फरीदाबाद: फरीदाबाद में बारिश जहां लोगों को गर्मी से राहत दे रही है, वहीं सेक्टर 56 और इसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए यही बारिश नई मुसीबत लेकर आई है. यहां डंपिंग यार्ड से आने वाली बदबू ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. लोगों का कहना है कि बारिश होते ही कूड़े से निकलने वाली दुर्गंध और ज्यादा बढ़ जाती है और हवा के साथ आसपास की कॉलोनियों और सेक्टरों तक फैल जाती है.
हालात ऐसे हैं कि लोगों के लिए खाना पीना तो दूर की बात है, घर में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है. लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत कर चुके हैं, रोड जाम कर चुके हैं, लेकिन आज तक सिर्फ आश्वासन मिला है. वह भी लिखित में नहीं. अब लोगों को डर है कि बरसात के मौसम में यह समस्या और ज्यादा बढ़ेगी और बीमारी का खतरा भी बढ़ सकता है.
3 साल से है डंपिंग यार्ड
लोकल 18 से बातचीत मेंरामनगर निवासी मीना बताती हैं कि पिछले करीब तीन साल से वह डंपिंग यार्ड की इस समस्या को झेल रहे हैं. लोगों का कहना है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि हर बार बोलते हैं कि डंपिंग यार्ड हटा दिया जाएगा, लेकिन कब हटेगा यह कोई लिखकर नहीं देता. आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि इस समस्या का असर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पर पड़ रहा है. स्थानीय लोगों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि आखिरकार लोग जिएं कैसे. बताती हैं कि यहां बहुत गंदगी है और बच्चे बीमार पड़ रहे हैं. इस बदबू की वजह से अस्पताल जाना पड़ रहा है. जब यहां डंपिंग यार्ड बनाना था तो इस कॉलोनी को काटा क्यों गया और इस कॉलोनी को बनाया ही क्यों गया. हालत यह है कि रोटी पानी कुछ भी खाया पिया नहीं जा रहा है. सांस लेना मुश्किल हो गया है.
धरना के बाद भी नहीं हुआ समाधान
गीता बताती हैं 3 साल से इतनी ज्यादा बदबू आ रही है कि यहां रहना मुश्किल हो गया है. कई बार रोड जाम कर दिया, उसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ. गीता बताती हैं कि अगर नेताओं और प्रशासन ने जल्द इसका समाधान नहीं किया तो फिर हम खुद तय करेंगे कि कैसे समाधान होगा. बच्चों के गले में दिक्कत आ रही है. वोट देकर हम जिताते तो हैं, लेकिन बाद में हमारी सुनवाई नहीं होती है. रिंकी मिश्रा बताती हैं कि मैं 9 साल से यहां रह रही हूं. जब अधिकारियों के पास जाते हैं तो बोलते हैं कि हटा देंगे, हटा देंगे. लेकिन लिखित में लिखकर नहीं देते कि कब हटाएंगे. रिंकी मिश्रा बताती हैं कि बच्चे बीमार पड़ रहे हैं और हमारी भी तबीयत खराब है. सिर में दर्द हो रहा है इस कूड़े की वजह से. सांस लेना मुश्किल हो गया है.
देव आशीष सिंह बताते हैं कि यह डंपिंग यार्ड पिछले तीन सालों से है. यहां रहने वाले लोगों के बीच कैंसर जैसी बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है. साथ में बच्चों की तबीयत खराब हो रही है. मेरा भी तबीयत खराब हो गया था. बदबू इतनी ज्यादा है कि कूलर और पंखे तक नहीं चला पाते हैं. बदबू अंदर खींच लेता है और घर के अंदर भी रहना मुश्किल हो जाता है.
अप्रूव्ड है कॉलोनी
विनोद कुमार शर्मा बताते हैं कि 2016 में यह कॉलोनी कटी थी. 10 साल हो गए हैं, लेकिन पिछले 3 सालों में इसको नर्क बना दिया है. यह सरकार से अप्रूव्ड कॉलोनी है. करीब 200 लोगों की रजिस्ट्री भी है. MCF का हम बिल भी भर रहे हैं और जो डेवलपमेंट चार्ज है वह भी हमने भरा है. सरकारी जितने भी प्रोसीजर हैं, सब कंप्लीट हैं. विनोद कुमार शर्मा बताते हैं कि साल 2023 में हमसे बोला गया था कि यह डंपिंग यार्ड अस्थाई है. लेकिन आज तीन साल हो गए हैं. अब बंधवाड़ी बंद हुआ तो उसका असर भी हमारे इलाके पर पड़ रहा है. यहां आसपास करीब 15370 घर हैं. एक घर में अगर पांच आदमी भी मानकर चलें तो करीब एक लाख लोगों पर इसका असर पड़ रहा है.
यह किसी एक की परेशानी नहीं है, सबकी परेशानी है. मैं विधायक से भी कहना चाहता हूं, पार्षद से भी कहना चाहता हूं, मेयर से भी कहना चाहता हूं कि अपना वादा पूरा करो और डंपिंग यार्ड हटाओ. नौबत यह आ जाएगी कि सेक्टर 55 के पुल से नीचे आप नहीं आ पाओगे. विधायक, पार्षद, मेयर और मंत्री जी हम आपकी बहुत रिस्पेक्ट करते हैं, लेकिन 6-6 बार आपने वादा किया है कि डंपिंग यार्ड हटवा देंगे, परंतु डंपिंग यार्ड नहीं हटा.






