चंडीगढ़. हरियाणा और चंडीगढ़ में आईडीएफसी बैंक में 604 करोड़ रुपये के घोटाले में हाल ही में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की है. ऐसे में चार्जशीट में बड़े खुलासे हुए हैं. इस केस में हरियाणा के छह आईएएस अधिकारी भी आरोपी हैं और उन्हें लेकर बड़े खुलासे हुए हैं.
दरअसलस, सीबीआई ने छह आईएएस अधिकारी साकेत कुमार, राम कुमार सिंह, पंकज आवाल, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन शामिल को आरोपी बनाया है. चार्जशीट में कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं. इसमें सरकारी पैसे से मौज भी की गई है.
आईएएस पंकज अग्रवाल ने सरकारी कैश पर की ऐश
चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि तत्कालीन स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त एवं सचिव और बाद में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव रहे पंकज अग्रवाल ने सरकारी पैसे पर ऐश की. बैंक के अधिकारी रिभव ऋषि ने अग्रवाल के लिए मुजरा पार्टियों, होटल में ठहरने और महिलाओं की व्यवस्था भी करवाई. पंचकूला से सटे जीरकपुर के एक होटल में नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच चार बार मुजरा पार्टियां हुई. इनमें डांस कलाकारों, खानपान और शराब का खर्च रिभव ऋषि ने उठाया.
अमर उजाला की खबह के अनुसार, 24 दिसंबर 2025 को चंडीगढ़ के ट्रिब्यून चौक के पास एक निजी होटल में महिला को बुलाया गया और इसका भुगतान रिभव के करीबी अभय कुमार ने किए थे. 10 जनवरी 2026 को मोहाली के होटल में एक सुइट बुक कर महिला को बुलाया गया.
रिभव ऋषि के पैसों से 75.000 रुपये की पेमेंट की गई. अक्टूबर 2025 में दिल्ली में एक होटल रिभव ऋषि के क्रेडिट कार्ड से बुक कराया गया. अमर उजाला ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि अक्तूबर 2025 में ही पंकज अग्रवाल की पत्नी के लिए चंडीगढ़ के होटल में पार्टी आयोजित की गई और इसका पूरा खर्च रिभव ऋषि ने नकद किया था.गौर रहे कि पंकज अग्रवाल 2000 बैच के आईएएस अफरस हैं.
सुनारों की भूमिका
आईडीएफसी बैंक और एयू स्माल फाइनेंस बैंक में संचालित सरकारी खातों के बैलेंस में कथित गड़बड़ी की गई थी. इसमें अब ईडी ने मंगलवार को मलिक ज्वेलर्स, केएलजी ज्वेल्स, श्याम ज्वैलर्स, एमबी गोल्ड ट्रेडर्स, सुंदर ज्वेलर्स और गौरव कंसल से जुड़े ठिकानों पर रेड डाली थी. ईडी के अनुसार, गौरव कंसल ने कथित तौर पर रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने और कई स्तरों पर घुमाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई. गौर रहे कि चंडीगढ़ और हरियाणा के सरकारी विभाग के 600 करोड़ से अधिक की रकम आरोपियों ने डकार ली थी. इसमें कुल 17 आरोपी बनाए गए हैं. बैंक के कर्मचारी और अफसरों की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ था. हालांकि, बाद में बैंक को यह पैसे सरकार को लौटाने पड़े थे.













