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Document Safety Tips : क्या आप भी अक्सर आधार और PAN कार्ड की कॉपी किसी को भी दे देते हैं. अगर ऐसा है तो सावधान हो जाइये. लोकल 18 ने इस बारे में फरीदाबाद सेक्टर 12 कोर्ट के एडवोकेट मोहन तिवारी से बात की. वे बताते हैं कि किसी को अपने आधार या PAN कार्ड की फोटोकॉपी देते समय सावधानी बहुत जरूरी है. एडवोकेट मोहन तिवारी के मुताबिक, अनजान व्यक्ति से दस्तावेज साझा करने से बचें. अगर दस्तावेज गलत हाथों में चला जाए तो चैट, मोबाइल नंबर, स्क्रीनशॉट, ई-मेल, बैंक/UPI रिकॉर्ड और दूसरे डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें. एक गलती से आप साइबर ठगों के चंगुल में फंस सकते हैं.
फरीदाबाद. आज के समय में आधार कार्ड, PAN कार्ड या दूसरे जरूरी दस्तावेज हर जगह काम आते हैं, लेकिन जल्दबाजी या बिना जांच-पड़ताल के किसी अनजान व्यक्ति को इनकी कॉपी या फोटो देना भारी पड़ सकता है. कई लोग भरोसा करके दस्तावेज दे देते हैं और बाद में उनके गलत इस्तेमाल की चिंता सामने आती है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दस्तावेज किसी को देने से पहले क्या सावधानी बरतें, कॉपी पर क्या लिखें और संस्था से कौन-सी जानकारी लें. इस रिपोर्ट में आपको ऐसी जरूरी बातें बताएंगे, जिनका ध्यान रखकर आप अपने दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल का जोखिम कम कर सकते हैं.
उद्देश्य जानना जरूरी
फरीदाबाद सेक्टर 12 कोर्ट के एडवोकेट मोहन तिवारी लोकल 18 बताते हैं कि आधार और PAN कार्ड देते समय यह सावधानी बहुत जरूरी है कि दस्तावेज सिर्फ उसी व्यक्ति को दें, जिस पर आपको विश्वास हो. यह भी पता होना चाहिए कि आप किस उद्देश्य से उसे आधार या PAN कार्ड की कॉपी दे रहे हैं. अगर कोई व्यक्ति आधार कार्ड या PAN कार्ड की कॉपी मांग रहा है, तो उसे देने से पहले इस बात का जरूर ध्यान रखें कि उसे इसकी जरूरत क्यों है.
मोहन तिवारी बताते हैं कि किसी भी अनजान व्यक्ति को आधार कार्ड या PAN कार्ड बिल्कुल नहीं देना चाहिए. आधार कार्ड या PAN कार्ड का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. कई बार इन दस्तावेजों की कॉपी फर्जी दस्तावेज तैयार करने में भी इस्तेमाल हो सकती है. इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने जरूरी दस्तावेज साझा करने से बचना चाहिए. मोहन तिवारी बताते हैं कि सिर्फ दस्तावेज किसी के पास चले जाने से साइबर ठगी हुई है, यह कहना मुश्किल है. लेकिन जब किसी व्यक्ति के पास आपकी जरूरी जानकारी पहुंच जाती है, तो वह आपको फोन करके अलग-अलग तरह से झूठ बोल सकता है. वह बैंक कर्मचारी बनकर या किसी दूसरी संस्था का नाम लेकर आपसे जानकारी मांग सकता है. इसलिए किसी भी फोन कॉल पर अपनी निजी या बैंक से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए.
इन पर रखें नजर
मोहन तिवारी के मुताबिक, अगर दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल या साइबर ठगी की शिकायत करनी है, तो शिकायत को मजबूत बनाने के लिए जितने अधिक वास्तविक साक्ष्य उपलब्ध हों, उन्हें सुरक्षित रखना चाहिए. जैसे दस्तावेज की भेजी गई कॉपी, WhatsApp चैट या ई-मेल, मोबाइल नंबर, संदिग्ध व्यक्ति या संस्था की जानकारी, वेबसाइट या सोशल मीडिया लिंक, बैंक या UPI लेन-देन का रिकॉर्ड, OTP या संदिग्ध संदेश से जुड़ी जानकारी, घटना की तारीख और समय, स्क्रीनशॉट और दूसरे डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें. राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत के साथ घटना से संबंधित दस्तावेज, स्क्रीनशॉट और वीडियो जैसी जानकारी उपलब्ध कराने की सुविधा दी गई है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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