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फरीदाबाद के कोट गांव में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित बाबा लटा धारी मंदिर आस्था के साथ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी खास है. मंदिर तक पहुंचने के रास्ते में पहाड़ों का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है. स्थानीय लोगों के बीच मंदिर को लेकर वर्षों पुरानी आस्था है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
फरीदाबाद में अगर आपको पहाड़ों के बीच शांति और सुकून का एहसास करना है तो कोट गांव का बाबा लटा धारी मंदिर जरूर देख सकते हैं. अरावली की पहाड़ियों के बीच बना यह मंदिर काफी पुराना बताया जाता है. कोट गांव से मंदिर तक पहुंचने का रास्ता पहाड़ी इलाकों से होकर जाता है. जैसे जैसे आप ऊपर की तरफ बढ़ते हैं वैसे वैसे आसपास का नजारा बदलने लगता है. चारों तरफ पहाड़ दिखाई देते हैं. नीचे का नजारा देखकर आपको कुछ देर के लिए हिमाचल या उत्तराखंड जैसा महसूस हो सकता है.
इस मंदिर में पिछले 20 साल से पुजारी नारायण दास पूजा पाठ कर रहे Local18 से बातचीत में नारायण दास बताते हैं कि मंदिर काफी पुराना है और यहां दूर दूर से लोग दर्शन करने आते हैं. मंदिर को लेकर लोगों में गहरी आस्था है. श्रद्धालु अपनी परेशानी और मनोकामना लेकर यहां पहुंचते हैं और बाबा के सामने मत्था टेकते हैं मैंने मंदिर से जुड़ी कई ऐसी बातें सुनी और देखी हैं जिन्हें लोग चमत्कार मानते हैं.
स्थानीय लोगों की मानें तो बाबा लटा धारी मंदिर हजारों साल पुराना है. मंदिर की सही उम्र को लेकर कोई पक्का रिकॉर्ड सामने नहीं है लेकिन गांव के लोगों की आस्था पीढ़ियों से इस मंदिर से जुड़ी हुई है बुजुर्गों से लेकर आज की पीढ़ी तक लोग यहां दर्शन करने आते हैं लोगों का मानना है कि सच्चे मन से बाबा के दरबार में आने वाले भक्त की मनोकामना पूरी होती है. इसी विश्वास की वजह से मंदिर में हर समय श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है.
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पुजारी नारायण दास और स्थानीय लोग मंदिर से जुड़ी कई ऐसी घटनाओं का जिक्र करते हैं जिन्हें वे बाबा की कृपा मानते हैं. पहाड़ी इलाके में कई बार हादसे जैसी स्थिति बनी लेकिन लोगों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ. यहां तक कि ट्रैक्टर पलटने जैसी घटनाओं में भी लोगों के सुरक्षित बचने की बातें सामने आती रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं के बाद लोगों की मंदिर के प्रति आस्था और भी मजबूत हुई है. हालांकि इन घटनाओं को लोग अपनी आस्था से जोड़कर देखते हैं.
कोट गांव और आसपास के इलाकों के लोग किसी भी शुभ काम से पहले बाबा लटा धारी मंदिर में मत्था टेकने पहुंचते हैं. शादी विवाह हो या घर में कोई दूसरा बड़ा काम लोग बाबा का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते हैं. कई परिवारों की मंदिर से पुरानी आस्था जुड़ी हुई है. लोगों का कहना है कि बाबा के दरबार में कुछ देर बैठने से मन को शांति मिलती है. यही वजह है कि सिर्फ पूजा के लिए ही नहीं बल्कि सुकून पाने के लिए भी लोग यहां पहुंचते हैं.
मंदिर तक पहुंचने के दौरान सबसे खास चीज यहां का पहाड़ी नजारा है. जैसे ही आप अरावली की पहाड़ियों पर ऊपर की तरफ बढ़ते हैं वैसे ही शहर का शोर पीछे छूटता जाता है. चारों तरफ छोटी बड़ी पहाड़ियां दिखाई देती हैं. नीचे देखने पर पूरा इलाका अलग नजर आता है. हरियाणा में रहते हुए भी यहां पहुंचकर ऐसा लगता है जैसे किसी पहाड़ी राज्य में आ गए हों. खासकर बारिश के मौसम में आसपास का माहौल और भी खूबसूरत हो जाता है और यहां का नजारा लोगों को अपनी तरफ खींचता है.
मंदिर में पर्व और त्योहारों के मौके पर विशेष पूजा पाठ का आयोजन किया जाता है. कई मौकों पर यहां भंडारा भी लगाया जाता है जिसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं. त्योहारों के समय मंदिर में रौनक काफी बढ़ जाती है. स्थानीय लोग मिलकर धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं. इन आयोजनों की वजह से मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं रहता बल्कि गांव के लोगों के आपसी मेल मिलाप का भी एक बड़ा केंद्र बन जाता है.
बाबा लटा धारी मंदिर धार्मिक आस्था के साथ साथ फरीदाबाद की उन जगहों में शामिल है जहां पहुंचकर आपको प्रकृति के करीब होने का एहसास होता है. अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर शहर की भागदौड़ से कुछ समय दूर सुकून देता है. जिन लोगों को पहाड़ और शांत माहौल पसंद है उनके लिए यह जगह खास हो सकती है. मंदिर की पुरानी मान्यताएं और आसपास का प्राकृतिक नजारा इसे अलग पहचान देते हैं. अगर आप फरीदाबाद में रहते हैं तो कोट गांव की इस पहाड़ी जगह को जरूर देख सकते हैं.










