हरियाणा में जोहड़ों में कचरा डालने पर पंचायतों पर लगेगा जुर्माना, शुरू हुआ ‘स्वच्छ गांव, स्वच्छ जलवायु अभियान’

On: June 8, 2026 1:28 PM
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हरियाणा सरकार और प्रदूषण नियंत्रण तंत्र ने ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में ‘स्वच्छ गांव, स्वच्छ जलवायु अभियान’ के तहत अब गांवों के जोहड़ों (तालाबों) को पूरी तरह कचरा मुक्त बनाने की मुहिम शुरू की गई है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भूजल को प्रदूषित होने से बचाना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ जल स्रोतों का संरक्षण करना है।

विशेष बात यह है कि पहली बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहरों के साथ-साथ गांवों में भी प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अब यदि किसी गांव के जोहड़ में कचरा पाया जाता है तो संबंधित पंचायत पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा। यह अभियान अप्रैल 2026 से शुरू होकर अप्रैल 2027 तक पूरे एक वर्ष तक चलेगा।

भूजल संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस

ग्रामीण क्षेत्रों में जोहड़ बारिश और नालियों के पानी के संग्रहण का प्रमुख माध्यम होते हैं। लेकिन कई जगहों पर लोग घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट पदार्थ इन जलाशयों में फेंक देते हैं, जिससे पानी दूषित हो जाता है। इसका सीधा प्रभाव जमीन के नीचे के जल स्रोतों पर पड़ता है और भूजल की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

इसी समस्या को देखते हुए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पंचायतों की जिम्मेदारी तय की है। अब गांवों में जोहड़ों की सफाई और संरक्षण सुनिश्चित करना पंचायतों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।

बीडीपीओ होंगे नोडल अधिकारी

अभियान की निगरानी के लिए ब्लॉक स्तर पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं गांव स्तर पर पंचायत सचिव, सरपंच और वार्ड पंचों को इस अभियान के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सरकार का लक्ष्य है कि एक वर्ष के भीतर प्रदेश के सभी ग्रामीण तालाबों और जोहड़ों को कचरा मुक्त बनाया जाए तथा ग्रामीणों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।

पंचायतें कर सकेंगी विशेष इंतजाम

जोहड़ों में कचरा पहुंचने से रोकने के लिए पंचायतों को अपने बजट के अनुसार आवश्यक कदम उठाने की छूट दी गई है। पंचायतें जोहड़ों के चारों ओर जाली लगवा सकती हैं या पर्याप्त बजट होने पर पक्की चारदीवारी का निर्माण भी करवा सकती हैं।

इसके अलावा घर-घर से कूड़ा संग्रहण की व्यवस्था भी लागू की जाएगी। पंचायतें स्वयं या किसी निजी एजेंसी के माध्यम से नियमित रूप से कचरा उठवाने की व्यवस्था कर सकती हैं, ताकि अपशिष्ट पदार्थ जोहड़ों तक न पहुंचें।

निरीक्षण के बाद लगेगा जुर्माना

अभियान की अवधि पूरी होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें गांवों का निरीक्षण करेंगी। यदि किसी जोहड़ में कचरा या गंदगी पाई जाती है तो संबंधित पंचायत पर 500 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

अधिकारियों का मानना है कि आर्थिक दंड की व्यवस्था पंचायतों को अधिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी।

जल्द आएंगी विस्तृत गाइडलाइन

जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी Shikha ने बताया कि इस अभियान को लेकर सरकार की ओर से जल्द विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। फिलहाल ग्राम सभाओं में पंचायतों द्वारा समझौता पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं और अभियान की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। यदि जोहड़ों में कचरा डालना बंद होता है तो भूजल की गुणवत्ता बेहतर होगी और लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण जल स्रोतों का संरक्षण भविष्य की जल सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है और यह अभियान हरियाणा के गांवों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वैशाली वर्मा

वैशाली वर्मा पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 3 साल से सक्रिय है। इन्होंने आज तक, न्यूज़ 18 और जी न्यूज़ में बतौर कंटेंट एडिटर के रूप में काम किया है। अब मेरा हरियाणा में बतौर एडिटर कार्यरत है।

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