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Jhajjar News: हरियाणा के झज्जर की 12 वर्षीय दीक्षा ने हरिद्वार से बाइक पर कांवड़ यात्रा की. उज्जैन में लिया संकल्प पूरा किया. वह साध्वी और राइडर बनना चाहती है. सोशल मीडिया पर चर्चा में है.दीक्षा 27 जुलाई को हरिद्वार पहुंची थी. इसके बाद 3 अगस्त को शाम करीब 4 बजे उसने गंगाजल उठाया और कांवड़ लेकर गांव की ओर रवाना हुई.
दीक्षा के पिता टिंकू खेतीबाड़ी करते हैं और मां हाउसवाइफ हैं.
झज्जर. हरियाणा के झज्जर के बहु गांव की सातवीं कक्षा की छात्रा एक साल पहले जब 12 वर्षीय दीक्षा उज्जैन गई थी, तब उसने मन ही मन संकल्प लिया था कि वह भी कांवड़ लेकर आएगी. अब एक साल बाद उसने अपना यह संकल्प पूरा कर दिखाया. झज्जर के बहु गांव की रहने वाली सातवीं कक्षा की छात्रा दीक्षा हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकली है. खास बात यह है कि दीक्षा ने अपनी कांवड़ बाइक से उठाई, लेकिन आधे रास्ते की यात्रा पैदल भी तय की.
दीक्षा कहती है, “मैं मन से साध्वी और कर्म से राइडर बनना चाहती हूं.” उसके इसी अलग अंदाज ने उसे सोशल मीडिया पर चर्चा में ला दिया है.
दीक्षा के पिता टिंकू खेतीबाड़ी करते हैं और मां हाउसवाइफ हैं. दीक्षा उनकी इकलौती संतान है. पिता पहले डाक कांवड़ ला चुके हैं और अब बेटी ने पहली बार कांवड़ उठाई है. पिता का सपना है कि उनकी बेटी आगे चलकर एक अच्छी राइडर बने. दीक्षा 27 जुलाई को हरिद्वार पहुंची थी. इसके बाद 3 अगस्त को शाम करीब 4 बजे उसने गंगाजल उठाया और कांवड़ लेकर गांव की ओर रवाना हुई. अब अपने गांव पहुंची हैं.
उज्जैन में ही तय कर लिया था- कांवड़ लेकर आऊंगी
दीक्षा बताती है कि करीब एक साल पहले वह उज्जैन गई थी. वहीं उसके मन में कांवड़ लाने की इच्छा हुई और उसने तय किया कि अगली बार वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर आएगी. इस बार उसने अपना संकल्प पूरा किया. कांवड़ यात्रा के दौरान दीक्षा ने जो माला, कपड़े और कुंडल पहने हैं, वह सभी उसने उज्जैन से ही खरीदे थे. धार्मिक आस्था के साथ बाइक चलाने के शौक का यह अनोखा मेल उसकी यात्रा को खास बना रहा है.
पिता की दो इच्छाएं- बेटी राइडर बने और गांव का नाम बदले
दीक्षा के पिता टिंकू का कहना है कि उनकी दो इच्छाएं हैं. पहली इच्छा है कि उनकी बेटी आगे चलकर राइडर बने और अपनी अलग पहचान बनाए. दूसरी इच्छा है कि गांव को उसके पुराने नाम भवनगढ़ से जाना जाए. वर्तमान में गांव को बहु के नाम से जाना जाता है. कांवड़ यात्रा के साथ दीक्षा की अपनी भी कुछ इच्छाएं हैं. वह चाहती है कि गाय को राष्ट्र पशु का दर्जा दिया जाए. दीक्षा नॉनवेज नहीं खाती और उसका कहना है कि सभी जीव-जंतुओं के प्रति दया का भाव होना चाहिए. दीक्षा कहती है कि उसे पशु-पक्षियों से लगाव है और वह चाहती है कि लोग जीवों के प्रति दया रखें और शाकाहारी बनें.
आस्था, बाइक और सपनों का अनोखा संगम
12 साल की दीक्षा की यह कांवड़ यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है. इसमें उसके पिता का सपना, बेटी का राइडर बनने का जुनून और उज्जैन में लिया गया संकल्प भी शामिल है. बाइक पर कांवड़ लेकर निकली दीक्षा के वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे हैं और लोग उसके जज्बे की तारीफ कर रहे हैं.
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Vinod Kumar Katwal is a Senior journalist with over 14 years of experience across print and digital media. He currently serves as a Senior Correspondent at News 18 Hindi, leading Himachal Pradesh, Chandigarh an…
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