देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार चौथी बार बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा असर हरियाणा के लोगों पर भी पड़ा है। राज्य में पेट्रोल अब औसतन 2 रुपए 60 पैसे प्रति लीटर महंगा होकर 103 रुपए के पार पहुंच गया है, जबकि डीजल की कीमत में 2 रुपए 70 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल कंपनियों की ओर से जारी नई दरें सोमवार सुबह 6 बजे से लागू कर दी गई हैं।
हरियाणा के अधिकांश जिलों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपए प्रति लीटर से ऊपर पहुंच चुकी है। सबसे ज्यादा कीमत सिरसा जिले में दर्ज की गई है, जहां पेट्रोल 104 रुपए 43 पैसे प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं डीजल की कीमत भी 95 रुपए 66 पैसे प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
बीते 10 दिनों में ईंधन की कीमतों में यह चौथी बढ़ोतरी है। इस दौरान पेट्रोल की कीमतों में कुल 6 रुपए 47 पैसे की बढ़ोतरी हो चुकी है। दो दिन पहले भी पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा किया गया था। इससे पहले 19 मई को पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी। वहीं 15 मई को पेट्रोल के दामों में 3 रुपए प्रति लीटर का बड़ा इजाफा किया गया था।
हरियाणा के अलग-अलग शहरों में नई कीमतों के बाद लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। पंचकूला में पेट्रोल 103.63 रुपए, सिरसा में 104.43 रुपए, पानीपत में 102.20 रुपए, रोहतक में 103 रुपए, फतेहाबाद में 103.73 रुपए, सोनीपत में 103.70 रुपए, हिसार में 103.54 रुपए, कैथल में 102.78 रुपए और कुरुक्षेत्र में 102.77 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत और घाटे की भरपाई के लिए दाम बढ़ाना जरूरी हो गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लंबे समय तक बनी रहती है तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
ईंधन महंगा होने का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। मालभाड़ा बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन भी महंगे हो सकते हैं। किसानों की खेती लागत भी बढ़ेगी, क्योंकि ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने में ज्यादा खर्च आएगा। इसके अलावा बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए में भी बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति, रिफाइनिंग लागत, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार के वैट के आधार पर पेट्रोल और डीजल की अंतिम कीमत तय होती है। इसी कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में ईंधन की कीमतें अलग होती हैं।













