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Animal Husbandry Tips : हरियाणा में लंपी स्किन डिजीज (LSD) की रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. मुंहपका-खुरपका और गलघोटू के लिए अंबाला में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 100 प्रतिशत टीकाकरण पहले ही पूरा कर लिया गया है. अंबाला पशुपालन विभाग के उपनिदेशक अशोक कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि अब विभाग का फोकस लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम पर है. मौसम में बदलाव के साथ पशुओं में कई तरह के संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. किसान भाई जिला पशुपालन विभाग में जाकर भी अपने पशुओं को वैक्सीन लगवा सकते हैं. मक्खी, मच्छर और चीचड़ जैसे कीटों की रोकथाम के लिए बाड़े में दवा का छिड़काव करें.
अंबाला. मौसम बदलते ही पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है. बरसात के मौसम में नमी और बदलते तापमान के बीच पशुओं में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. खासकर मुंहपका-खुरपका (एफएमडी), गलघोटू और लंपी स्किन डिजीज जैसी बीमारियां पशुपालकों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं. इसी को देखते हुए अंबाला पशुपालन विभाग ने पहले से ही मोर्चा संभाल लिया था. अभी तक जिले में मुंहपका-खुरपका और गलघोटू के खिलाफ निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 1 लाख 94 हजार पशुओं का टीकाकरण पूरा किया जा चुका है. अब विभाग का फोकस लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम पर है.
गांव-गांव घूम रही टीमें
अंबाला पशुपालन विभाग के उपनिदेशक अशोक कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि मौसम में बदलाव के साथ पशुओं में कई तरह के संक्रमण फैलने की आशंका रहती है. इसी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार की ओर से पशुओं के लिए नि:शुल्क टीकाकरण अभियान चलाया गया. विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण कर रही हैं, ताकि बीमारी फैलने की स्थिति पैदा न हो. मुंहपका-खुरपका और गलघोटू के लिए जिले में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार टीकाकरण 100 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है. अंबाला शहर क्षेत्र में 43,960, अंबाला छावनी में 54,010, बराड़ा ब्लॉक में 42,360 और नारायणगढ़ क्षेत्र में 53,670 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा हो चुका है.
सावधानी बेहद जरूरी
अशोक कुमार कहते हैं कि फिलहाल प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज (LSD) की रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. पशुपालक जिला पशुपालन विभाग में जाकर भी पशुओं का टीकाकरण करवा सकते हैं. गांवों में स्थापित छोटे पशु चिकित्सा अस्पतालों में भी वैक्सीन उपलब्ध कराई जा रही है. अशोक कुमार कहते हैं कि बीमारी से बचाव के लिए सिर्फ वैक्सीन ही नहीं, बल्कि पशुपालकों की सावधानी भी बेहद जरूरी है. यदि किसी पशु में संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तुरंत दूसरे स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए. इससे संक्रमण के दूसरे पशुओं तक पहुंचने की संभावना कम हो जाती है.
तुरंत करें संपर्क
बरसात के मौसम में पशुओं के बाड़े की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें. मक्खी, मच्छर और चीचड़ जैसे कीटों की रोकथाम के लिए बाड़े में दवा का छिड़काव करें. अगर किसी पशु में तेज बुखार, त्वचा पर गांठें या फोड़े जैसे लक्षण नजर आएं तो बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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