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Kinnow Farming Benefits : फरीदाबाद के किसान ललित मोहन सैनी धान-गेहूं की खेती से हटकर ऑर्नामेंटल प्लांट और कीनू के पेड़ लगाकर अच्छा पैसा कमा रहे हैं. लोकल 18 से ललित बताते हैं कि धान-गेहूं में लगातार घाटा हो रहा था. कभी बारिश ज्यादा हो जाती तो कभी बारिश कम होने से फसल खराब हो जाती. इन्हीं परेशानियों को देखते हुए मैंने कुछ अलग करने का फैसला लिया. सोचा कुछ हटकर किया जाए, जिसमें दो पैसे का प्रॉफिट हो और मजदूर को भी काम मिले. इसके बाद ऑर्नामेंटल प्लांट लगाया और डेढ़ एकड़ में कीनू की खेती शुरू की. ललित बताते हैं कि कीनू एक ऐसा फल है, जिसका इस्तेमाल मौसमी के साथ जूस में भी किया जाता है. इसकी अच्छी पैदावार हो रही है और मंडी में भी अच्छे दाम मिल रहे हैं.
फरीदाबाद. हरियाणा के फरीदाबाद स्थित फतेहपुर बिल्लौच गांव में किसान पहले धान और गेहूं के साथ सब्जियों की खेती किया करते थे. खेती में कभी मुनाफा होता था तो कभी नुकसान उठाना पड़ता था. किसानों की सबसे बड़ी परेशानी मौसम थी. कभी बारिश ज्यादा हो जाती है तो कभी बारिश कम होने से फसल खराब हो जाती. कई बार ओले पड़ने से खेत में खड़ी पूरी फसल बर्बाद हो जाती. ऐसी स्थिति में किसानों के सामने खेती से होने वाली कमाई को लेकर चिंता बनी रहती. इन्हीं परेशानियों को देखते हुए फतेहपुर बिल्लौच के प्रगतिशील किसान ललित मोहन सैनी ने खेती में कुछ अलग करने का फैसला लिया. उन्होंने धान और गेहूं की पारंपरिक खेती से हटकर ऑर्नामेंटल प्लांट लगाए और कमाई का नया जरिया शुरू किया. उन्होंने फलों के पौधे लगाने भी शुरू किए अब उनके खेत में कीनू के पेड़ भी लगे हुए हैं, जिनसे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है.
कहां से लाए पौधा
लोकल 18 से किसान ललित मोहन सैनी बताते हैं कि मेरा मेन काम तो ऑर्नामेंटल प्लांट का ही है. हमने फ्रूट्स के भी काफी पेड़ लगाए हुए हैं. जैसे कीनू के पौधे लगाए हैं. इसके पौधे हमने डेढ़ एकड़ में लगाए हुए हैं. एक पेड़ पर करीब एक क्विंटल के करीब कीनू निकल आता है. यह चार साल का पौधा है. इसकी वैरायटी मैं बेंगलुरु से लेकर आया था. मैंने कुछ हटकर खेती करने के बारे में सोचा. पहले धान और गेहूं की खेती करता था, उसमें तो किसान डूबता जा रहा है और कोई खास फायदा नहीं है. इसलिए मैंने सोचा कि कुछ हटकर किया जाए. दो पैसे का प्रॉफिट हो और मजदूर को भी काम मिले.
कितने रुपये किलो
ललित मोहन सैनी बताते हैं कि मंडी में कीनू 30 से 35 रुपये किलो तक जा रहा है. एक सीजन में इससे करीब लाखों रुपये की आमदनी हो जाती है. यह फायदे का सौदा है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें कीड़े वगैरह का ज्यादा कुछ खतरा नहीं है. हालांकि समय-समय पर स्प्रे करनी पड़ती है. इसकी लागत भी ज्यादा नहीं आती है. शुरुआत में जब पौधे लगाए, तब करीब 200 रुपये का एक पेड़ लेकर आए थे. अब यही पेड़ फल देने लगे हैं और इससे अच्छी आमदनी हो रही है.
बनाया नया रास्ता
ललित मोहन सैनी बताते हैं कि कीनू एक ऐसा फल है, जिसका इस्तेमाल मौसमी के साथ जूस में भी किया जाता है. इसकी अच्छी पैदावार हो रही है और मंडी में भी अच्छे दाम मिल रहे हैं. ललित कहते हैं कि धान और गेहूं की खेती में मौसम की मार और फसल खराब होने का खतरा बना रहता था, इसी वजह से मैंने खेती में बदलाव किया. अब ऑर्नामेंटल प्लांट के साथ कीनू के पेड़ों से भी कमाई का जरिया तैयार हो गया है. खेती में अगर कुछ अलग किया जाए तो कमाई के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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