आंकड़ों से छेड़छाड़ की जाती थी. यानी निवेशक को स्क्रीन पर लाखों रुपये का फायदा नजर आता था, लेकिन उस रकम को वास्तव में निकालना संभव नहीं था.

जांच में एक ऐसा मामला भी सामने आया है, जिसमें करीब 30 लाख रुपये के निवेश को महज छह महीने में लगभग 68 लाख रुपये तक बढ़ा हुआ दिखाया गया. जब निवेशकों ने रकम निकालने की कोशिश की तो उन्हें बताया गया कि पैसा क्रिप्टोकरेंसी या किसी दूसरी योजना में दोबारा लगा दिया गया है.

यहीं से निवेशकों को एक योजना से दूसरी योजना में पैसा ट्रांसफर करने के लिए तैयार किया जाता था. ज्यादा रिटर्न का लालच देकर कथित तौर पर उन्हें नए प्लेटफॉर्म पर निवेश करने के लिए कहा जाता था.

दुबई में फ्लैट और क्रिप्टो का लालच

पुलिस की जांच में कथित रैकेट से जुड़े कई नाम और प्लेटफॉर्म सामने आए हैं. इनमें ब्लूम ड्राइव, LPNT क्रिप्टोकरेंसी, SOIL VERSE और मेचाई एफएक्स शामिल बताए जा रहे हैं.

जांच अधिकारियों के मुताबिक, निवेशकों को सिर्फ ऐप पर मुनाफे के आंकड़े नहीं दिखाए जाते थे, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी दिलाया जाता था कि उनके लिए दुबई में फ्लैट तक बुक किए जा चुके हैं. बाद में क्रिप्टो और दूसरे निवेश विकल्पों के नाम पर रकम को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर ले जाने के लिए कहा जाता था.

पुलिस का कहना है कि राजेश इस नेटवर्क में एक अहम भूमिका निभाता नजर आ रहा है. जांच के मुताबिक, उसके एक परिचित ने उसे ब्लूम नाम के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा था. राजेश ने शुरुआत में छोटी रकम लगाई और बाद में दूसरे प्लेटफॉर्म में करीब 2 लाख रुपये तक निवेश किया.

इसके बाद कथित तौर पर उसने खुद नए लोगों को इन योजनाओं से जोड़ना शुरू कर दिया. चंडीगढ़, मोहाली और दूसरे शहरों में होने वाले सेमिनारों में भी वह शामिल होता था, जहां निवेश योजनाओं को लेकर लोगों को आकर्षित किया जाता था.

रेहड़ी से सीनियर प्रोजेक्ट हेड तक का सफर

पुलिस के मुताबिक, राजेश धीरे-धीरे नेटवर्क में आगे बढ़ता गया और नए निवेशकों को जोड़ने के एवज में उसे कथित तौर पर बड़ा हिस्सा मिलने लगा. बाद में उसे सीनियर प्रोजेक्ट हेड तक की जिम्मेदारी दिए जाने का भी दावा किया गया है.

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, राजेश ने कथित तौर पर दावा किया था कि उसे मर्सेडीज सी-क्लास गिफ्ट में मिली और उसने कम समय में करीब 2 करोड़ रुपये कमाए. अब पुलिस उसके आलीशान फार्महाउस और दूसरी संपत्तियों की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें से कितनी संपत्ति कथित अपराध से अर्जित रकम से जुड़ी है.

इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कुछ ही साल में एक साधारण रेहड़ी चलाने वाले व्यक्ति के पास लग्जरी कार, फार्महाउस और करोड़ों के निवेश नेटवर्क तक पहुंच कैसे बनी.

चार आरोपी गिरफ्तार, दुबई तक पहुंची जांच

इस मामले में पुलिस अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें करनाल के राजेश और उदम सिंह, यमुनानगर के सुशील कुमार और कुरुक्षेत्र के लाडवा निवासी संजीव कुमार शामिल हैं.

पुलिस ने कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए हैं. इन उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल डेटा से निवेशकों, पैसों के लेनदेन और कथित नेटवर्क के दूसरे सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं.

जांच में अब दुबई कनेक्शन भी सामने आया है. पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क को विदेश में बैठे कुछ लोग भी संचालित कर रहे थे. रविंदर बांगर, सतीश मोखरा, देविंदर बांगर, करमजीत, बीएस रंधावा और हैप्पी शेख समेत कुछ अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है. पुलिस के मुताबिक, रविंदर बांगर और हैप्पी शेख के दुबई में होने का संदेह है और दोनों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है.

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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