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Ambala News : लगातार गिरते भूजल स्तर और बढ़ती सिंचाई की कीमत के बीच हरियाणा सरकार की ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है. ऐसे किसान जो धान की जगह मक्का, दलहन, तिलहन और दूसरी कम पानी वाली फसलें उगाएंगे, उन्हें 8 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. लोकल 18 से अंबाला कृषि विभाग के डीडीए जसविंदर सिंह ने बताया कि योजना के तहत किसान मक्का, कपास, मूंग, उड़द, अरहर, ग्वार, सोयाबीन, तिल, मूंगफली और अरंडी जैसी फसलें उगाकर आर्थिक लाभ उठा सकते हैं. इस समय मक्का की खेती कर सकते हैं. इसकी बिजाई का समय 15 जुलाई तक है. चौड़े खूड़ विधि से बिजाई की जाए तो सिंचाई 30 से 35 प्रतिशत कम लगती है.
अंबाला. हरियाणा में लगातार गिरते भूजल स्तर और बढ़ती सिंचाई की चुनौती के बीच अब सरकार खेती का तरीका बदलने पर जोर दे रही है. किसानों को केवल सलाह ही नहीं, बल्कि आर्थिक सहायता देकर कम पानी वाली फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है. इसी कड़ी में हरियाणा सरकार की ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है. इस योजना के तहत धान की जगह मक्का, दलहन, तिलहन और अन्य कम पानी वाली फसलें उगाने वाले किसानों को 8 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. हरियाणा में धान की खेती सबसे अधिक पानी की मांग करती है. यही वजह है कि सरकार किसानों को ऐसी फसलों की ओर ले जाना चाहती है, जिनमें कम पानी लगे और उत्पादन भी बेहतर हो. योजना के तहत किसान मक्का, कपास, मूंग, उड़द, अरहर, ग्वार, सोयाबीन, तिल, मूंगफली और अरंडी जैसी फसलें उगाकर आर्थिक लाभ उठा सकते हैं.
लोकल 18 से अंबाला कृषि विभाग के डीडीए जसविंदर सिंह ने बताया कि किसान यदि धान की जगह वैकल्पिक फसलें अपनाते हैं तो उन्हें सरकार की ओर से 8 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि मिलेगी. इस समय मक्का की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. इसकी बिजाई 15 जुलाई तक पूरी कर लेनी चाहिए. मक्का की अच्छी पैदावार के लिए रेतीली दोमट या दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है. खेत में पानी निकासी की अच्छी व्यवस्था होना जरूरी है, क्योंकि जलभराव मक्का की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है. खेत तैयार करते समय 4 से 5 बार जुताई और दो बार सुहागा लगाने से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है, जिससे अंकुरण बेहतर होता है.
इस बीज का ही करें उपयोग
जसविंदर सिंह ने किसानों को केवल कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित सामान्य और बायोफोर्टीफाइड संकर किस्मों का ही प्रयोग करने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि एक एकड़ में लगभग 8 किलोग्राम बीज पर्याप्त रहता है. बिजाई से पहले बीजोपचार करना बेहद जरूरी है. फॉल आर्मीवर्म जैसे खतरनाक कीट से बचाव के लिए क्लोरट्रानिलीप्रोल और थायमेथोक्सम युक्त कीटनाशी से बीज उपचार करें. बीमारियों से बचाव के लिए थीरम से बीजोपचार भी आवश्यक है.
पूर्व-पश्चिम दिशा में बिजाई क्यों जरूरी
जसविंदर सिंह के मुताबिक, मक्का की बिजाई पूर्व-पश्चिम दिशा में बनाई गई मेढ़ के दक्षिण भाग में 4 से 6 सेंटीमीटर की गहराई पर करनी चाहिए. यदि न्यूमैटिक प्लांटर से चौड़े खूड़ विधि द्वारा बिजाई की जाए तो अंकुरण बेहतर होता है और सिंचाई के पानी की 30 से 35 प्रतिशत तक बचत संभव है. अच्छी पैदावार के लिए गोबर की खाद के साथ निर्धारित मात्रा में डीएपी, एमओपी और यूरिया का प्रयोग कर सकते हैं. खरपतवार नियंत्रण के लिए समय पर एट्राजिन का छिड़काव और फॉल आर्मीवर्म की निगरानी के लिए प्रति एकड़ पांच फेरोमोन ट्रैप लगा सकते हैं.
कहां करें आवेदन
जसविंदर सिंह ने बताया कि ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा. किसान अपनी वैकल्पिक फसल और खेत का विवरण दर्ज करेंगे, जिसके बाद कृषि विभाग सत्यापन करेगा. पात्र पाए जाने पर 8 हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें








