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Kitchen Remedy : क्या आप भी बिना नहाए रसोई में चली जाती हैं. भारतीय परंपरा में इसे सही नहीं माना गया है. बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य लोकल 18 से बताते हैं कि रसोई में अन्नपूर्णा माता का वास माना जाता है. रसोई घर का सबसे पवित्र स्थान है, जहां बनने वाला भोजन पूरे परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है. स्नान करने से शरीर साफ होता है. बीमारियों का खतरा भी कम होता है. महंत कामेश्वरानंद बताते हैं कि रसोई अग्नि का स्थान है. अग्नि के पास जाने से पहले शरीर को शीतल और शांत रखना जरूरी माना गया है.
फरीदाबाद. घर के बड़े-बुजुर्गों को अक्सर अपने कहते सुना होगा कि रसोई में जाने से पहले स्नान जरूर करना चाहिए. बिना नहाए खाना बनाना और खाना भारतीय परंपराओं में सही नहीं माना जाता. यह परंपरा सिर्फ धार्मिक मान्यताओं से ही नहीं जुड़ी है बल्कि इसके पीछे साफ-सफाई और स्वास्थ्य से जुड़े कारण भी बताए जाते हैं. माना जाता है कि स्नान करने के बाद शरीर और मन दोनों में ताजगी आती है और इसी पवित्र भावना के साथ बनाया गया भोजन परिवार के लिए अच्छा माना जाता है. रसोई को घर का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है, जहां बनने वाला भोजन पूरे परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है.
शुद्ध होना जरूरी
लोकल 18 से बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि शास्त्रों में रसोई को बहुत पवित्र स्थान बताया गया है. मान्यता है कि रसोई में अन्नपूर्णा माता का वास होता है, इसलिए भोजन बनाने से पहले शरीर और मन दोनों का शुद्ध होना जरूरी माना गया है. नहा धोकर साफ मन से बनाया गया भोजन भगवान को भोग लगाने के योग्य होता है और वही भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है. जब भोजन सात्विक भावना से बनाया जाता है तो उसका असर शरीर और मन दोनों पर पड़ता है.
पहला सुख निरोगी काया
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि हमारा पहला सुख निरोगी काया है. अगर शरीर स्वस्थ रहेगा तो जीवन भी बेहतर रहेगा. बिना नहाए खाना बनाने से शरीर पर मौजूद गंदगी और कीटाणु भोजन तक पहुंच सकते हैं. इसलिए खाना बनाने से पहले साफ-सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. स्नान करने से शरीर साफ होता है और बीमारियों का खतरा भी कम होता है. यही वजह है पुराने समय से ही घर के बड़े लोग रसोई में जाने से पहले नहाने की सलाह देते आए हैं. रसोई अग्नि का स्थान होता है. अग्नि के पास जाने से पहले शरीर को शीतल और शांत रखना जरूरी माना गया है. नहाने के बाद शरीर में ताजगी आती है और मन भी शांत रहता है. इसी कारण से भोजन बनाते समय सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. सिर्फ भोजन बनाते समय ही नहीं बल्कि भोजन करने से पहले भी हाथ और पैर अच्छी तरह धोने चाहिए.
स्नान का वैज्ञानिक कारण
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि नहाने के पीछे सिर्फ धार्मिक मान्यता ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं. स्नान करने से शरीर की गंदगी दूर होती है और व्यक्ति खुद को तरोताजा महसूस करता है. साफ शरीर से बनाया गया भोजन ज्यादा स्वच्छ रहता है. शौच आदि कार्यों के बाद सबसे पहले स्नान करना चाहिए ताकि शरीर पूरी तरह साफ हो जाए. भारतीय परंपरा में सूर्योदय से पहले स्नान करना शुभ माना गया है. इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और दिन की शुरुआत अच्छे विचारों के साथ होती है. चाहे कितने भी काम क्यों न हों, स्नान करके ही दिन की शुरुआत करनी चाहिए.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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