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Ambala News: डेंगू में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता और संक्रमण दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं, लेकिन हर बार प्लेटलेट्स कम होने का कारण डेंगू ही हो, यह जरूरी नहीं है. डॉक्टर ने बताया कि शरीर में होने वाले दूसरे संक्रमणों में भी प्लेटलेट्स प्रभावित हो सकते हैं.
अंबाला: डेंगू का नाम सुनते ही सबसे पहले लोगों के मन में प्लेटलेट्स का ख्याल आता है. दरअसल बुखार के साथ प्लेटलेट्स कम होने लगे तो मरीज और उसके परिजन घबरा जाते हैं. यही वजह है कि प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए लोग कीवी समेत कई तरह के फल और घरेलू नुस्खे अपनाने लगते हैं. लेकिन क्या सिर्फ कीवी ही प्लेटलेट्स के लिए फायदेमंद है? आयुर्वेद में खान-पान और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को लेकर कई उपाय बताए गए हैं.
बता दे कि अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल की आयुर्वेदिक ओपीडी में भी इन दिनों बुखार और प्लेटलेट्स से जुड़ी शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं. वहीं इस बारे में नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने लोकल 18 को बताया कि डेंगू में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता और संक्रमण दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने कहा कि डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं, लेकिन हर बार प्लेटलेट्स कम होने का कारण डेंगू ही हो, यह जरूरी नहीं है. शरीर में होने वाले दूसरे संक्रमणों में भी प्लेटलेट्स प्रभावित हो सकते हैं.
शरीर की इम्युनिटी को मजबूत रखना भी जरूरी
वहीं डॉ. जितेंद्र वर्मा के बताते हैं कि बीमारी के दौरान मरीज को केवल प्लेटलेट्स बढ़ाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि शरीर की इम्युनिटी को मजबूत रखना भी जरूरी है. इसके लिए पर्याप्त आराम, साफ-सफाई और संतुलित खान-पान बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने लोगों को सलाह दी कि बुखार या डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा या आयुर्वेदिक औषधि लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह जरूर लें. उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में त्रिभुवन कीर्ति रस जैसी औषधियों का उल्लेख मिलता है, जिनका इस्तेमाल बुखार की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह से किया जाता है. हालांकि, इसे बिना डॉक्टर की सलाह के लेना सही नहीं है.
मरीज को हल्का और पौष्टिक भोजन देना जरूरी
डॉ. वर्मा ने बताया कि तुलसी के पत्ते और काली मिर्च जैसी चीजों को पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य के लिए उपयोग किया जाता है. उन्होंने कहा कि बीमारी के दौरान मरीज को हल्का और पौष्टिक भोजन देना चाहिए. पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना भी जरूरी है, क्योंकि बुखार के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है. उन्होंने फलों के सेवन की सलाह देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति महंगे फल नहीं खरीद सकता, तो भी पौष्टिक विकल्पों के जरिए शरीर को पोषण दिया जा सकता है.
डेंगू से बचाव के लिए सफाई जरूरी
उन्होंने बताया कि काले चने का सूप, हरी सब्जियों का सूप और अन्य पौष्टिक तरल आहार मरीज की डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं. डॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि प्लेटलेट्स और बुखार से जुड़ी समस्या लेकर रोजाना करीब 4 से 5 मरीज आयुर्वेदिक ओपीडी में पहुंच रहे हैं. मौसम में बदलाव के साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से डेंगू का खतरा भी बढ़ जाता है, ऐसे में उन्होंने लोगों से घर और आसपास पानी जमा न होने देने की अपील की. उन्होंने कहा कि डेंगू से बचाव में सबसे महत्वपूर्ण कदम मच्छरों की रोकथाम है. घर के आसपास पड़े पुराने टायर, गमले, कूलर और ऐसी जगहों की नियमित सफाई करनी चाहिए, जहां पानी जमा हो सकता है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.











