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Faridabad ki local news : फरीदाबाद में मंदिरों में चढ़ाए गए फूल अब कचरे में नहीं फेंके जाएंगे. विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन और नगर निगम की पहल से इन फूलों से धूपबत्ती, हवन सामग्री, गुलाल और खाद बनाई जा रही है. पिछले 7 महीनों में 15 मंदिरों से 20 टन से ज्यादा पूजन सामग्री जुटाई गई. इस काम को देखने जर्मनी से 11 लोगों का प्रतिनिधिमंडल भी फरीदाबाद पहुंचा. लोकल 18 से विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के अध्यक्ष एसएस बांगा बताते हैं कि मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों को नदियों, नालों या कचरे में फेंकने के बजाय उनसे कई उपयोगी चीजें बनाई जा सकती हैं. फूलों के अलावा बची हुई सामग्री से खाद बनाई जाती है.
फरीदाबाद. मंदिरों में भगवान को चढ़ाए जाने वाले फूल पूजा के बाद अक्सर कूड़े में फेंक दिए जाते हैं. ये फूल नालों और दूसरी जगहों पर पहुंचकर गंदगी बढ़ाते हैं. फरीदाबाद में अब इन्हीं फूलों से धूपबत्ती, हवन सामग्री, प्राकृतिक गुलाल और खाद तैयार की जा रही है. इससे फूलों के कचरे का इस्तेमाल हो रहा है और लोगों के लिए रोजगार के मौके भी बन रहे हैं. विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन और नगर निगम फरीदाबाद ने महाशिवरात्रि के मौके पर इस पहल की शुरुआत की थी. बीते सात महीनों में शहर के 15 मंदिरों से 20 टन से ज्यादा फूलों और दूसरी पूजन सामग्री को इकट्ठा किया गया है. इस पहल को देखने के लिए जीआईजेड इंडिया के 11 सदस्यीय जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने भी फरीदाबाद के फूल पुनर्चक्रण केंद्र का दौरा किया और यहां फूलों से उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया को समझा.
ऐसे बनाते हैं उत्पाद
लोकल 18 से विक्टोरा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के अध्यक्ष एसएस बांगा बताते हैं कि मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों को नदियों, नालों या कचरे में फेंकने के बजाय उनसे कई उपयोगी चीजें बनाई जा सकती हैं. इसके लिए सबसे पहले मंदिरों से फूलों को इकट्ठा किया जाता है. फिर केंद्र पर उनकी छंटाई की जाती है और फूलों को सुखाया जाता है. इसके बाद उन्हें पीसकर पाउडर तैयार किया जाता है, जिससे धूपबत्ती, हवन सामग्री और प्राकृतिक गुलाल जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं. फूलों के अलावा बची हुई जैविक सामग्री से खाद भी तैयार की जाती है.
बांगा बताते हैं कि अभी यह काम शहर के केवल 15 मंदिरों से शुरू किया गया है, जबकि फरीदाबाद में इससे कहीं ज्यादा मंदिर हैं. अगर नगर निगम इस अभियान को सभी मंदिरों तक पहुंचाता है, तो बड़ी मात्रा में फूलों के कचरे का सही इस्तेमाल किया जा सकता है. मंदिरों के साथ गुरुद्वारों और शादी समारोहों में इस्तेमाल होने वाले फूलों को भी इस तरह काम में लाया जा सकता है. इससे शहर में कचरा कम करने के साथ धूपबत्ती, हवन सामग्री और खाद जैसे उत्पाद तैयार करने की संभावनाएं बढ़ेंगी. बांगा कहते हैं कि इस काम में फूलों को मंदिरों से केंद्र तक लाने के लिए गाड़ी के चालक और सहायक की जरूरत होती है. केंद्र पर फूलों की छंटाई करने, उन्हें सुखाने और दूसरे कामों के लिए भी लोगों की जरूरत पड़ती है. इस तरह फूलों को उपयोगी उत्पादों में बदलने की पूरी प्रक्रिया में रोजगार के मौके बनते हैं.
क्या है आगे का प्लान
फरीदाबाद में चल रहे इस काम को देखने के लिए जीआईजेड इंडिया के 11 सदस्यीय जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने फूल पुनर्चक्रण केंद्र का दौरा किया. प्रतिनिधियों ने फूलों के संग्रहण से लेकर उनसे धूपबत्ती और खाद तैयार करने तक की प्रक्रिया को देखा. नगर निगम आयुक्त यशेंद्र सिंह ने कहा कि फरीदाबाद के सभी मंदिरों को इस अभियान से जोड़कर इसे आगे बढ़ाया जाएगा. बांगा बताते हैं कि विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन फूलों के कचरे का इस्तेमाल करने के अलावा पौधारोपण और पेड़ों की देखभाल के लिए भी काम कर रहा है. फाउंडेशन की ओर से अलग-अलग जगहों पर पौधे लगाए जाते हैं और पार्क विकसित किए जाते हैं. फरीदाबाद के सेक्टर-8 में भी कई स्थानों पर पेड़ लगाए गए हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…







