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Who is Mohan Dhiman : अंबाला के फाइन आर्ट शिक्षक, कलाकार और फोटोग्राफर मोहन धीमान सुर्खियों में हैं. उनकी पेटिंग ‘In the Shadow of Fire’ को प्रोफेशनल श्रेणी में स्टेट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. लोकल 18 से मोहन धीमान ने बताया कि इस पेंटिंग के पीछे एक खास कहानी है, जिसने उन्हें झकझोर कर रख दिया. माजरी इलाके में उन्होंने 80 साल से ज्यादा उम्र के एक बुजुर्ग को सुबह से शाम तक भट्टी के सामने हथौड़ा चलाते देखा था. धीमान के लिए यह सिर्फ एक व्यक्ति का संघर्ष नहीं, बल्कि उन तमाम मेहनतकशों की कहानी थी, जो बदलते समय में भी अपने हुनर को बचाए हुए हैं.
अंबाला. कला सिर्फ रंगों और रेखाओं का मेल नहीं होती, बल्कि कई बार यह समाज की उन कहानियों को भी सामने लाती है, जिन पर लोगों की नजर तो पड़ती है, लेकिन ध्यान कम जाता है. अंबाला शहर के एसए जैन सीनियर मॉडल स्कूल के फाइन आर्ट शिक्षक, कलाकार और फोटोग्राफर मोहन धीमान ने शहर के माजरी क्षेत्र में मेहनत करते एक बुजुर्ग की जिंदगी के इसी संघर्ष को अपने कैनवास पर उतारा है. उनकी कलाकृति ‘In the Shadow of Fire’ ने अब उन्हें राज्य स्तर पर पहचान दिलाई है. इस कलाकृति के लिए उन्हें प्रोफेशनल श्रेणी में स्टेट अवार्ड से सम्मानित किया गया है. चंडीगढ़ प्रशासन के सांस्कृतिक विभाग और चंडीगढ़ ललित कला अकादमी की ओर से आयोजित कला प्रदर्शनी के दौरान पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने मोहन धीमान को यह सम्मान प्रदान किया है. इस दौरान उन्हें प्रशस्ति-पत्र, सम्मान-चिह्न और 20 हजार रुपये की नकद राशि दी गई .
कैसे आया ख्याल
लोकल 18 से मोहन धीमान ने बताया कि इस पेंटिंग के पीछे एक ऐसा दृश्य है, जिसने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया था. शहर के माजरी क्षेत्र में उन्होंने 80 वर्ष से अधिक उम्र के एक बुजुर्ग को सुबह से शाम तक भट्टी के सामने मेहनत करते और हथौड़ा चलाते देखा था. उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका काम के प्रति समर्पण और मेहनत देखकर उनके मन में इस दृश्य को कैनवास पर उतारने का विचार आया. आधुनिक मशीनों के दौर में कई पारंपरिक काम धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वह बुजुर्ग अपने हुनर और परंपरागत काम को पूरी मेहनत से जिंदा रखे हुए थे. उनके लिए यह सिर्फ एक व्यक्ति का संघर्ष नहीं था, बल्कि उन तमाम मेहनतकश लोगों की कहानी थी, जो बदलते समय के बीच भी अपने हुनर और परंपरा को बचाए हुए हैं. इसी भावना को उन्होंने ‘In the Shadow of Fire’ में उतारने की कोशिश की.
मेहनत, संघर्ष, आत्मनिर्भरता
मोहन धीमान के मुताबिक, इस कलाकृति का संदेश यही है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र व्यक्ति के हौसले के सामने छोटी पड़ जाती है. भट्टी की आग के सामने काम करते बुजुर्ग के हाथों में उन्हें मेहनत, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की पूरी कहानी नजर आई. मोहन धीमान बताते हैं कि उनकी यह कला यात्रा वर्ष 2003 से शुरू हुई थी. इसके बाद उन्होंने लगातार कला और फोटोग्राफी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई ओर अब वर्तमान समय में इस स्टेट अवार्ड को मिलाकर अब तक 14 स्टेट और नेशनल अवार्ड हासिल कर चुके हैं. शुरुआत में पेंटिंग को इतना खास नहीं माना जाता था लेकिन उनकी मेहनत लगातार आगे बढ़ती रही और आज उनकी एक अलग पहचान बन चुकी है.
250 से अधिक विद्यार्थियों के गुरु
मोहन धीमान के मुताबिक, फोटोग्राफी के क्षेत्र में भी उनकी प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है. उनकी फोटोग्राफी का चयन दुबई स्थित HIPA और अमेरिका की एक आर्ट गैलरी के लिए भी हो चुका है .कला के साथ उनका जुड़ाव केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है बल्कि वह स्कूल में विद्यार्थियों को भी कला की बारीकियां सिखा रहे हैं. उनके मार्गदर्शन में स्कूल के 250 से अधिक विद्यार्थी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पुरस्कार हासिल कर चुके हैं. मोहन धीमान का कहना है कि एक शिक्षक के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि केवल स्वयं पुरस्कार हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ते देखना है. उनका प्रयास रहता है कि विद्यार्थी कला को केवल विषय के तौर पर न देखें, बल्कि अपने आसपास की जिंदगी, समाज और लोगों की कहानियों को समझने का माध्यम बनाएं.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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