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Organic Waste series-3: News18hindi जैविक कचरे (Organic Waste) पर 10 स्टोरीज की एक महासीरीज चला रहा है. इसमें हर दिन आपको कचरे के मैनेजमेंट और इससे पैसा कमाने को लेकर दिलचस्प जानकारियां दी जा रही हैं तो आज इसकी तीसरी कहानी में पढ़ें, कचरे से कमाना है पैसा, प्लांट लगाना कितना आसान, क्या नगरपालिका मदद करती है?
Organic Waste series-3: कचरे से कमाना है पैसा, प्लांट लगाना कितना आसान, क्या नगरपालिका मदद करती है?
Organic Waste series-3: ऑर्गनिक वेस्ट यानि जैविक कचरा, जिसमें घरों से निकला गीला कचरा भी आता है, पैसा कमाने का सबसे बढ़िया जरिया है. बशर्ते आपको इसकी जानकारी हो. कूड़े से आप न सिर्फ पैसा कमा सकते हैं बल्कि अच्छे खासे उद्योगपति भी बन सकते हैं. अगर आप अपने घर के आसपास रहकर वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाना चाहते हैं तो आपके लिए सुनहरा मौका है. आप कचरा निस्तारण के प्लांट लगाकर बायोगैस बना सकते हैं, कंपोस्ट खाद तैयार कर सकते हैं और उसे बाजार में बेच सकते हैं. अगर आपके भी जेहन में ये सवाल है कि कूड़ा तो नगर निगम या नगर पालिका के लोग भरकर ले जाते हैं, फिर अगर आपको ये काम करना है तो क्या नगर पालिका या निगम इसमें आपकी मदद कर सकते हैं? क्या नगर पालिका से जमीन की भी मदद मिल सकती है? क्या निगम आर्थिक मदद भी करता है?
तो आइए News18hindi जैविक कचरे (Organic Waste) पर 10 स्टोरीज की एक महासीरीज चला रहा है. आज की तीसरी स्टोरी में जानते हैं…कचरे से कमाना है पैसा, तो प्लांट लगाना कितना आसान, क्या नगरपालिका कुछ मदद करती है? सीईईडब्ल्यू की एक्स्पर्ट से जानते हैं पूरी बात…
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की सीनियर प्रोग्राम लीड प्रियंका सिंह कहती हैं, ‘गीला कचरा प्रबंधन व्यवसाय के संचालन का सबसे प्रचलित तरीका लोक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत नगरपालिका के साथ समझौता है. इसके अलावा वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए प्लांट के मालिक और नगरपालिका के बीच एक कंसेशनेयर एग्रीमेंट भी होता है, ताकि प्लांट के लिए तय मात्रा और गुणवत्ता के साथ जरूरी सामग्री (फीडस्टॉक) की आपूर्ति हो सके.
कचरे के प्लांट और उससे होने वाली इनकम को लेकर सभी सवालों के जवाब दे रही हैं सीईईडब्ल्यू की एक्सपर्ट प्रियंका सिंह.
हालांकि आप अपनी पूंजी और तकनीकी क्षमता के आधार पर अलग-अलग तरह के कॉन्ट्रेक्ट कर सकते हैं, जैसे साधारण सेवा अनुबंध (कचरे का एकत्रण और परिवहन), प्रबंधन अनुबंध या बड़ी प्रसंस्करण सुविधाओं के लिए बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) और डिजाइन-बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBOOT) जैसे बड़े मॉडल.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …
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