Last Updated:
Ambala News : इन दिनों अंबाला में जोड़ों के दर्द से परेशान मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. बुजुर्ग, गठिया के मरीज और वे लोग जिन्हें पहले कभी हड्डियों या जोड़ों में चोट लगी हो, अकड़न और सूजन की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. लोकल 18 से अंबाला की होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता बताती हैं कि अगस्त के दौरान मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है. तापमान में उतार-चढ़ाव और ठंडक बढ़ने से लोग शारीरिक गतिविधियां कम कर देते हैं. यही आदत शरीर में खिंचाव पैदा करती है, जिससे जोड़ों का दर्द बढ़ने लगता है.
अंबाला. अगस्त की शुरुआत के साथ मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है. कभी तेज बारिश, कभी उमस तो कभी ठंडी हवाएं लोगों को राहत देने के साथ नई स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा कर रही हैं. इन दिनों अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण के साथ-साथ जोड़ों के दर्द से परेशान मरीजों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. खासकर बुजुर्ग, गठिया के मरीज और वे लोग जिन्हें पहले कभी हड्डियों या जोड़ों में चोट लगी हो, मौसम बदलते ही दर्द, अकड़न और सूजन की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. लोकल 18 से अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता बताती हैं कि अगस्त के दौरान मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है, जिसमें तापमान में उतार-चढ़ाव और ठंडक बढ़ने से लोग शारीरिक गतिविधियां कम कर देते हैं और लंबे समय तक बैठे रहते हैं. यही आदत शरीर में खिंचाव पैदा करती है, जिससे जोड़ों का दर्द बढ़ने लगता है.
शरीर को सक्रिय रखना जरूरी
डॉ. रजिता कहती हैं कि यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों में जॉइंट पेन के मरीजों की संख्या पहले की तुलना में काफी अधिक देखने को मिल रही है. डॉ. रजिता के मुताबिक, दर्द से बचने का सबसे आसान तरीका नियमित दिनचर्या अपनाना है. रोज सुबह जल्दी उठकर हल्की एक्सरसाइज, योग और स्ट्रेचिंग जरूर करनी चाहिए. कई लोग दर्द होने पर पूरी तरह आराम करने लगते हैं, लेकिन लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से जोड़ों की जकड़न और बढ़ सकती है, इसलिए शरीर को सक्रिय रखना बेहद जरूरी है.
ये रहा घरेलू उपाय
डॉ. रजिता बताती हैं कि होम्योपैथी में हर मरीज का उपचार उसके लक्षणों के आधार पर किया जाता है. यदि किसी व्यक्ति को आराम करने के बाद दर्द बढ़ता है तो उसके लिए अलग दवा दी जाती है, जबकि चलने-फिरने या काम करने पर दर्द महसूस होने वाले मरीजों का उपचार अलग तरीके से किया जाता है. दवा शुरू करने से पहले यह भी देखा जाता है कि मरीज को सांस या त्वचा से जुड़ी कोई अन्य समस्या तो नहीं है, ताकि उसी के अनुरूप दवा का चयन किया जा सके. डॉ. रजिता के अनुसार, दाल और सब्जियों में काली मिर्च का सीमित मात्रा में इस्तेमाल जोड़ों के दर्द में लाभकारी माना जाता है. विशेष रूप से अरबी, राजमा, भिंडी और कढ़ी जैसी सब्जियां खाने के बाद ऊपर से थोड़ी काली मिर्च डालने से फायदा मिल सकता है. मौसम के अनुसार तोरी, घीया जैसी हरी और हल्की सब्जियों को भोजन में शामिल करना चाहिए. ये शरीर को पोषण देने के साथ पाचन और हड्डियों की सेहत के लिए भी बेहतर मानी जाती हैं.
ये चीजें बढ़ा सकती हैं परेशानी
डॉ. रजिता बताती हैं कि जिन लोगों को पहले कभी हड्डी या जोड़ों में चोट लगी हो, उन्हें मौसम बदलने के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. ऐसे लोगों को नियमित व्यायाम नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि पुरानी चोट वाले हिस्से में दोबारा दर्द उभरने की आशंका बढ़ जाती है. तंबाकू और अन्य नशे से दूरी बनाने की सलाह देते हुए कहा कि ये हड्डियों और जोड़ों की मजबूती पर नकारात्मक असर डालते हैं और दर्द की समस्या को बढ़ा सकते हैं. यदि जोड़ों का दर्द लंबे समय तक बना रहे, सूजन बढ़ जाए या चलने-फिरने में परेशानी होने लगे तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. समय पर उपचार, नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर बदलते मौसम में होने वाले जोड़ों के दर्द से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है.
About the Author

प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
और पढ़ें










