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Who is Karmveer Faridabad : अटाली गांव के रहने वाले कर्मवीर पांच भाई थे. पांचों ही नशे की गिरफ्त में. एक भाई की नशे से मौत भी हो गई. 2001 में कर्मवीर के साथ ऐसा क्या हुआ कि वह एक मंदिर में गए और अचानक नशा करना छोड़ दिया. लोकल 18 से कर्मवीर बताते हैं कि नशा करने वाले सभी को मैंने दुखी और परेशान ही देखा. बेइज्जती अलग होती. मेरा परिवार भी बर्बाद हो गया. 2001 में मैंने एक फैसला किया कि जिस नशे ने मुझे बर्बाद किया है, क्यों न मैं उसी को बर्बाद कर दूं. मैंने भगवान से कहा कि मेरी मां अब इस दुनिया में नहीं है, वह ऊपर से क्या बोलेगी और समाज क्या बोलेगा कि रामवती के पांच बेटे हुए थे और पांचों ही बर्बाद हो गए. तीन भाइयों ने मेरी बात मान ली. आज हम चारों भाई नशा मुक्त हैं.
फरीदाबाद. नशे की वजह से कितने लोगों के घर टूट जाते हैं. नशे की गिरफ्त में जो बंदा एक बार आ जाता है, निकलना मुश्किल हो जाता है. ऐसी ही एक कहानी फरीदाबाद के अटाली गांव के रहने वाले कर्मवीर की है. वह पांच भाई थे और पांचों ही नशे की गिरफ्त में थे. एक भाई की नशे के कारण मौत भी हो गई. कर्मवीर की हरियाणा रोडवेज में सरकारी नौकरी थी, लेकिन 2001 में ऐसा क्या हुआ कि वह एक मंदिर में गए और अचानक उन्होंने नशा करना छोड़ दिया. जो व्यक्ति खुद नशे में चूर रहता था, उसने अचानक नशा कैसे छोड़ दिया और उसके मन में उस समय क्या विचार आया. इसके बाद वह लोगों को जागरूक करने लगे कि नशा मत कीजिए, यह नुकसानदायक है. उन्होंने नशा मुक्ति के ऊपर किताबें भी लिखी हैं और आज स्कूल, कॉलेज या किसी चौराहे पर जाकर लोगों को जागरूक करते हैं. गांव के जिस मंदिर के प्रांगण में लोग नशा करके बैठे रहते थे, आज वही मंदिर नशा मुक्त हो चुका है.
एकदम से झटका लगा
लोकल 18 से कर्मवीर बताते हैं कि मेरे दोस्त, रिश्तेदार और मेरा भाई, कितने लोग ऐसे थे जो नशा करते थे. मैंने उन सभी को दुखी और परेशान ही देखा. बेइज्जती अलग होती थी. मेरा परिवार भी बर्बाद हो गया था, क्योंकि मैं भी नशा करता था. मुझे 2001 में एकदम से झटका लगा. कई बार मैं दुर्घटना में बचा हूं. फिर मैंने एक फैसला किया कि जिस नशे ने मुझे बर्बाद किया है, क्यों न मैं उसी को बर्बाद कर दूं. मन में आया कि नशा मुक्ति केंद्र खोलेंगे और लोगों का नशा छुड़ाएंगे, जहां कोई दवा नहीं होगी और कोई फीस नहीं ली जाएगी. मैंने मंदिरों से यह अभियान शुरू किया. मैं हरियाणा रोडवेज में ड्राइवर था, तो बसों में भी यह अभियान शुरू कर दिया. ड्यूटी के दौरान भी लोगों को जागरूक करता था.
कर्मवीर बताते हैं कि 15 अगस्त 2001 की बात है. मैंने रातभर ड्यूटी की और दिन में बहुत ज्यादा शराब पी ली थी. उसी दिन मैंने फैसला कर लिया कि अगर देर की तो अब सिर्फ मौत है. मैं लाल दास बाबा के मंदिर पहुंचा. मैंने बाबा से प्रार्थना की कि मेरा नशा छुड़ा दो और फिर मैं दूसरे लोगों का भी नशा छुड़ा दूंगा. उस समय मेरी उम्र 38 साल थी. कर्मवीर बताते हैं कि हम पांच भाई थे और पांचों ही नशा करते थे. तीन भाई तो इतना नशा करते थे कि उनका मानसिक संतुलन खराब हो गया. एक भाई बहुत अच्छा गायक था और इलाके में उसका नाम था, लेकिन वह भी नशे की गिरफ्त में था. कई बार मैं लोगों को इतना समझा देता था कि वे खुद ही अपनी बीड़ी का बंडल निकालकर मुझे दे देते थे और कहते थे कि आज के बाद नशा नहीं करूंगा. मैं लोगों को समझाता था कि बीड़ी और तंबाकू खाने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. साल 2021 में मैं हरियाणा रोडवेज से रिटायर हो गया.
कर्मवीर बताते हैं कि नशे के कारण मेरे एक भाई की मौत भी हो गई. मैंने परमात्मा से कहा कि भगवान कम से कम पांचों में से किसी एक को तो बचा लो. मेरी मां अब इस दुनिया में नहीं है, वह ऊपर से क्या बोलेगी और समाज क्या बोलेगा कि रामवती के पांच बेटे हुए थे और पांचों ही बर्बाद हो गए. कम से कम एक को तो बचा लो. मेरी पुकार परमात्मा ने सुन ली. तीन भाइयों ने मेरी बात मान ली. आज हम चारों भाई नशा मुक्त हैं. मेरे गांव में ही मैंने कई लोगों का नशा छुड़ाया है. पिछले 25 सालों में हजारों लोगों को नशे से दूर करने का काम किया है.
करीब से देखी बर्बादी
कर्मवीर बताते हैं कि नशे के फैलने के कई कारण हैं और इनमें संगत भी एक बड़ा कारण है. इंसान जैसी संगत में रहता है, उसका असर उसकी जिंदगी पर पड़ता है. मेरी उम्र अभी 65 साल है. मैंने अपनी जिंदगी में नशे का नुकसान बहुत करीब से देखा है. अपने परिवार का दर्द देखा है और आसपास के लोगों को भी नशे की वजह से बर्बाद होते देखा है. इसी वजह से अब मेरा मकसद लोगों को नशे से दूर करना है, ताकि जिस नशे ने मेरे परिवार को नुकसान पहुंचाया, उससे दूसरे परिवारों को बचाया जा सके.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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